परीक्षा का शांतिपूर्ण आयोजन
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी UPTET 2026 के पहले दिन की प्रक्रिया राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हो गई। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए मिर्जापुर, सोनभद्र और बनारस समेत कई जिलों से भारी संख्या में अभ्यर्थी अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे। परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और संचालन के कड़े इंतजाम देखने को मिले।
इतिहास के सवालों पर छात्रों का मंथन
इस बार के प्रश्नपत्र ने परीक्षार्थियों को काफी हद तक चुनौती दी, विशेष रूप से इतिहास के खंड में। प्रश्नपत्र में प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास से जुड़े कई गहरे सवाल पूछे गए थे। अभ्यर्थियों ने बताया कि इसमें मोहम्मद गजनवी के दौर से लेकर वैदिक काल और मौर्य शासन से लेकर बौद्ध धर्म तक के घटनाक्रमों को शामिल किया गया था। इन सवालों की गहराई ने कई अभ्यर्थियों को सोचने पर मजबूर कर दिया, जिससे इतिहास के प्रश्नों को हल करने में काफी समय व्यतीत हुआ।
विषयवार कठिनाई का स्तर
परीक्षा देकर केंद्र से बाहर निकले अभ्यर्थियों के साथ जब बातचीत की गई, तो उन्होंने पेपर के स्तर को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। अधिकतर छात्रों का मानना था कि पेपर का ओवरऑल स्तर औसत यानी सामान्य था। विषयवार समीक्षा करें तो स्थिति इस प्रकार रही:
- गणित और अंग्रेजी: इन विषयों के प्रश्न बेहद सरल और सामान्य थे, जिससे छात्रों ने काफी राहत महसूस की।
- हिंदी: भाषा के इस खंड में भी अधिकांश अभ्यर्थियों को कोई विशेष परेशानी नहीं हुई।
- इतिहास और सोशल साइंस: इन खंडों में समय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा। इतिहास के पुराने घटनाक्रमों को याद करने और उन्हें सही ढंग से उत्तर में बदलने के कारण छात्रों का काफी समय खर्च हुआ।
अभ्यर्थियों की राय और कटऑफ का अनुमान
परीक्षा के बाद सोनभद्र से आई सौम्या ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र बहुत सरल था और अधिकांश सवालों को हल किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार कटऑफ काफी अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे पहले से शिक्षक हैं या जिन्होंने अच्छी तैयारी की है, उनके लिए यह पेपर काफी अनुकूल रहा। सौम्या के अनुसार, अधिकांश बच्चे इस परीक्षा में सफल होते हुए नजर आ रहे हैं।
बनारस से आए गौरव केसरी ने कहा कि यद्यपि पेपर सामान्य था, लेकिन इतिहास के कुछ सवालों ने उन्हें जरूर उलझाया। वहीं, खुशी चौधरी ने बताया कि पेपर का स्वरूप काफी हद तक अनुमानित ही था, हालांकि कुछ ऐसे प्रश्न भी थे जिन्हें हल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने भी अच्छे अंक आने की पूरी उम्मीद जताई है।
सिलेबस और सोशल साइंस का पेंच
एक अन्य अभ्यर्थी रोशनी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि निर्धारित सिलेबस से अपेक्षा के अनुसार प्रश्न कम पूछे गए। उन्होंने विशेष रूप से सोशल साइंस के सेक्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें पूछे गए सवालों ने छात्रों को काफी सोचने पर विवश किया। हालांकि, कुल मिलाकर उन्होंने पेपर को बहुत कठिन नहीं माना।
निष्कर्ष
UPTET 2026 के पहले दिन की परीक्षा में शामिल हुए छात्रों की मिली-जुली राय से यह स्पष्ट है कि यदि अभ्यर्थियों ने बुनियादी विषयों पर अच्छी पकड़ बनाई है, तो उनके लिए यह परीक्षा एक बेहतर स्कोर करने का अवसर लेकर आई है। हालांकि, इतिहास और सोशल साइंस के घटनाक्रमों ने परीक्षा की गरिमा और चुनौती को बरकरार रखा। अब सभी की निगाहें आधिकारिक उत्तर कुंजी और परिणाम पर टिकी हैं।
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