पंचम दा के सामने कांप रही थी आवाज, किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार का ऐसा रहा सफर

महान गायक किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार ने अपने करियर में न केवल पिता की विरासत को आगे बढ़ाया बल्कि अपनी गायकी से अपनी अलग पहचान भी बनाई। संगीत के दिग्गजों के बीच अपनी शुरुआत करने वाले अमित कुमार ने फिल्मफेयर पुरस्कार जीतकर पिता को गौरवान्वित किया था।

संगीत का बचपन और कोलकाता की यादें

संगीत की दुनिया में किशोर कुमार का नाम एक ऐसे स्तंभ की तरह है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसी महान गायक के पुत्र अमित कुमार को संगीत का हुनर विरासत में मिला था। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित का बचपन कलात्मक माहौल में बीता। उनकी मां रूमा गुहा ठाकुरता एक प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री थीं, जबकि पिता का संगीत का जादू पूरी दुनिया ने देखा था। अमित के शुरुआती दिन कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों में बीतते थे, जहां वे अपनी मधुर आवाज से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उस समय महान बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार ने भी उनके हुनर की जमकर तारीफ की थी। हालांकि, जब उनकी मां ने शिकायत की कि अमित केवल फिल्मी गाने गाते हैं, तो किशोर कुमार उन्हें अपने साथ बॉम्बे ले आए और यहीं से उनके करियर की असली नींव पड़ी।

पंचम दा के सामने पहली परीक्षा

अमित कुमार के लिए गायकी की शुरुआत आसान नहीं थी। वर्ष 1975 का वह वाकया आज भी यादगार है जब बॉम्बे के एक छोटे से संगीत कक्ष में 23 साल का यह युवा पहली बार अपनी आवाज का जादू दिखाने के लिए खड़ा था। कमरे का माहौल काफी गंभीर था। वहां संगीत के दिग्गज आरडी बर्मन, जिन्हें दुनिया पंचम दा के नाम से जानती है, के साथ मन्ना डे और किशोर कुमार जैसे बड़े कलाकार मौजूद थे। उस नौजवान अमित की आवाज उस वक्त डर और संकोच के कारण थरथरा रही थी। पंचम दा के निर्देश पर उन्होंने गाना शुरू किया और उस पल ने उनकी किस्मत बदलने का काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की और अपने समय के युवा सितारों के लिए पहली पसंद बन गए।

जब पिता को पछाड़ जीता फिल्मफेयर अवार्ड

अस्सी के दशक में अमित कुमार बॉलीवुड के नए चेहरों जैसे अनिल कपूर, कुमार गौरव और संजय दत्त की 'सिग्नेचर वॉइस' के रूप में स्थापित हो चुके थे। उन्होंने 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'रोज रोज आंखों तले', 'तिरछी टोपीवाले' और 'टिप टिप बारिश' जैसे सदाबहार गाने गाए जो आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं। उनके करियर का सबसे ऐतिहासिक मोड़ 1982 के फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में आया। फिल्म 'लव स्टोरी' के सुपरहिट गीत 'याद आ रही है' ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था। उस वर्ष बेस्ट प्लेबैक सिंगर की कैटेगरी में मुकाबला सीधा अपने पिता किशोर कुमार और बेटे अमित कुमार के बीच था। जब पुरस्कार के लिए अमित के नाम की घोषणा हुई, तो किशोर दा का सीना गर्व से चौड़ा हो गया और उन्होंने मुस्कुराते हुए अपने बेटे को गले लगा लिया। यह पल उनके करियर का सबसे सुखद एहसास था।

पिता और गुरु के जाने के बाद बदल गई राह

अमित कुमार की जिंदगी में कठिन दौर तब आया जब 13 अक्टूबर 1987 को उनके पिता किशोर कुमार का अचानक निधन हो गया। उन्होंने पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उनकी अधूरी फिल्म 'ममता की छांव में' का निर्देशन संभाला और उसे पूरा किया। हालांकि, इस दुख से उबरने से पहले ही उन्हें दूसरा बड़ा झटका लगा। 4 जनवरी 1994 को उनके गॉडफादर और मार्गदर्शक आरडी बर्मन भी दुनिया को अलविदा कह गए। अपने जीवन के इन दो बड़े स्तंभों को खोने के बाद अमित कुमार काफी अकेले हो गए और उन्होंने बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग से दूरी बना ली।

इंडिपेंडेंट म्यूजिक की नई शुरुआत

बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर होने के बाद, अमित कुमार ने अपने संगीत के सफर को अलग दिशा दी। उन्होंने 'कुमार ब्रदर्स म्यूजिक' नाम से अपनी खुद की म्यूजिक कंपनी की शुरुआत की। आज वे फिल्मों के लिए गाने की जगह इंडिपेंडेंट म्यूजिक बनाने और दुनिया भर में लाइव कॉन्सर्ट्स करने में व्यस्त हैं। वे अपने पिता किशोर कुमार की महान संगीत विरासत को न केवल संजोए हुए हैं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य भी बखूबी कर रहे हैं।

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