सिंहस्थ 2028 के लिए सख्त कानून की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार आगामी सिंहस्थ 2028 के भव्य आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए बेहद सख्त रुख अपना रही है। इस आयोजन की तैयारियों के बीच सरकार एक नया कानून लागू करने की तैयारी में जुटी है, जिसके जरिए मेला क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण और अवैध निर्माण से सुरक्षित रखा जाएगा। नए नियमों के मुताबिक, यदि मेला क्षेत्र की निर्धारित सीमा के भीतर कोई व्यक्ति या संस्था किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण करती है, तो इसे एक गंभीर अपराध माना जाएगा और इसके लिए जेल तक की सजा हो सकती है।
3500 से 4000 हेक्टेयर में फैलेगा मेला क्षेत्र
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, सिंहस्थ 2028 का मेला क्षेत्र लगभग 3500 से 4000 हेक्टेयर की विशाल भूमि में विस्तारित होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयोजन स्थल पर किसी भी तरह का स्थायी अतिक्रमण न हो, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था के प्रबंधन में कोई बाधा उत्पन्न न हो। इस बड़े भूभाग की निगरानी के लिए प्रशासन विशेष चौकसी बरतेगा।
लापरवाही बरतने पर अधिकारियों पर नपेंगे
नए कानून में केवल आम लोगों पर ही शिकंजा नहीं कसा जाएगा, बल्कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। यदि क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने या उसे हटाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती जाती है, तो तहसीलदार, राजस्व विभाग के अधिकारी, स्थानीय पुलिस और नगर निगम के संबंधित अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए BNS यानी भारतीय न्याय संहिता के तहत विशेष प्रावधान जोड़े जा रहे हैं। इन सभी अधिकारियों की निगरानी की जिम्मेदारी कलेक्टर की होगी, जो नियमित अंतराल पर रिपोर्ट लेंगे।
पुराने अधिनियम की जगह लेगा नया एक्ट
यह प्रस्तावित कानून वर्ष 1955 के पुराने मध्य भारत सिंहस्थ मेला अधिनियम को विस्थापित करेगा। पुराने कानून में मात्र 17 नियम थे, जिन्हें अप्रासंगिक मानते हुए सरकार अब इसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार विस्तार दे रही है। नए कानून में नियमों की संख्या बढ़ाकर 50 से अधिक की जा रही है। नगरीय विकास विभाग द्वारा इसका मसौदा पहले ही तैयार कर लिया गया है। वरिष्ठ सचिवों की समिति से मंजूरी मिलते ही इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा, और सरकार की मंशा इस बिल को आगामी मानसून सत्र में पारित कराने की है।
प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और समितियां
नए नियमों के तहत मेला अधिकारी को विशेष शक्तियां प्रदान की जाएंगी। ये अधिकारी मेला क्षेत्र की सुरक्षा, अस्थायी भूमि अधिग्रहण और समग्र प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी होंगे। भूमि अधिग्रहण केवल मेले की अवधि तक ही प्रभावी रहेगा, जिसके बाद जमीन को मूल स्वरूप में बहाल कर दिया जाएगा। आयोजन की सुचारू व्यवस्था के लिए दो स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। पहली केंद्रीय समिति होगी जिसकी अध्यक्षता संबंधित मंत्री करेंगे, जबकि दूसरी स्थानीय समिति में नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस के 15 से 20 अधिकारी शामिल रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर सरकार अन्य सदस्यों को भी इसमें शामिल कर सकेगी।
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