कानपुर में चंद घंटों की बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, सड़कें बनीं तालाब

देर रात शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने कानपुर शहर का हाल बेहाल कर दिया है। जलभराव के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और नगर निगम के दावों की सच्चाई सामने आ गई है।

कानपुर की सड़कों पर घुटनों तक भरा पानी

कानपुर में देर रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सुबह होते ही आसमान में घने काले बादल छा गए और लगातार होती बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। बारिश के कारण शहर की प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गई हैं और ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हों। इस स्थिति का सबसे बुरा असर उन हजारों परीक्षार्थियों पर पड़ा, जो TET परीक्षा के दूसरे दिन अपने केंद्रों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते दिखे। पहली ही जोरदार बारिश ने नगर निगम के जल निकासी और नालों की सफाई के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है।

थम गई शहर की रफ्तार और बढ़ी लोगों की मुश्किलें

जलभराव की समस्या शहर के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर देखी गई। विशेष रूप से साकेत नगर, बर्रा, नौबस्ता, गोविंद नगर, फजलगंज, रावतपुर और मरियमपुर जैसे क्षेत्रों में सड़कों पर पानी का कब्जा हो गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि वाहनों का निकलना दुश्वार हो गया और जगह-जगह भीषण जाम की स्थिति पैदा हो गई। दोपहिया वाहन पानी में बंद होकर खराब हो गए, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों के लिए भी घर से बाहर निकलना एक बड़ी चुनौती बन गया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्था की असलियत सबके सामने आ जाती है।

तापमान में आई कमी लेकिन बढ़ी जन-परेशानी

शहर में खर्च होने वाले करोड़ों रुपये के बजट और ड्रेनेज सिस्टम पर अब सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम के दावों और धरातल की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को कानपुर का अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। बारिश के बाद तापमान में तो गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन जल निकासी की लचर व्यवस्था ने इस राहत को परेशानी में बदल दिया है।

आने वाले दिनों को लेकर बढ़ी चिंता

यदि आने वाले दिनों में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा और नगर निगम प्रशासन ने जल निकासी के लिए तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए, तो शहर में जलभराव की समस्या और भी गंभीर हो सकती है। फिलहाल, मानसून की पहली तेज बारिश ने ही नगर निगम की तैयारियों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है और स्थानीय जनता व्यवस्था सुधारने की मांग कर रही है।

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