वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी कूटनीतिक तैयारी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर छह देशों के अहम दौरे पर रवाना होंगे

विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम की महत्वपूर्ण यात्रा पर निकल रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य खाड़ी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के साथ भारत की साझेदारी को नए स्तर पर ले जाना है।

वैश्विक कूटनीति के पटल पर भारत अपनी रणनीतिक पैठ को और मजबूत करने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया और दुनिया भर में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर एक बेहद महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस तूफानी कूटनीतिक दौरे के तहत विदेश मंत्री छह अलग-अलग देशों की यात्रा करेंगे, जिसमें चार प्रमुख खाड़ी देश, अमेरिका और बेल्जियम शामिल हैं। यह दौरा कई मायनों में भारत की भविष्य की रणनीतियों और वैश्विक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

खाड़ी देशों की पांच दिवसीय यात्रा और भू-राजनीतिक महत्व

विदेश मंत्रालय (एमईए) से मिली जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह कूटनीतिक अभियान रविवार, 5 जुलाई से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलेगा। इस शुरुआती चरण में वह चार बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी देशों, जिनमें कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं, की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र की पूरी राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। इस बदलते परिवेश में भारत इन देशों के साथ अपने पारंपरिक और रणनीतिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ करना चाहता है। अपनी इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री इन चारों देशों के अपने समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व के साथ विशेष बैठकें करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना, आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करना और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए अभियान की शुरुआत

खाड़ी देशों का अपना सफल दौरा संपन्न करने के बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने सफर के दूसरे चरण में संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर जाएंगे। वहां 13 जुलाई को वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की बड़ी दावेदारी को पेश करेंगे।

भारत वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता का दावा कर रहा है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री वहां भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य दुनिया भर के सदस्य देशों का समर्थन हासिल करना और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को और मजबूती से रेखांकित करना है।

बेल्जियम दौरा और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक

अपने छह देशों के इस सघन दौरे के अंतिम चरण में विदेश मंत्री एस. जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स का रुख करेंगे। वह 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में आयोजित होने वाली तीसरी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की अहम बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान वह यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

गौरतलब है कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की स्थापना वर्ष 2022 में की गई थी। इस परिषद का मुख्य उद्देश्य दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच अत्याधुनिक और संवेदनशील तकनीकों के सहयोग को बढ़ाना है। इसके तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिनमें शामिल हैं:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग
  • क्वांटम कंप्यूटिंग की उन्नत तकनीकें
  • सेमीकंडक्टर निर्माण और उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
  • साइबर सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा

इस बैठक के माध्यम से भारत और यूरोपीय संघ के बीच न केवल तकनीकी सहयोग बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक और आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों पक्षों को एक नया मंच मिलेगा। एस. जयशंकर का यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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