अजमेर जेल में संदिग्ध मौत का रहस्य
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की मौत के मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर सामने आए विभिन्न दावों और चर्चाओं के बीच, हाल ही में आई मेडिकल रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नए दृष्टिकोण से देखने पर मजबूर कर दिया है। पुलिस अब इस मामले को महज एक सामान्य मौत के बजाय हत्या के एंगल से देख रही है। जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि आखिर राज्य की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेलों में से एक के भीतर यह वारदात कैसे घटित हो गई। पुलिस प्रशासन अब उन तमाम कड़ियों को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी को सुलझा सकें।
मेडिकल रिपोर्ट में गर्दन पर मिले गंभीर निशान
जांच से जुड़ी हालिया जानकारियों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में बेहद चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सबसे अहम जानकारी यह है कि मृतक जगन गुर्जर की गर्दन पर गहरे दबाव के निशान पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गर्दन पर लगभग 29 सेंटीमीटर लंबा और गहरा दबाव का निशान है, जो किसी बाहरी बल के प्रयोग की ओर स्पष्ट इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्दन पर बहुत अधिक ताकत के साथ दबाव बनाया गया, जिसके कारण गर्दन की नसें पूरी तरह ब्लॉक हो गईं और दम घुटने से मौत हुई। इस खुलासे ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोपी विष्णु जाट और वारदात का समय
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच की दिशा तय कर ली है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जगन गुर्जर की हत्या की गई है। इस पूरी वारदात के पीछे मुख्य आरोपी के तौर पर विष्णु जाट का नाम सामने आ रहा है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने मात्र तीन से चार मिनट के भीतर इस पूरी घटना को अंजाम दिया। इतनी तेजी से और इतने पेशेवर तरीके से किए गए इस अपराध ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह योजना बहुत पहले से बनाई गई थी और इसके पीछे मुख्य मकसद क्या था।
बीमारी और शारीरिक स्थिति का लाभ
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि जगन गुर्जर पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। वह हाई लेवल शुगर की बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसकी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गई थी। अत्यधिक कमजोरी की वजह से जगन गुर्जर हमलावर के खिलाफ ज्यादा देर तक संघर्ष करने की स्थिति में नहीं था। ऐसा माना जा रहा है कि आरोपी ने इसी शारीरिक कमजोरी का फायदा उठाया और बहुत कम समय में अपना काम पूरा कर लिया। इस घटना में पेशेवर तरीके से किए गए हमले के संकेत मिल रहे हैं।
इंजेक्शन का रहस्य और FSL रिपोर्ट का इंतजार
पूरे मामले में एक और पेचीदा कड़ी वह इंजेक्शन है, जिसका जिक्र जांच के दौरान बार-बार सामने आ रहा है। यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह इंजेक्शन किस दवा का था और घटना के समय उसका क्या उपयोग किया गया था। पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम अब FSL रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद ही इस इंजेक्शन की सच्चाई और मौत के असली कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल, सिविल लाइन थाना पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारी वैज्ञानिक रिपोर्ट, जेल की परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों को मिलाकर पूरी घटना की वास्तविक तस्वीर साफ करने में जुटे हैं। इसके अलावा, पुलिस इस बिंदु पर भी गौर कर रही है कि क्या इस पूरी साजिश में विष्णु जाट के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या उसे किसी बाहरी मदद मिली थी।
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