राजस्थान के सीकर जिले में रहने वाले पशुपालकों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब उन्हें अपने गाय, भैंस और अन्य मवेशियों की सामान्य स्वास्थ्य जांच तथा महत्वपूर्ण टेस्ट कराने के लिए अपने गांव या कस्बे से दूर जिला मुख्यालय के चक्कर काटने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होगी। पशुपालन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और उसे एक नया आयाम देने के उद्देश्य से सीकर जिले की 12 पंचायत समितियों में प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाओं का शुभारंभ कर दिया है। इस सराहनीय और दूरदर्शी पहल के बाद अब मवेशियों की शुरुआती जांच स्थानीय स्तर पर ही बेहद सुगमता से हो सकेगी। इससे न केवल बीमारियों का सही समय पर पता लगाया जा सकेगा, बल्कि इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी और भारी-भरकम खर्च को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इन 12 पंचायत समितियों को मिला आधुनिक जांच लैब का तोहफा
पशुपालन विभाग द्वारा ग्रामीण पशुपालकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सीकर जिले के कुल 12 पंचायत समिति मुख्यालयों को इस विशेष सौगात के लिए चुना गया है। जिन स्थानों पर इन आधुनिक प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- अजीतगढ़
- दांतारामगढ़
- धोद
- फतेहपुर
- लक्ष्मणगढ़
- खंडेला
- नेछवा
- नीमकाथाना
- पलसाना
- पाटन
- पिपराली
- श्रीमाधोपुर
इन सभी 12 केंद्रों पर पशु चिकित्सा सेवाओं को सुचारू और बेहद व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए विभाग की ओर से प्रत्येक प्रयोगशाला में एक-एक अनुभवी और पूरी तरह से प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन की स्थायी नियुक्ति भी कर दी गई है। यह प्रशिक्षित कर्मचारी पशुओं के खून, गोबर और अन्य महत्वपूर्ण जैविक नमूनों की अत्यंत सूक्ष्म और सटीक जांच कर बेहद कम समय में जांच रिपोर्ट पशुपालकों को उपलब्ध कराने का काम करेंगे। इससे अब ग्रामीणों को अपनी आंखों के सामने ही जांच रिपोर्ट मिलेगी और उन्हें दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।
कौन-कौन सी जांचें अब गांव स्तर पर ही होंगी मुमकिन?
इन नवनिर्मित और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में पशुओं की कई ऐसी गंभीर एवं सामान्य जांचें की जा सकेंगी, जिनके लिए पहले केवल जिला स्तर के बड़े अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ता था। इन लैब्स में मवेशियों के खून की बेहद बारीकी से जांच की जाएगी, जिससे रक्त में पनपने वाले प्रोटोजोआ और अन्य प्रकार के घातक परजीवी संक्रमणों का तुरंत और सटीक पता लगाया जा सकेगा।
इसके साथ ही, इन केंद्रों पर निम्नलिखित प्रमुख जांचें नियमित रूप से की जाएंगी:
- पशुओं के गोबर की सूक्ष्म जांच, जिससे उनके पेट में मौजूद कीड़ों और परजीवियों का पता लगाया जा सके।
- दुधारू मवेशियों में होने वाले अत्यंत कष्टदायक और नुकसानदेह थनैला रोग की एकदम सटीक और प्रारंभिक पहचान।
- त्वचा से संबंधित विभिन्न प्रकार के संक्रामक और परजीवी रोग।
- पशुओं के शरीर में होने वाली कीटोन बॉडी की जांच।
- यूरिया के स्तर की जांच, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन हो सके।
इन सभी अत्याधुनिक जांच सुविधाओं के स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से मवेशियों में होने वाली गंभीर और जानलेवा बीमारियों का उनके शुरुआती चरण में ही पता लगाना अब बेहद आसान हो जाएगा। समय रहते बीमारी की पहचान होने से पशुधन को किसी भी बड़े खतरे से सुरक्षित रखने में भारी मदद मिलेगी।
बीमारियों की जल्द पहचान से घटेगी पशुओं की मृत्यु दर: डॉ. वीरेंद्र शर्मा
सीकर के जिला रोग निदान प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने इस नई व्यवस्था के फायदों और इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि पशुओं में फैलने वाली किसी भी बीमारी का यदि समय रहते, यानी उसके बिल्कुल शुरुआती दौर में ही पता चल जाता है, तो किसी भी प्रकार के गंभीर संक्रमण या महामारी की आशंका को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पशु चिकित्सक मवेशी का तुरंत, सटीक और लक्षित उपचार शुरू कर पाने में सक्षम होते हैं।
