मानसून और बंद कमरों का जोखिम
मानसून का मौसम भीषण गर्मी से तो राहत लेकर आता है, लेकिन अपने साथ कई तरह के वायरल और पर्यावरणीय संक्रमणों का जोखिम भी लाता है। बारिश के दौरान अक्सर लोग अपने घरों या ऑफिस में नमी और ठंड से बचने के लिए खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह से बंद रखते हैं। लंबे समय तक ऐसे बंद कमरों में रहने से ताजी हवा का प्रवाह रुक जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो वेंटिलेशन की कमी वाली जगहों पर वायरस और बैक्टीरिया के पनपने और फैलने की आशंका कहीं ज्यादा होती है। यह स्थिति तब और भी खतरनाक हो जाती है जब उस बंद कमरे में पहले से ही कोई व्यक्ति बीमार हो या सर्दी-जुकाम से ग्रस्त हो। हालांकि, कुछ बुनियादी सावधानियां बरतकर आप खुद को और अपने परिवार को इस सीजन में सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस स्थिति में किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
बंद कमरों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी कमरे में अगर हवा का सही आवागमन नहीं हो रहा है, तो वहां की हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी तेजी से गिरती है। जब कोई व्यक्ति फ्लू, खांसी, सर्दी या श्वसन तंत्र से संबंधित किसी संक्रमण से जूझ रहा होता है, तो उसके खांसने या छींकने से निकलने वाली अति सूक्ष्म बूंदें हवा में मौजूद अन्य सूक्ष्म कणों के साथ मिल जाती हैं। बंद कमरों में ये कण लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं और कमरे में मौजूद दूसरे स्वस्थ लोगों के फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें बीमार कर देते हैं। भीड़भाड़ वाले दफ्तरों या कमरों में यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
मानसून के दौरान खुद को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपनी दिनचर्या और आदतों में थोड़े बदलाव करने होंगे। स्वास्थ्य जानकारों ने कुछ विशेष सुझाव दिए हैं जिनका पालन करना काफी प्रभावी साबित होता है:
- हवा के आवागमन पर ध्यान दें: बारिश के बीच जब भी मौसम थोड़ा साफ हो या बूंदाबांदी कम हो, तो खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें ताकि ताजी हवा अंदर आ सके। कमरों में लगे पर्दे हटाएं ताकि धूप और हवा का संचार बना रहे। यदि संभव हो, तो एग्जॉस्ट फैन का नियमित इस्तेमाल करें ताकि कमरे की दूषित हवा बाहर निकल सके।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता: मॉल, सार्वजनिक परिवहन या दफ्तर जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। यदि आप पहले से बीमार महसूस कर रहे हैं, तो मास्क का उपयोग जरूर करें ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
- हाथों की स्वच्छता सबसे जरूरी: संक्रमण से बचने का सबसे सरल और असरदार तरीका हाथों को साफ रखना है। साबुन और पानी का उपयोग करके कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं। बाहर से घर लौटने के बाद या कुछ भी खाने से पहले हाथों को धोना न भूलें।
- सतह की नियमित सफाई: घर या दफ्तर में जो चीजें बार-बार छुई जाती हैं, उन पर बैक्टीरिया जमा होने का डर रहता है। कीबोर्ड, मोबाइल फोन, टेबल, दरवाजे के हैंडल और लाइट के स्विच को नियमित रूप से सैनिटाइज या साफ करते रहें।
- इम्यूनिटी को दें प्राथमिकता: आपका मजबूत इम्यून सिस्टम ही आपको वायरस से बचाने का सबसे बड़ा कवच है। इसके लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त नींद लेना और हल्की-फुल्की शारीरिक कसरत करना भी बेहद जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह कब लें?
कई बार लोग घरेलू नुस्खों के भरोसे रहते हैं, लेकिन संक्रमण गंभीर हो सकता है। यदि आपको बहुत तेज बुखार महसूस हो रहा है, लगातार खांसी बनी हुई है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है या अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस हो रही है, तो खुद से इलाज करने की गलती न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करें और उचित चिकित्सा परामर्श लें। याद रखें, सावधानी ही बचाव है।
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