मारुति सुजुकी और भारत-जापान की दोस्ती का 45 साल पुराना नाता, इंदिरा गांधी ने सौंपी थी पहली कार की चाबी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम सनाए तकायची ने हरियाणा के खारखोदा में मारुति सुजुकी के नए प्लांट का उद्घाटन किया है, जिससे कंपनी की 45 साल पुरानी विकास यात्रा और भारत-जापान के मजबूत संबंधों की चर्चा फिर से तेज हो गई है।

भारत और जापान की साझेदारी का प्रतीक बनी मारुति

हाल ही में हरियाणा के खारखोदा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री सनाए तकायची ने संयुक्त रूप से मारुति सुजुकी के एक नए विशाल उत्पादन केंद्र का उद्घाटन किया है। इस प्रोजेक्ट में कुल 35 हजार करोड़ रुपये की भारी निवेश लागत आई है। जापान सरकार ने भारत में इस कंपनी के माध्यम से कुल 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें से यह 35 हजार करोड़ वाली यूनिट अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। मारुति सुजुकी महज एक ऑटोमोबाइल कंपनी नहीं है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों का एक जीवंत प्रमाण है। पिछले 45 वर्षों में इस कंपनी ने भारतीय बाजार में अटूट भरोसा कायम किया है।

साल 1981 से शुरू हुआ सुनहरी सफर

मारुति के इतिहास पर नजर डालें तो इसकी स्थापना साल 1981 में मारुति उद्योग लिमिटेड के रूप में हुई थी। उस समय सरकार का मुख्य ध्येय देश के सामान्य नागरिकों के लिए ऐसी कार तैयार करना था जो छोटी होने के साथ-साथ किफायती भी हो। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए साल 1982 में जापान की दिग्गज कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने अपना हाथ बढ़ाया और दोनों के बीच एक साझा उद्यम की शुरुआत हुई। उस शुरुआती दौर में जापान की सुजुकी के पास कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी थी। समय के साथ यह साझेदारी और मजबूत होती गई और आज सुजुकी की हिस्सेदारी बढ़कर 58.53 फीसदी तक पहुंच गई है। भारत सरकार ने धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम की है और वर्तमान में कंपनी की 41.47 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स, म्यूचुअल फंड और विभिन्न देसी-विदेशी संस्थानों के पास है।

पहली कार और ऐतिहासिक पल

मारुति और सुजुकी के इस गठबंधन ने साल 1983 में अपनी पहली कार 'मारुति 800' पेश की थी। भारतीय ऑटोमोबाइल जगत के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद इस ऐतिहासिक कार की चाबी दिल्ली के निवासी हरपाल सिंह को सौंपी थी। यह कार आकार में छोटी जरूर थी, लेकिन भारतीय बाजार में इसने जबरदस्त प्रभाव छोड़ा और देखते ही देखते यह देश की सबसे अधिक बिकने वाली कार बन गई। साल 1983 से 1990 के बीच मारुति 800 का ऐसा दबदबा बना कि कंपनी के पास ग्राहकों की लंबी वेटिंग लिस्ट लग गई।

उदारीकरण और विस्तार का दौर

भारत में साल 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद जब विदेशी कंपनियों के लिए रास्ते खुले और प्रतिस्पर्धा बढ़ी, तो मारुति सुजुकी ने भी अपने आपको ढालना शुरू किया। 1990 से 2000 के दशक में कंपनी ने एक के बाद एक कई सफल मॉडल बाजार में उतारे, जिन्हें भारतीय परिवारों ने हाथों-हाथ लिया। मारुति ओम्नी, मारुति जिप्सी, मारुति जेन और मारुति एस्टीम जैसे मॉडलों ने देशभर में कंपनी की पकड़ को और अधिक मजबूत कर दिया।

आईपीओ और ब्रांड का नया नाम

जब कंपनी पूरी तरह से स्थापित हो गई और भारतीय बाजार पर अपनी धाक जमा ली, तब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी कम करने का निर्णय लिया। साल 2003 में मारुति का पहला आईपीओ आया और कंपनी का नाम बदलकर 'मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड' कर दिया गया। इसी दौर में मारुति स्विफ्ट और डिजायर जैसे मॉडल पेश किए गए, जो आज भी कंपनी की बिक्री के मुख्य आधार स्तंभ बने हुए हैं।

एसयूवी के दौर में भी कायम वर्चस्व

साल 2010 से पहले तक भारतीय बाजार में हैचबैक और प्रीमियम हैचबैक का बोलबाला था, लेकिन उसके बाद एसयूवी सेगमेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। मारुति ने इस बदलते ट्रेंड को समझते हुए ब्रेजा और अर्टिगा जैसी गाड़ियों के जरिए बाजार में अपनी जगह बनाई। साल 2020 के बाद कंपनी ने एसयूवी पोर्टफोलियो का विस्तार किया और हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भी कदम रखा। निर्यात में निरंतर वृद्धि ने कंपनी के हौसले को और बढ़ाया है। वित्तवर्ष 2026 में कंपनी ने लगभग 24 लाख वाहनों का उत्पादन हासिल किया है।

बाजार में बदलती चुनौतियां

साल 2018 तक मारुति सुजुकी का भारतीय बाजार पर एकछत्र राज था और इसकी हिस्सेदारी 50 फीसदी से ऊपर थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में टाटा, महिंद्रा और ह्यूंडई जैसे प्रतिद्वंदियों से मिली कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते इसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर 40 फीसदी के आसपास आ गई है। आज मारुति सुजुकी का मार्केट कैप लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी में 20 हजार से अधिक लोग कार्यरत हैं और इसके उत्पाद 100 से ज्यादा देशों में निर्यात किए जाते हैं।

भविष्य का लक्ष्य और उत्पादन क्षमता

मारुति सुजुकी के देशभर में कुल 4 उत्पादन संयंत्र हैं, जिनमें से तीन अकेले हरियाणा (गुरुग्राम, मानेसर और खारखोदा) में स्थित हैं और एक संयंत्र गुजरात में है। कंपनी का वर्तमान में मुख्य जोर ई-कार बनाने और हाइब्रिड मॉडलों के विकास पर है। नई इकाइयों के निर्माण के साथ कंपनी ने अपनी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 40 लाख वाहन करने का लक्ष्य रखा है। मारुति सुजुकी का अंतिम ध्येय भारत को वैश्विक निर्यात का एक मुख्य केंद्र बनाना है। अपने विशाल डीलर नेटवर्क और बेहतरीन सर्विस के दम पर मारुति आज भी घरेलू ऑटोमोबाइल बाजार की निर्विवाद लीडर बनी हुई है।

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