BPSC परीक्षा में बेगूसराय के कांतेश कुमार का जलवा, हासिल किया वरीय उपसमाहर्ता का पद

बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में बेगूसराय के रहने वाले कांतेश कुमार ने शानदार सफलता प्राप्त की है और वे अब वरीय उपसमाहर्ता के पद पर चयनित हुए हैं।

बीपीएससी में सफलता का परचम

बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी द्वारा हाल ही में आयोजित 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में बेगूसराय जिले के सदर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले राजौरा गांव के रहने वाले कांतेश कुमार ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कांतेश ने इस कठिन परीक्षा में सफलता का स्वाद चखते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा में वरीय उपसमाहर्ता यानी एसडीएम के पद के लिए अपनी जगह सुरक्षित की है। मेरिट सूची में कांतेश का सीरियल नंबर 167 है। उनकी इस कामयाबी से उनके परिवार और पूरे जिले में खुशी का माहौल है। उनके पिता अजीत कुमार और माता अंशु देवी हैं, जो एक आंगनवाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं।

सेल्फ स्टडी और नोट्स की भूमिका

अपनी इस बड़ी उपलब्धि के बाद कांतेश ने उन छात्रों के लिए अपने अनुभव साझा किए हैं जो भविष्य में बीपीएससी की तैयारी करने का सपना देख रहे हैं। कांतेश ने साफ तौर पर कहा कि उनकी पूरी सफलता का मुख्य आधार सेल्फ स्टडी यानी स्वयं अध्ययन रहा है। उन्होंने बताया कि तैयारी शुरू करने से पहले उन्होंने पूरे सिलेबस का बहुत बारीकी और गहराई से विश्लेषण किया। इसके बाद उन्होंने एनसीईआरटी, मानक संदर्भ पुस्तकों और अन्य जरूरी अध्ययन सामग्री को इकट्ठा करके अपने खुद के नोट्स तैयार किए। यही नोट्स आगे चलकर उनकी तैयारी की नींव बने। कांतेश के मुताबिक, उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई के बजाय किताबों और अपने बनाए हुए नोट्स पर अधिक भरोसा किया। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत अधिक स्रोतों के बजाय सीमित और विश्वसनीय सामग्री का चुनाव करना बेहतर होता है, ताकि एक ही चीज को बार-बार पढ़ा जा सके।

परीक्षा के तीन चरणों की तैयारी

बीपीएससी परीक्षा मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है, जिनमें प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी, मुख्य परीक्षा यानी मेन्स और इंटरव्यू शामिल हैं। कांतेश के अनुसार, हालांकि ये तीनों चरण एक ही चयन प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन तीनों की तैयारी की रणनीति बिल्कुल अलग होनी चाहिए। प्रारंभिक परीक्षा के संदर्भ में उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र यानी पीवाईक्यू किसी भी परीक्षार्थी के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार साबित होते हैं। पिछले सालों के प्रश्नों का विश्लेषण करने से यह समझ विकसित होती है कि किस विषय से किस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं और किन टॉपिक पर अधिक जोर देने की आवश्यकता है।

किताबें बदलने से बचें

अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात पर जोर दिया कि छात्रों को बार-बार अपनी किताबें या अध्ययन सामग्री बदलने की जरूरत नहीं है। अक्सर छात्र बहुत सारी किताबों के पीछे भागते हैं, जो समय की बर्बादी है। सफल अभ्यर्थी जिन किताबों की सिफारिश करते हैं, वे पर्याप्त हैं। कांतेश ने सलाह दी कि किसी भी एक भरोसेमंद स्रोत को कम से कम 10 बार पढ़ा जाए। निरंतर रिवीजन ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इसी तरह की रणनीति अपनाएं, लगातार अभ्यास करें और अपना मजबूत कंटेंट तैयार करें ताकि परीक्षा हॉल में आत्मविश्वास के साथ सवालों का सामना किया जा सके। उनकी यह मेहनत अब रंग लाई है और वे बिहार की प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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