समुद्र में प्लास्टिक का खौफनाक सच
जापान के तटों पर वैज्ञानिकों को एक ऐसी घटना देखने को मिली है जिसने समुद्री प्रदूषण के प्रति दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ओकिनावा के पास समुद्र में तैरती एक प्लास्टिक की बोतल के भीतर एक बड़े आकार का केकड़ा कैद था। हिरोशिमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जब इस रहस्य को सुलझाया तो पता चला कि यह केकड़ा करीब दो महीने तक उस बोतल के अंदर कैद रहने के बावजूद जिंदा था। यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि इंसानों द्वारा फैलाया गया कचरा समुद्र में रहने वाले जीवों के लिए कितना जानलेवा साबित हो रहा है।
कैसे बोतल के अंदर फंसा केकड़ा
यह पूरा वाकया हिरोशिमा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योइची सकाई और उनके सहयोगी हाजिमे सातो द्वारा किए गए समुद्री शोध के दौरान सामने आया। शोधकर्ताओं की टीम को ओकिनावा के सेसोको द्वीप से करीब 500 मीटर की दूरी पर एक प्लास्टिक की बोतल तैरती हुई दिखाई दी। यह हाई-डेंसिटी पॉलीथीन से बनी एक ऐसी बोतल थी, जिसमें आमतौर पर चीनी वाइन रखी जाती है। इस बोतल के इर्द-गिर्द कई छोटी मछलियां तैर रही थीं, जिससे शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित हुआ। जब उन्होंने करीब से बोतल का निरीक्षण किया, तो अंदर एक विशाल तैरने वाला केकड़ा देखकर वे दंग रह गए।
वैज्ञानिकों के लिए बना पहेली
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह बोतल 15 जुलाई 2022 को समुद्र से निकाली गई थी। बोतल की निर्माण तिथि नवंबर 2021 पाई गई। विशेषज्ञों ने जब इस बोतल और केकड़े के आकार की तुलना की, तो उनके होश उड़ गए। बोतल के मुंह का व्यास मात्र 24 मिलीमीटर था, जबकि उसके भीतर बंद केकड़े की लंबाई 40.31 मिलीमीटर और चौड़ाई 88.23 मिलीमीटर थी। इस केकड़े का वजन लगभग 42.06 ग्राम दर्ज किया गया। इतने बड़े जीव का उस छोटे से छेद से बाहर निकल पाना भौतिक रूप से असंभव था।
दो महीने तक कैसे रहा जीवित
सवाल यह था कि इतने दिनों तक समुद्र के बीचोंबीच यह केकड़ा बिना किसी बाहरी मदद के कैसे जिंदा रहा? वैज्ञानिकों का मानना है कि यह केकड़ा जब बहुत छोटा था, तब वह बोतल के छोटे से मुंह से अंदर चला गया था। बोतल के भीतर उसे पर्याप्त भोजन मिल रहा था, जिसमें छोटी मछलियां और काई जैसे समुद्री तत्व शामिल थे। इन्हीं संसाधनों का सेवन करके वह अंदर ही बड़ा होता गया। जैसे-जैसे उसका शरीर विकसित हुआ, वह बोतल के घेरे से बाहर निकलने में असमर्थ हो गया। शोध में पता चला कि वह पिछले दो महीने से उसी कैद में था और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने हार नहीं मानी। यह समुद्री जीव विज्ञान के लिहाज से एक दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला है, जो प्लास्टिक प्रदूषण की भयावहता को उजागर करता है।
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