अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंची यूपी पुलिस, चंपत राय समेत कई खातों की हो रही जांच

राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच तेज करते हुए अयोध्या पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई और केनरा बैंक समेत कई बैंकों से ट्रस्ट के सदस्यों और गिरफ्तार आरोपियों के खातों का ब्योरा मांगा है। पुलिस अब पैसों के लेन-देन को ट्रैक करने के लिए संदिग्धों के बैंक रिकॉर्ड और लॉकर खंगाल रही है।

अयोध्या चंदा चोरी केस में बैंकों की भूमिका की जांच

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के दान और चंदा चोरी से जुड़े विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या पुलिस की जांच का दायरा अब बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकियों तक पहुंच गया है। पुलिस न केवल गिरफ्तार किए गए आरोपियों, बल्कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के बैंक रिकॉर्ड्स और लॉकरों की भी गहन पड़ताल कर रही है। गुरुवार को पुलिस ने औपचारिक रूप से बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई (SBI) और केनरा बैंक सहित अन्य कई प्रमुख बैंकों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों के माध्यम से ट्रस्ट के सदस्यों, पकड़े गए 8 आरोपियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के सभी बैंक खातों व लॉकरों का विस्तृत विवरण तलब किया गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा पर पुलिस का खास फोकस क्यों है

जांच के क्रम में अयोध्या पुलिस का ध्यान विशेष रूप से बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा पर केंद्रित है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहला कारण यह है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट का यह खाता पूरी तरह से ऑनलाइन दान प्राप्त करने के लिए समर्पित है। यहाँ भक्त केवल क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से ऑनलाइन चढ़ावा जमा कर सकते हैं। इस शाखा में नकद जमा करने का कोई प्रावधान नहीं है और बैंक के कर्मचारियों का ट्रस्ट के नकद प्रबंधन में कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है।

मंदिर के कुल चढ़ावे का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही ऑनलाइन माध्यमों से बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी (PNB) के खातों में आता है। बाकी सारा नकद और प्रमुख वित्तीय लेन-देन एसबीआई (SBI) के मुख्य बैंक खाते के जरिए होता है, जहाँ आउटसोर्स किए गए कैशियर की देखरेख में सारा काम चलता है। सामान्य दिनों में इस खाते में हर महीने 1 से 1.5 करोड़ रुपये का ऑनलाइन दान आता है, लेकिन महाकुंभ या छुट्टियों जैसे विशेष अवसरों पर यह धनराशि बढ़कर 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। निकासी की प्रक्रिया बेहद सख्त है, जहां साल में केवल एक या दो बार चेक के जरिए पैसा निकाला जाता है और बड़ी धनराशि होने पर ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों से क्रॉस-चेक करना अनिवार्य है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की पड़ताल

पुलिसिया जांच के दौरान ट्रस्ट के प्रमुख अधिकारियों के खातों से जुड़ी कुछ अहम बातें भी सामने आई हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का एक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में मौजूद है, जिसे कई साल पहले दिल्ली से स्थानांतरित किया गया था। जांच में पाया गया कि फिलहाल यह खाता सक्रिय नहीं है और इसमें बहुत कम राशि शेष है। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का भी इसी शाखा में खाता है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब 2-3 महीने पहले ही इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के उद्देश्य से इसी बैंक से 20 लाख रुपये का ऋण लिया था।

नामजद आरोपियों के वित्तीय खातों का हाल

पुलिस ने अपनी प्राथमिकी के आधार पर मुख्य संदिग्धों के खातों की जानकारी मांगी थी, जिनमें मुख्य रूप से अविनाश शुक्ला, आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के भतीजे मनीष यादव, और आरोपी लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा शामिल हैं। बैंकों से मिले जवाबों ने पुलिस को कई चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। सुप्रिया मिश्रा के नाम पर इस बैंक में कोई भी खाता नहीं मिला है, हालांकि जांच में यह तथ्य उभर कर सामने आया है कि आरोपी लवकुश ने चंदा चोरी के पैसों का उपयोग सुप्रिया के नाम पर जमीन खरीदने और घर बनवाने में किया था। इसी तरह, मनीष यादव का खाता बैंक में है, लेकिन उसमें केवल 1400 रुपये शेष हैं और जनवरी से लेकर अप्रैल तक इस खाते का कोई उपयोग नहीं किया गया है।

विस्तृत हो रहा जांच का दायरा

यह ऑपरेशन केवल एक बैंक तक सीमित नहीं है। सोमवार को ही अयोध्या पुलिस ने एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के शाखा प्रबंधकों को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी थी। इसके अगले ही दिन बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित अन्य बैंकों को भी नोटिस सर्व किए गए। पुलिस की मंशा साफ है कि गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों, उनके परिजनों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बैंक खातों व लॉकरों का पूरा कच्चा-चिट्ठा बाहर निकाला जाए। अब तक लगभग सभी संबंधित बैंकों ने अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है। पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर आरोपियों द्वारा अवैध कमाई से जुटाई गई तमाम चल और अचल संपत्तियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में भी जुटी है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के सभी पहलुओं का खुलासा किया जा सके।

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