मशरूम की खेती: जमशेदपुर के स्कूली छात्रों ने बताया कम लागत में कमाई का सुपरहिट स्टार्टअप मॉडल

जमशेदपुर के हिल टॉप स्कूल के छात्रों ने मशरूम की खेती के जरिए स्वरोजगार का एक अनूठा और आसान तरीका साझा किया है, जिसमें घर के एक छोटे कमरे से शुरुआत करके 25 से 30 दिनों में मुनाफा कमाया जा सकता है।

घर से शुरू करें मशरूम का कारोबार

आज के दौर में जब युवा स्टार्टअप की ओर रुख कर रहे हैं, जमशेदपुर के हिल टॉप स्कूल के कक्षा 9 के छात्रों ने मशरूम की खेती का एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो बेहद किफायती और सरल है। इन छात्रों का मानना है कि इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए किसी भारी-भरकम निवेश या बड़े खेत की जरूरत नहीं है। यदि आपके घर में कोई भी एक खाली कमरा उपलब्ध है, तो आप वहां से मशरूम की खेती की शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपने काम को बड़े स्तर पर ले जा सकते हैं। यह बिजनेस कम लागत और सीमित जगह में भी बंपर कमाई का जरिया बन सकता है।

खेती की प्रक्रिया और तकनीक

प्रियांशी और उनकी छात्र टीम ने मशरूम उगाने की विधि को चरणबद्ध तरीके से समझाया है। उनका कहना है कि सबसे पहले मशरूम के लिए एक ऐसे कमरे का चयन करना चाहिए जो पूरी तरह साफ-सुथरा हो और जहां हवा का संचार ठीक से होता हो। मशरूम के लिए कमरे के तापमान और उसमें मौजूद नमी का प्रबंधन करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।

खेती शुरू करने के लिए गेहूं या धान के भूसे का उपयोग किया जाता है। भूसे को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है और फिर उसे गर्म पानी में उपचारित किया जाता है ताकि उसमें मौजूद फफूंद और हानिकारक बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाएं। भूसा ठंडा हो जाने के बाद, इसमें मशरूम के बीज मिलाए जाते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में स्पॉन कहा जाता है।

उत्पादन और बाजार की मांग

तैयार मिश्रण को प्लास्टिक की थैलियों में भरकर उनमें छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। इन थैलियों को कमरे के भीतर रैक पर व्यवस्थित कर दिया जाता है। लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर, उन थैलियों में सफेद धागे जैसी संरचना दिखाई देने लगती है, जो मशरूम के विकास का संकेत है। इसके बाद, उचित तापमान और नमी मिलने पर मशरूम तेजी से बढ़ने लगते हैं। छात्रों ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में मशरूम की पहली फसल मात्र 25 से 30 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है। एक बार लगाए गए बैग से किसान कई बार उत्पादन ले सकते हैं।

बाजार में मशरूम की बढ़ती मांग के पीछे इसके स्वास्थ्य लाभ हैं। मशरूम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का एक बेहतरीन स्रोत है। यही कारण है कि आज होटल, रेस्टोरेंट और घरों में मशरूम का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जो इसे व्यावसायिक रूप से एक सुरक्षित विकल्प बनाता है।

मशरूम की किस्में और सावधानियां

मशरूम की दुनिया काफी विस्तृत है और इसकी सभी प्रजातियां खाने योग्य नहीं होती हैं। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भारत में व्यावसायिक तौर पर मुख्य रूप से चार प्रकार के मशरूम उगाए जाते हैं:

  • बटन मशरूम
  • ऑयस्टर मशरूम (जिन्हें ढींगरी भी कहा जाता है)
  • मिल्की मशरूम
  • पैडी स्ट्रॉ मशरूम

ये सभी प्रजातियां सुरक्षित और व्यावसायिक रूप से लोकप्रिय हैं। हालांकि, जंगलों में मिलने वाले मशरूम को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कई जंगली मशरूम विषैले होते हैं और वे देखने में खाने योग्य मशरूम जैसे ही लग सकते हैं। इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है और इसके परिणामस्वरूप गंभीर बीमारियां या मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए, जब तक किसी विशेषज्ञ द्वारा मशरूम की पहचान न की जाए, तब तक अज्ञात जंगली मशरूम का उपयोग बिल्कुल न करें।

युवाओं और किसानों के लिए नया अवसर

प्रियांशी और उनकी टीम का मानना है कि मशरूम की खेती युवाओं और किसानों के लिए आय का एक शानदार जरिया साबित हो सकती है। यह स्टार्टअप मॉडल इस बात को साबित करता है कि अगर सही दिशा में प्रशिक्षण लिया जाए और फसलों की उचित देखभाल की जाए, तो कम समय में अच्छी कमाई करना पूरी तरह मुमकिन है। यह व्यवसाय न केवल आत्मनिर्भरता की ओर कदम है, बल्कि आधुनिक खेती की दिशा में एक बड़ा बदलाव भी ला सकता है।

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