डॉ. वीरेंद्र शर्मा के अनुसार, त्वरित और सटीक इलाज मिलने से न केवल बीमार पशुओं की मृत्यु दर में बहुत बड़ी गिरावट आएगी, बल्कि बीमारी के गंभीर रूप धारण करने से पहले ही उपचार हो जाने के कारण पशुपालकों को होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से भी पूरी तरह बचाया जा सकेगा। यह कदम न केवल पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में पशुओं की दूध देने की क्षमता, उनकी उत्पादकता और उनके समग्र शारीरिक स्वास्थ्य में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार लेकर आएगा।
पूरे राजस्थान में बिछेगा पशु चिकित्सा जांच केंद्रों का नेटवर्क
जिला प्रभारी डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की यह अभूतपूर्व पहल केवल सीकर जिले तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। बल्कि प्रदेश सरकार की एक अत्यंत व्यापक और दूरदर्शी कार्ययोजना के अंतर्गत पूरे राजस्थान राज्य की सभी 352 पंचायत समितियों में इसी तरह की आधुनिक प्राथमिक रोग निदान प्रयोगशालाओं की स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
सरकार की इस राज्यव्यापी योजना का मुख्य और अंतिम उद्देश्य ग्रामीण, सुदूर और बेहद पिछड़े क्षेत्रों में भी पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यधिक सुलभ, आधुनिक और पूरी तरह प्रभावी बनाना है। इस कदम से राजस्थान के सुदूर मरुस्थलीय और पहाड़ी गांवों में रहने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय पशुपालकों को भी अपने बेशकीमती मवेशियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य जांच सुविधाएं और त्वरित उपचार की सुविधा उनके घर के बिल्कुल नजदीक ही उपलब्ध हो सकेगी।
आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियनों से लैस हैं ये केंद्र
पशु चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी जांच लैब की सफलता वहां मौजूद संसाधनों और कर्मियों की दक्षता पर निर्भर करती है। डॉ. वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि सीकर जिले की सभी नवगठित पंचायत समिति स्तर की प्रयोगशालाओं को पूरी तरह से क्रियाशील और सक्रिय मोड में ला दिया गया है। इन सभी केंद्रों पर जांच प्रक्रिया को सुचारू ढंग से चलाने के लिए आवश्यक सभी आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण, उच्च गुणवत्ता वाले केमिकल, रीएजेंट्स और अन्य सभी सहायक जांच सामग्रियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
इसके साथ ही, इस पूरी जांच व्यवस्था को त्रुटिहीन और विश्वसनीय बनाने के लिए तैनात किए गए सभी लैब टेक्निशियनों को विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक जांच प्रणालियों, नई तकनीकों और उपकरणों के सटीक संचालन की बारीकियां सिखााई गई हैं, ताकि ग्रामीण स्तर पर होने वाली प्रत्येक जांच पूरी सटीकता, विश्वसनीयता और चिकित्सा विभाग द्वारा तय किए गए उच्च मानकों के अनुसार ही पूरी की जा सके।
पशुपालकों के समय, श्रम और पैसे की होगी भारी बचत
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने से पशुपालकों के दैनिक जीवन में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब पशुपालकों को अपने मवेशियों की जांच कराने के लिए अपने रोजमर्रा के काम छोड़कर और परिवहन पर भारी खर्च करके जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनके समय, मेहनत और यात्रा के दौरान होने वाले आर्थिक व्यय की सीधी बचत होगी।
पूर्व में, कई बार जिला मुख्यालय दूर होने के कारण ग्रामीण पशुपालक समय पर अपने बीमार पशुओं की जांच नहीं करवा पाते थे, जिससे सही बीमारी का पता लगाने में देरी हो जाती थी और तब तक बेजुबान मवेशी दम तोड़ देते थे। अब गांवों के ठीक पास ही जांच सुविधा मिलने से बीमारी की शुरुआत में ही सटीक उपचार मिलना संभव हो सकेगा। पशुपालन विभाग का यह जनहितकारी और सुधारात्मक प्रयास न केवल हजारों बेजुबान पशुओं के प्राणों की रक्षा करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन के व्यवसाय को भी एक नई और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा।
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