राम मंदिर में दान सुरक्षा को लेकर सख्त हुए इंतजाम
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव किए हैं। हाल ही में दान चोरी की घटनाओं के सामने आने के बाद ट्रस्ट अब पूरी तरह से सतर्क मोड में आ गया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर में आने वाली राशि और कीमती सामान पूरी ईमानदारी के साथ सुरक्षित रहें। अब से कैश की गिनती करने वाले स्टाफ के लिए बिना जेब वाली स्पेशल ड्रेस, बहुस्तरीय सुरक्षा जांच और संपूर्ण प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी जैसी सख्त व्यवस्थाएं तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
दान गिनती की पूरी प्रक्रिया बदली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर के मुख्य परिसर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर यानी पीएफसी (PFC) के बेसमेंट में एक विशेष गिनती कक्ष बनाया गया है। मंदिर परिसर में स्थापित करीब 35 दानपेटियों को नियमित रूप से यहां लाया जाता है ताकि दान की गई राशि और सामग्रियों का हिसाब किया जा सके। इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारियों को दो पारियों में विभाजित किया गया है। पहली पारी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलती है, जबकि दूसरी पारी दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होती है। प्रत्येक पारी में लगभग 20 कर्मचारी नोटों और अन्य कीमती सामान की गिनती का काम करते हैं।
कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नई ड्रेस और तलाशी
दान के पैसे की चोरी रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कर्मचारियों की पोशाक में किया गया है। अब से गिनती करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए आसमानी रंग का बिना जेब वाला यानी पॉकेटलेस गाउन पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन गाउन को केवल गिनती कक्ष के भीतर ही पहनने की अनुमति दी गई है और इसके लिए एक अलग चेंजिंग रूम भी स्थापित किया गया है।
नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत केवल ड्रेस बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि अब कर्मचारियों को कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ड्यूटी शुरू होने से पहले प्रत्येक कर्मचारी की गहन तलाशी ली जाती है। यूनिफॉर्म पहनने के बाद एक बार फिर सुरक्षा जांच की जाती है। यदि कोई कर्मचारी किसी कारणवश गिनती के बीच में वॉशरूम भी जाता है, तो उसे लौटने के बाद दोबारा चेकिंग करानी पड़ती है। सीसीटीवी कैमरों की संख्या और कवरेज को भी काफी बढ़ा दिया गया है ताकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
कैसे उजागर हुआ दान चोरी का बड़ा मामला
सूत्रों के अनुसार, दान में हेराफेरी का मामला तब सामने आया जब 3 जून को एक औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान कर्मचारियों के वॉशरूम के वेंटिलेशन में छिपाकर रखी गई नकदी की एक गड्डी बरामद हुई। इसके बाद तुरंत सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिससे एक कर्मचारी की संदिग्ध भूमिका का पता चला। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता गया, इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आने लगे। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए लोगों में गिनती करने वाले कर्मचारी, एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर भी शामिल हैं। गिरफ्तार व्यक्तियों के नाम अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव हैं। वर्तमान में ट्रस्ट ने इन कर्मचारियों की जगह अभी किसी की नियुक्ति नहीं की है और आगे का निर्णय एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
श्रद्धालुओं में चिंता और दान पर असर
दान चोरी के इस खुलासे के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के मन में भी संशय पैदा हुआ है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भगवान राम के नाम पर श्रद्धापूर्वक दान देते हैं, लेकिन इस तरह की खबरों से उनका भरोसा डगमगाया है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि दान का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो वे सीधे जरूरतमंदों, अस्पतालों या गरीबों की मदद करना बेहतर समझेंगे। हालांकि, बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो इसे अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं और उनका मानना है कि यदि किसी ने दान में हेराफेरी की है, तो उसे स्वयं भगवान दंड देंगे। मंदिर में हर महीने औसतन 4 से 5 करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन इस विवाद के बाद भविष्य में मिलने वाले दान की राशि पर क्या असर पड़ेगा, यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
6 जुलाई की बैठक पर टिकी हैं सबकी निगाहें
अब पूरी व्यवस्था और प्रशासनिक भविष्य 6 जुलाई को होने वाली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर निर्भर है। इस महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस दौरान एसआईटी द्वारा की जा रही जांच की वर्तमान स्थिति और भविष्य में उठाए जाने वाले कठोर कदमों पर भी विस्तार से चर्चा होने की पूरी संभावना है। मंदिर ट्रस्ट इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से ले रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनैतिक गतिविधि की पुनरावृत्ति न हो सके।
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