अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: व्हाट्सएप चैट से हुआ बड़ा खुलासा, टिन्नू यादव निकला असली मास्टरमाइंड

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और दान के पैसों में हुई हेराफेरी की जांच में बड़ा मोड़ आया है। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को आरोपियों के मोबाइल से मिली व्हाट्सएप चैट ने इस पूरे घोटाले की परतें खोल दी हैं।

राम मंदिर दान मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई

अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों को लेकर मचे घमासान की जांच अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच टीम (SIT) की गहन छानबीन में दान की चोरी और जमीन घोटाले के बीच गहरा संबंध निकलकर सामने आया है। जांच के दौरान मिली आरोपियों की व्हाट्सएप चैट ने इस पूरे मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। इस खुलासे के बाद अब मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

व्हाट्सएप चैट से खुले राज

इस मामले में पुलिस ने अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव जैसे कई आरोपियों को अपनी गिरफ्त में लिया है। इन सभी से लगातार पूछताछ की जा रही है। हाल ही में इन आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में जो व्हाट्सएप चैट मिली है, उसने साबित कर दिया है कि यह चोरी अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश थी। चैट के माध्यम से यह पता चला है कि मंदिर से चुराई गई रकम का बंटवारा किस तरह से किया जा रहा था।

टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका

जांच में सामने आया है कि राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पूरे रैकेट का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव व्यवस्थाओं का संचालन करते हैं। बैंक में पैसा जमा करने की पूरी जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा की देखरेख में होती थी, लेकिन सोने और चांदी के आभूषणों को सुरक्षित रखने और उनके रखरखाव की अहम जिम्मेदारी टिन्नू यादव के पास थी। इसी पद का फायदा उठाकर उसने मंदिर के चढ़ावे में बड़ा खेल किया।

व्हीलचेयर चालकों के पास मिली अकूत संपत्ति

इस घोटाले की जांच अब केवल दान पेटी तक सीमित नहीं रही है। एसआईटी की नजर अब उन व्हीलचेयर चालकों पर भी है, जो मंदिर परिसर में तैनात रहते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन चालकों की आर्थिक स्थिति में हाल के दिनों में अचानक बड़ा उछाल आया है। जांच में पता चला है कि इन लोगों के पास चार पहिया गाड़ियां हैं और इन्होंने जमीनें भी खरीदी हैं। अब जांच टीम इन व्हीलचेयर चालकों की आय के स्रोतों की भी गहराई से छानबीन कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंदिर के दान का पैसा उन तक कैसे पहुंचा।

जांच का दायरा बढ़ा

एसआईटी अब इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि आखिर मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर सुरक्षा के दावों के बीच यह बंदरबांट कैसे संभव हुआ। आरोपियों की आपसी बातचीत से यह स्पष्ट हो गया है कि वे लंबे समय से इस चोरी को अंजाम दे रहे थे। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि पुलिस की पूछताछ का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने भी अब अपनी आंतरिक व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने के संकेत दिए हैं।

https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ayodhya-ram-mandir-daan-chori-case-crucial-clues-found-on-the-mobile-phones-of-the-accused-now-wheelchair-driver-suspect-tinnu-yadav-anil-mishra-gopal-rao-local18-10624341.html