खेतों में छिपे हैं नई फसल के सबसे बड़े दुश्मन, जानिए कैसे एक ही झटके में होगा इनका सफाया

धान की बंपर पैदावार पाने के लिए रोपाई से पहले खेत से खरपतवार और पिछली फसल के अवशेषों को हटाना अनिवार्य है। रोटावेटर का उपयोग न केवल खेत की सफाई करता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को भी बढ़ाता है।

धान की खेती में खरपतवार और अवशेषों की चुनौती

खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में धान की बंपर पैदावार सुनिश्चित करने के लिए किसानों को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। वर्तमान में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती खेत में मौजूद पिछली फसल के ठूंठ और अनचाहे खरपतवार हैं। यदि रोपाई से पूर्व इनका उचित निस्तारण नहीं किया जाता है, तो ये नई फसल की विकास प्रक्रिया में गंभीर बाधा उत्पन्न करते हैं। इन अवशेषों को नष्ट करने के लिए रोटावेटर एक आधुनिक और प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है, जो न केवल खेत की सफाई करता है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।

रोटावेटर क्यों है सबसे बेहतर विकल्प

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह का मानना है कि पारंपरिक जुताई के तरीकों की तुलना में रोटावेटर तकनीक कहीं अधिक प्रभावी और सुविधाजनक है। आमतौर पर देखा जाता है कि किसान खेत की सफाई के लिए अवशेषों को जला देते हैं, जो पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता, दोनों के लिए बेहद हानिकारक है। रोटावेटर का उपयोग करके किसान बिना किसी प्रदूषण के खेत की तैयारी कर सकते हैं। इसके तेज धार वाले ब्लेड खरपतवारों को बारीक टुकड़ों में विभाजित कर उन्हें मिट्टी की गहरी परतों में दबा देते हैं, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और जमीन को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

जैविक खाद के रूप में अवशेषों का महत्व

रोटावेटर चलाने का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक लाभ यह है कि यह खरपतवार और पुरानी फसल के कचरे को प्राकृतिक खाद में बदल देता है। जब ये छोटे-छोटे अवशेष मिट्टी में मिल जाते हैं, तो कुछ समय बाद ये सड़कर ह्यूमस का रूप ले लेते हैं। यह प्रक्रिया मिट्टी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि करती है। इसके परिणामस्वरुप, किसानों को अपनी फसल के लिए बाहरी रासायनिक खादों पर निर्भर रहने की जरूरत कम पड़ती है और फसल की समग्र गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है।

मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार

खेत को तैयार करते समय रोटावेटर मिट्टी को पलटने और उसे भुरभुरी बनाने का कार्य अत्यंत सटीकता से करता है। इससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और हवा का संचार बेहतर होता है। धान की खेती के लिए जल प्रबंधन महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लंबे समय तक पानी खेत में खड़ा रहना चाहिए। रोटावेटर से तैयार की गई भुरभुरी मिट्टी पानी को लंबे समय तक संजोकर रखने में सक्षम होती है, जिससे बार-बार सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है और फसल को नमी मिलती रहती है।

समय और डीजल की बड़ी बचत

पारंपरिक खेती के तरीकों में खेत को तैयार करने के लिए एक ही जगह पर कई बार जुताई करनी पड़ती है, जो किसान के लिए समय और ईंधन दोनों का नुकसान है। रोटावेटर इस पूरी प्रक्रिया को सरल बना देता है। यह एक ही बार में मिट्टी को काटने, उसे पलटने और खेत को समतल करने का काम पूरा कर देता है। इस तकनीक के इस्तेमाल से डीजल की खपत कम होती है, मजदूरी पर होने वाला खर्च बचता है और किसान तय समय पर अपनी धान की रोपाई शुरू कर सकते हैं, जिससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है।

कीटों और बीमारियों से फसल की सुरक्षा

खेतों में मौजूद खरपतवार और पुरानी फसल के अवशेष अक्सर हानिकारक कीटों, फंगस और बीमारियों के पनपने और छिपने के मुख्य ठिकाने बन जाते हैं। जब रोटावेटर से गहरी जुताई की जाती है, तो मिट्टी के भीतर छिपे इन कीटों के अंडे और लार्वा सतह पर आ जाते हैं। तेज धूप और पक्षियों के कारण ये कीटाणु स्वतः नष्ट हो जाते हैं। इस तरह, रोटावेटर के माध्यम से खेत की सफाई करने से नई धान की फसल में बीमारियों का प्रकोप काफी कम हो जाता है, जिससे कीटनाशकों का उपयोग भी न्यूनतम हो जाता है।

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