लॉकडाउन के दौरान उपजी एक अनूठी सोच
दुनिया भर में फैले कोरोना महामारी के प्रकोप ने जब हर तरफ सन्नाटा फैला दिया था और मनोरंजन के तमाम साधन बंद हो गए थे, तब पूर्णिया के निवासी विषेक चौहान ने एक नई शुरुआत करने का फैसला किया। उस कठिन दौर में जब सिनेमाघरों पर ताले लग गए थे और लोगों का बाहर निकलना तक दूभर था, विषेक चौहान, जो रूपवानी सिनेमा के मालिक भी हैं, ने सिनेमा की परंपरा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने की ठानी। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी किताब 'Cinemas Forever' लिखने का काम शुरू किया।
ढाई साल की मेहनत और 252 पन्नों का सफर
विषेक चौहान के अनुसार, इस किताब को तैयार करना कोई आसान कार्य नहीं था। वे बताते हैं कि एक तरफ जहां सिनेमाघरों के बंद होने से फिल्म जगत में निराशा का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सिनेमा के अस्तित्व को बचाने का बीड़ा उठाया। इस किताब में कुल 252 पन्ने हैं, जिन्हें लिखने में उन्हें करीब ढाई साल का लंबा समय लगा। उन्होंने सिनेमा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को गहराई से समझा और उसे अपने शब्दों में पिरोया, ताकि पाठकों को सिनेमा का वास्तविक अनुभव मिल सके।
सिनेमाघर के अनुभव का कोई विकल्प नहीं
विषेक चौहान का मानना है कि आज के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बावजूद सिनेमा हॉल का अनुभव कभी खत्म नहीं हो सकता। वे कहते हैं कि घर पर बैठकर टीवी या मोबाइल पर फिल्म देखना और सिनेमाघर में जाकर फिल्म देखने के बीच बहुत बड़ा अंतर है। सिनेमाघर का माहौल, वहां का मनोरंजन और फिल्म के साथ बिताया गया वह समय लोगों को जो खुशी देता है, उसकी बराबरी कोई भी डिजिटल माध्यम नहीं कर सकता। उनकी किताब लोगों को फिर से सिनेमाघरों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करती है।
वैश्विक स्तर पर किताब की लोकप्रियता
अपनी इस पुस्तक के बारे में बात करते हुए विषेक चौहान ने बताया कि यह किताब न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जा रही है। अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स मंचों पर यह किताब लगातार ट्रेंड कर रही है। यहां तक कि लोकप्रिय सुपरस्टार शाहरुख खान पर लिखी गई किताबों को भी उनकी यह पुस्तक बिक्री के मामले में पीछे छोड़ चुकी है। अमेरिका, यूके, फिलीपींस, सिंगापुर और दुबई जैसे बड़े देशों में भी पाठक इस किताब को ऑनलाइन मंगा रहे हैं और इसे लेकर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
नौ बार के संघर्ष के बाद मिली सफलता
इस उपलब्धि तक पहुंचना विषेक चौहान के लिए आसान नहीं रहा। वे बताते हैं कि उन्हें अपनी इस किताब को प्रकाशित करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने 9 बार लगातार प्रयास किए, तब जाकर उन्हें सफलता मिली और यह किताब बाजार में पाठकों तक पहुंच सकी। उनका मुख्य उद्देश्य केवल किताब लिखना नहीं था, बल्कि सिनेमा देखने की उस परंपरा को जीवित रखना था जो युगों-युगों तक बनी रहे। आज उन्हें खुशी है कि उनकी मेहनत रंग लाई है और दुनिया भर के सिनेमा प्रेमी उनके दृष्टिकोण से जुड़ रहे हैं।
सिनेमा के प्रति बढ़ती रुचि
विषेक चौहान की किताब 'Cinemas Forever' आज उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है जो सिनेमा के इतिहास और उसके भविष्य को करीब से जानना चाहते हैं। यह किताब केवल जानकारी का संकलन नहीं है, बल्कि सिनेमा प्रेमियों के लिए एक भावनात्मक लगाव का जरिया भी बन गई है। पूर्णिया से शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुका है, जो इस बात का सबूत है कि सही दिशा में किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। आने वाले समय में भी वे सिनेमा को लेकर लोगों में उत्साह और रुचि बनाए रखने की उम्मीद करते हैं।
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