यूरोप दौरे पर तेजस्वी यादव
राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख चेहरों में से एक, तेजस्वी यादव एक बार फिर विदेश यात्रा पर निकल गए हैं। इस बार उनका गंतव्य यूरोप है और वे वहां करीब 10 दिनों तक रहेंगे। नेता की इस यात्रा के साथ ही बिहार की राजनीति में कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए हैं।
स्थापना दिवस की तारीख में हेरफेर
इस यात्रा के कारण सबसे ज्यादा चर्चा पार्टी के 30वें स्थापना दिवस को लेकर हो रही है। आम तौर पर राजद का स्थापना दिवस 5 जुलाई को मनाया जाता है, लेकिन इस बार इसे समय से पहले ही 1 जुलाई को आयोजित कर लिया गया। इस बदलाव ने विरोधी दलों को सवाल उठाने का मौका दे दिया है।
भाजपा और राजद के अपने तर्क
इस पूरे घटनाक्रम पर सियासी बयानबाजी भी चरम पर है। भाजपा का आरोप है कि तेजस्वी यादव ने अपनी विदेश यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रम की तारीख में बदलाव किया है। वहीं, दूसरी ओर राजद इसे एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय बता रही है और इसे किसी भी यात्रा से जोड़ने से इनकार कर रही है।
क्या विदेश यात्राओं की होड़ मची है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव का अपने क्षेत्र से दूरी बनाकर बार-बार विदेश यात्राओं पर जाना उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक बातें चल रही हैं कि क्या तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के बीच विदेश दौरे करने की कोई अघोषित प्रतिस्पर्धा चल रही है। जनता के बीच नेताजी की अनुपस्थिति और विदेश यात्राओं की आवृत्ति अब एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है।
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