ट्रंप का बड़ा बयान और सीजफायर पर स्थिति
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने की इच्छा व्यक्त की थी, जिस पर सहमति दे दी गई है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट रूप से यह भी घोषित किया है कि दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर यानी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।
ईरान की इजराइल को कड़ी चेतावनी
एक तरफ अमेरिका के साथ तनाव जारी है, तो दूसरी तरफ ईरान ने इजराइल को सीधे तौर पर धमकी दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहम्मद बाघेरी ज़ोलगदर ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इजराइल ने ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करने की कोशिश की, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा और उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह चेतावनी हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद जारी की गई है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में जबरदस्त गिरावट आई है।
समझौते को लेकर गहराया अविश्वास
ईरानी अधिकारियों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई लगातार चौड़ी हो रही है। इस अविश्वास की जड़ में तुर्की में आयोजित NATO समिट के दौरान दिए गए डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयान हैं, जिसके बाद उन्होंने एकतरफा रूप से समझौता ज्ञापन यानी MoU को रद्द कर दिया था। ईरान का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह से प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता के सिद्धांत पर टिका था, न कि केवल आपसी भरोसे पर। ईरानी पक्ष का आरोप है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हमला न करने के अपने वादे से भी किनारा कर लिया है। उनका दावा है कि अमेरिका ने उस समय ईरान पर हमला किया जब मशहद शहर में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई दी जा रही थी।
कतर कर रहा है मध्यस्थता की कोशिश
ईरान के पांच प्रांतों में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद से माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। अब कतर के वार्ताकार अधिकारी ईरान में मौजूद हैं और दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इन हमलों में ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि 78 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इन सैन्य अभियानों में मुख्य रूप से हवाई अड्डों, समुद्री निगरानी प्रणालियों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया है।
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट की स्थिति
इस बीच, रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने एक बड़ा कदम उठाया है। रोसाटॉम के CEO एलेक्सी लिखचेव के हवाले से RIA नोवोस्ती एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि कंपनी अपने पहले 6 इंजीनियरों और कर्मचारियों को ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट वापस भेज रही है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद, कंपनी ने अपने सैकड़ों कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित निकाल लिया था। वर्तमान में रोसाटॉम बुशहर में दो नई यूनिट्स के निर्माण पर काम कर रही है।
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