रांची की अल्बीना एक्का: अनपढ़ होकर भी चीकू की खेती से बनीं सफल बिज़नेस वुमन

रांची के पलांडू गांव की अल्बीना एक्का ने अनपढ़ होने के बावजूद अपनी मेहनत से खेती में नया मुकाम हासिल किया है। आज वह चीकू के बागान से सालाना लाखों की कमाई कर रही हैं और दर्जनों लोगों को रोजगार दे रही हैं।

पलांडू गांव की प्रेरणादायक कहानी

झारखंड की राजधानी रांची से महज 15 किलोमीटर दूर पलांडू गांव में एक ऐसी महिला रहती हैं जिनकी कहानी किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। अल्बीना एक्का नाम की इस महिला ने साबित कर दिया है कि सफलता पाने के लिए किताबी ज्ञान से ज्यादा पक्का इरादा और मेहनत की जरूरत होती है। अल्बीना का अपना कोई औपचारिक स्कूल का अनुभव नहीं है और वह लिखना पढ़ना भी नहीं जानती हैं, लेकिन आज वे एक सफल बिज़नेस वुमन के रूप में पहचानी जाती हैं।

2 एकड़ जमीन पर चीकू का बड़ा साम्राज्य

अल्बीना ने खेती को अपना जरिया बनाया और उसमें इतनी महारत हासिल की कि आज वे एक सफल उद्यमी बन चुकी हैं। उन्होंने सरकार की एक विशेष योजना का लाभ उठाते हुए लीज पर 2 एकड़ जमीन ली और वहां चीकू के 2000 पौधे रोपे। समय के साथ उनकी देखरेख में ये पौधे अब फलदार पेड़ों में बदल चुके हैं। अल्बीना ने बताया कि इस खेती की बारीकियों को समझने के लिए उन्हें उचित प्रशिक्षण भी मिला, जिसका उन्हें काफी फायदा हुआ। चूँकि यह जमीन सरकारी लीज पर है, इसलिए उन्हें अपने कुल मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद उनकी आय काफी शानदार है।

ऑर्गेनिक खेती और बड़े स्तर पर कारोबार

अल्बीना की सफलता का सबसे बड़ा राज उनके चीकू की बेहतरीन क्वालिटी है। वे अपनी खेती में पूरी तरह से ऑर्गेनिक खाद का उपयोग करती हैं, जिससे फलों की गुणवत्ता बनी रहती है। उनके इस कारोबार के चलते स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। अल्बीना के बागान में हर दिन 25 से अधिक लोग काम करते हैं। उनके बागान से रोजाना लगभग 1 टन चीकू का उत्पादन होता है और बाजार में इसकी इतनी मांग है कि यह सारा माल तुरंत बिक जाता है। उनके द्वारा उगाए गए चीकू न केवल स्थानीय बाजारों में, बल्कि रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, धनबाद जैसे जिलों और छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल तक के व्यापारी खरीदने आते हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अल्बीना का जीवन पहले ऐसा नहीं था। एक समय था जब उन्हें दूसरों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे अपनी मेहनत के दम पर एक दिन अपनी खुद की गाड़ी और स्मार्टफोन जैसी सुविधाओं के साथ एक शानदार जीवन जी पाएंगी। उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को भी संवारा है। उनके बच्चे, जो कभी सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, आज निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं। उनका एक बेटा अब MBA कर रहा है, जबकि दूसरे को नौकरी भी मिल चुकी है। अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने खुद का पक्का मकान भी तैयार कर लिया है।

हिम्मत और जुनून ही सफलता की कुंजी

अपनी इस अद्भुत यात्रा के बारे में बात करते हुए अल्बीना कहती हैं कि यदि इंसान के पास हौसला हो तो कुछ भी हासिल करना असंभव नहीं है। उनका मानना है कि आगे बढ़ने के लिए केवल मेहनत और जुनून की आवश्यकता होती है। वे कहती हैं कि लोग अक्सर काम न करने के बहाने ढूंढते हैं, लेकिन जिस दिन कोई व्यक्ति बहाने बनाना छोड़ देता है, उसी दिन सफलता के रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं। उनकी महीने की कमाई अब 1 लाख रुपये से अधिक है, जो इस बात का सबूत है कि सही दिशा में की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

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