PoK में पाकिस्तानी सेना की बढ़ी मुश्किलें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहां की जनता और पाकिस्तानी सेना के बीच का टकराव अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि वहां से पाकिस्तानी हुकूमत की असलियत सामने आ रही है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन पिछले 24 दिनों से लगातार जारी है। पाकिस्तानी सेना इन विरोधों को कुचलने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस दौरान संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी प्रशासन और सेना के खिलाफ जो बयान दिया है, उसने पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा खुलासा कर दिया है।
बंदूकें हमने नहीं, पाकिस्तानी सेना ने दी थीं
रावलकोट में उमड़ी करीब 800000 से ज्यादा लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी फौज की घेराबंदी की। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि पाकिस्तानी सेना ही वह संस्था है जिसने कश्मीर के लोगों के हाथों में बंदूकें थमाईं और अब वही सेना हमें आतंकवादी कहकर संबोधित कर रही है। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि आखिर जिस सेना ने हमें हथियार बांटने का काम किया, आज उनमें हमें आतंकवादी कहने की हिम्मत कैसे आ गई? यह बयान भारत द्वारा वर्षों से लगाए जा रहे उन आरोपों की पुष्टि करता है, जिनमें पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्ट्री और उसे बढ़ावा देने वाला देश बताया जाता रहा है।
आतंकवाद और पाकिस्तानी हुकूमत का गठजोड़
सरदार अमन खान ने केवल जुबानी हमला ही नहीं किया, बल्कि ठोस सबूतों की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने फरवरी 2025 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि रावलकोट के डिप्टी कमिश्नर ने स्वयं जैश-ए-मोहम्मद के एक कार्यक्रम को न केवल मंजूरी दी थी, बल्कि उसे पूरी सुरक्षा भी मुहैया कराई थी। यह वह कार्यक्रम था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी खुलेआम AK-47 और धारदार हथियार लहराते हुए देखे गए थे। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन और आतंकी संगठनों की यह साठगांठ कोई छुपी हुई बात नहीं है, बल्कि इसे सरकारी संरक्षण हासिल है।
आतंकवाद की पनाहगाह बना पाकिस्तान
पीओके के अंदर से उठ रही यह आवाजें इस बात का प्रमाण हैं कि पाकिस्तान का असली चेहरा अब वहां की स्थानीय जनता के सामने भी आ चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान अक्सर खुद को पीड़ित बताता है, लेकिन सच यह है कि भारत हो या अफगानिस्तान, पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क को पालने-पोसने में करता रहा है। जब भी इन आतंकी ठिकानों पर कोई कार्रवाई होती है, तो पाकिस्तान की हुकूमत और वहां के शीर्ष नेता इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाकर रोने लगते हैं। अपने आंतरिक विद्रोहों को दबाने के लिए भी पाकिस्तान अकसर इन आतंकी समूहों का इस्तेमाल मोहरे के रूप में करता है।
आंदोलन जारी, गिरफ्तारियों से नहीं डरेंगे प्रदर्शनकारी
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के एक बड़े नेता शौकत नवाज मीर को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रशासन को उम्मीद थी कि नेता की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन की आग ठंडी हो जाएगी, लेकिन नतीजा इसके बिल्कुल विपरीत रहा। प्रदर्शनकारी और अधिक उग्र हो गए हैं। कमेटी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे मुजफ्फराबाद मार्च करेंगे और सरकार की गिरफ्तारियां या गोलियां इस आंदोलन को रोक नहीं सकतीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब यह आंदोलन लीडर पर निर्भर नहीं है, बल्कि हर कश्मीरी नागरिक अब खुद एक लीडर बन चुका है और वह अपनी बुनियादी मांगों को पूरा कराए बिना पीछे हटने वाला नहीं है।
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