कार के डैशबोर्ड पर जलने वाले ये 10 इशारे बिल्कुल न करें नजरअंदाज, जरा सी लापरवाही से खाली हो जाएगा बैंक खाता

गाड़ी चलाते समय डैशबोर्ड पर दिखने वाली चेतावनियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खासकर गर्मियों के मौसम में ये लाइट्स बड़े नुकसान की ओर इशारा करती हैं, जिन्हें समय रहते ठीक कराना जरूरी है।

कार चलाना सिर्फ एक्सीलेटर दबाना और स्टीयरिंग घुमाना नहीं है। आपकी कार लगातार आपसे बात करती है, और इसके लिए वह डैशबोर्ड पर लगे अलग-अलग संकेतों (इंडिकेटर्स) का इस्तेमाल करती है। अक्सर लोग इन्हें छोटी-मोटी बत्ती समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो डैशबोर्ड पर जलने वाली पीली या लाल लाइट को देखकर भी गाड़ी चलाते रहते हैं, तो संभल जाइए। यह आपकी जेब पर लाखों रुपये का डाका डाल सकती है और सफर के बीच में आपको लाचार कर सकती है।

कार का हेल्थ कार्ड हैं ये वार्निंग लाइट्स

मॉडर्न कारों के डैशबोर्ड पर दी गई लाइट्स असल में गाड़ी की सेहत का एक्सरे होती हैं। जब तक सब कुछ ठीक रहता है, ये बंद रहती हैं। लेकिन जैसे ही किसी पार्ट में खराबी आती है, ये तुरंत चमकने लगती हैं। इन लाइट्स के रंगों का भी अपना एक खास महत्व होता है। अगर लाल रंग की लाइट जल रही है, तो इसका मतलब है कि खतरा तुरंत सामने है और आपको तुरंत गाड़ी रोकनी होगी। वहीं, अगर पीले या नारंगी रंग की बत्ती जलती है, तो यह चेतावनी है कि आपको जल्द से जल्द मैकेनिक के पास जाना चाहिए। गर्मियों में तापमान जब 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तब कार के इंजन, बैटरी, कूलिंग सिस्टम और टायरों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में इन लाइट्स का जलना काफी आम हो जाता है।

डैशबोर्ड की 10 महत्वपूर्ण लाइट्स और उनके मायने

कार के डैशबोर्ड पर कई तरह के संकेत होते हैं, जिनमें से इन 10 लाइट्स को आपको कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए:

  • इंजन टेम्परेचर वार्निंग (थर्मामीटर का निशान): जब भी डैशबोर्ड पर थर्मामीटर जैसा कोई निशान लाल रंग में चमकने लगे, तो समझ जाएं कि आपका इंजन हद से ज्यादा गर्म यानी ओवरहीट हो चुका है। गर्मियों में कूलेंट खत्म होने या लीक होने पर ऐसा होता है। इसे नजरअंदाज करना इंजन को पूरी तरह से तबाह कर सकता है।
  • ऑयल प्रेशर लाइट (तेल का कैन): तेल की केतली जैसा दिखने वाला यह सिंबल बताता है कि आपकी कार के इंजन में मोबिल ऑयल का दबाव कम हो गया है। पर्याप्त लुब्रिकेशन न मिलने से इंजन के पुर्जे आपस में घिसकर जाम हो सकते हैं।
  • बैटरी लाइट: यदि गाड़ी स्टार्ट होने के बाद भी बैटरी का सिंबल बना रहता है, तो समझ लें कि कार का अल्टरनेटर या चार्जिंग सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। ऐसे में गाड़ी बीच रास्ते में बंद हो सकती है।
  • ब्रेक वार्निंग लाइट: यह लाइट बताती है कि या तो आपका हैंडब्रेक लगा हुआ है या फिर ब्रेक ऑयल (फ्लूइड) का स्तर बेहद कम हो गया है। ब्रेक फेल होने के खतरे से बचने के लिए इसे तुरंत चेक करें।
  • एयरबैग लाइट: सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है। अगर यह लाइट जल रही है, तो दुर्घटना के समय हो सकता है कि एयरबैग न खुलें।
  • चेक इंजन लाइट: यह पीली बत्ती कार के इंजन मैनेजमेंट सिस्टम या एमिशन (उत्सर्जन) में आई किसी गड़बड़ी को दर्शाती है। इसे ओबीडी (OBD) स्कैनर की मदद से ही डायग्नोज किया जा सकता है।
  • एबीएस (ABS) लाइट: एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम में गड़बड़ी होने पर यह बत्ती जलती है। इसके खराब होने से अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ी के पहिये लॉक हो सकते हैं और गाड़ी फिसल सकती है।
  • टीपीएमएस (TPMS) लाइट: टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम की यह लाइट बताती है कि गाड़ी के किसी एक या सभी टायरों में हवा का दबाव तय सीमा से बहुत कम या बहुत ज्यादा है।
  • ट्रैक्शन कंट्रोल लाइट: जब गाड़ी सड़क पर अपनी पकड़ खोने लगती है, खासकर गीली या फिसलन भरी सड़कों पर, तब यह लाइट जलती है। अगर यह लगातार जल रही है, तो सिस्टम में कोई खराबी हो सकती है।
  • लो फ्यूल लाइट: ईंधन खत्म होने की यह चेतावनी बताती है कि आपको तुरंत नजदीकी पेट्रोल पंप पर जाकर तेल भरवाना चाहिए, अन्यथा गाड़ी कभी भी बंद हो सकती है।

गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है इन वार्निंग लाइट्स का खतरा?

गर्मियों के दिनों में इन वार्निंग लाइट्स के जलने की आशंका दोगुनी हो जाती है। जब बाहर चिलचिलाती धूप और 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान होता है, तो गाड़ी के कूलिंग सिस्टम पर अतिरिक्त काम का बोझ आ जाता है। गर्मी के कारण कार का कूलेंट बहुत तेजी से वाष्पीकृत होने लगता है, जिससे इंजन का तापमान बेकाबू हो जाता है। इसके अलावा, तेज गर्मी में बैटरी के अंदर मौजूद फ्लूइड (तरल पदार्थ) सूखने लगता है, जिससे उसके भीतर रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं और बैटरी समय से पहले दम तोड़ देती है। टायरों की बात करें, तो गर्मी में टायरों के अंदर की हवा फैलती है, जिससे टायर प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। इससे टायर फटने का डर रहता है और इसी वजह से टीपीएमएस (TPMS) लाइट बार-बार जलती है। इसके अतिरिक्त, तेज गर्मी के कारण कार की वायरिंग और विभिन्न सेंसर भी गर्म होकर गलत संकेत भेजने लगते हैं।

लाइट्स ऑन होने पर तुरंत क्या करें?

अगर सफर के दौरान कोई भी लाइट जलती है, तो घबराएं नहीं बल्कि समझदारी से काम लें और निम्नलिखित बातों का पालन करें:

  • लाल लाइट जलने पर तुरंत एक्शन लें: यदि स्क्रीन पर लाल बत्ती (जैसे ऑयल प्रेशर या इंजन टेम्परेचर) चमकती है, तो सबसे पहले सुरक्षित स्थान देखकर गाड़ी को सड़क के किनारे लगाएं। इंजन को तुरंत बंद कर दें और बोनट खोलकर उसे ठंडा होने दें। कभी भी गर्म इंजन का रेडिएटर कैप न खोलें।
  • पीली लाइट जलने पर क्या करें: पीली लाइट जलने का मतलब है कि आप सुरक्षित रूप से गाड़ी चला सकते हैं, लेकिन आपको बहुत जल्द किसी अच्छे मैकेनिक या सर्विस सेंटर पर जाकर इसकी जांच करानी चाहिए। ओबीडी (OBD) स्कैनर की मदद से खराबी का सटीक पता लगाया जा सकता है।
  • गर्मियों में प्रिवेंटिव मेंटेनेंस बेहद जरूरी: गाड़ी का कूलेंट, ब्रेक फ्लूइड और इंजन ऑयल नियमित रूप से चेक करते रहें। टायरों में हवा का दबाव हमेशा सुबह के समय चेक करें जब टायर ठंडे हों। बैटरी के टर्मिनल्स पर कार्बन जमा न होने दें और उन्हें नियमित रूप से साफ रखें। इसके अलावा, धूप में खड़ी गाड़ी के लिए हमेशा सनशेड का इस्तेमाल करें ताकि अंदरूनी हिस्से गर्म न हों और लंबी यात्रा पर निकलने से पहले गाड़ी की पूरी सर्विसिंग जरूर करवा लें।

निष्कर्ष: समय पर रखरखाव ही सुरक्षा की गारंटी

डैशबोर्ड की ये लाइट्स आपकी सुरक्षा और गाड़ी की लंबी उम्र के लिए दी गई हैं। इन्हें नजरअंदाज करना यानी किसी बड़े हादसे या फिर बहुत भारी-भरकम खर्च को न्योता देना है। हर वाहन चालक को अपनी गाड़ी की यूजर मैनुअल (गाइड) को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए ताकि इन सभी बेसिक संकेतों की सही समझ हो। थोड़ा सा ज्ञान और समय पर किया गया रखरखाव आपको और आपकी गाड़ी दोनों को हमेशा सुरक्षित रखेगा।

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