फिल्मी कहानी सा जीवन और संघर्ष
बॉलीवुड की दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान की जिंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही है। उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। सरोज खान का बचपन काफी आर्थिक तंगी के बीच बीता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें महज 3 साल की उम्र में बाल कलाकार के रूप में काम शुरू करना पड़ा था। जब वे कुछ बड़ी हुईं, तो उनके पास काम की कमी हो गई और एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें फिल्म जगत से बाहर कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और बैकग्राउंड डांसर के तौर पर इंडस्ट्री में फिर से अपनी जगह बनाई। इस दौरान उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर नृत्य के हर छोटे-बड़े स्टेप को बेहद बारीकी से सीखा और समझा।
निजी जीवन में चुनौतियां
सरोज खान का व्यक्तिगत जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने महज 13 साल की उम्र में अपने से 30 साल बड़े मास्टर सोहनलाल से विवाह कर लिया था, जो उस समय पहले से ही विवाहित थे। हालांकि, उनका यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं चल सका। बाद में उन्होंने सरदार रोशन खान के साथ दूसरी शादी की। इन पारिवारिक मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने अपने काम को कभी प्रभावित नहीं होने दिया और पूरी लगन के साथ अपनी कला को निखारती रहीं।
कोरियोग्राफी की दुनिया में नई परिभाषा
साल 1974 में आई फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ के जरिए सरोज खान ने एक स्वतंत्र कोरियोग्राफर के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की। उन्होंने बॉलीवुड में नृत्य को केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भावनाओं और कहानी कहने का एक सशक्त माध्यम बनाया। उनके द्वारा कोरियोग्राफ किए गए गाने आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उन्होंने ‘मिस्टर इंडिया’ का ‘हवा हवाई’, ‘तेजाब’ का ‘एक दो तीन’, ‘बेटा’ का ‘धक धक करने लगा’ और ‘देवदास’ का ‘डोला रे डोला’ जैसे कालजयी गानों का निर्देशन किया, जिसने उन्हें बॉलीवुड का सबसे बड़ा नाम बना दिया। सरोज खान अभिनेत्रियों की क्षमता को बखूबी पहचानती थीं और उन्हें स्क्रीन पर जादू की तरह पेश करती थीं। श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी सुपरस्टार्स की सफलता में सरोज खान की कला का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
चार दशक का शानदार सफर और सम्मान
सरोज खान ने अपने 40 साल से अधिक के लंबे और शानदार करियर में सैकड़ों फिल्मों के गानों को कोरियोग्राफ किया। अपने उत्कृष्ट काम के लिए उन्होंने अपने नाम कई राष्ट्रीय और फिल्मफेयर अवार्ड्स किए। उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन केवल फिल्मों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि टेलीविजन के मशहूर रियलिटी शो जैसे ‘नच बलिए’ और ‘झलक दिखला जा’ में जज की भूमिका निभाकर भी दर्शकों का दिल जीता। उनके स्पष्टवादी और कड़क अंदाज को प्रशंसक खूब पसंद करते थे।
एक युग का अंत
3 जुलाई 2020 को यह महान कलाकार दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गईं। भले ही सरोज खान आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा सिखाए गए नृत्य के गुर और उनके योगदान बॉलीवुड के इतिहास में हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
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