राम मंदिर में दान के पैसों की गिनती का ड्यूटी चार्ट आया सामने, जानें चंपत राय के कहने पर कैसे हुई थी 10 लोगों की भर्ती और कहां हुई चूक

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों का विशेष ड्यूटी चार्ट सामने आया है, जिसमें सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम लगातार उमड़ रहा है। इसके साथ ही मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि भी कई गुना बढ़ गई है। हाल ही में मंदिर में चढ़ावे के पैसों की गिनती करने वाली टीम को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस काम के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर उनके काम करने के तरीकों का पूरा ब्यौरा (ड्यूटी चार्ट) अब सामने आ गया है। इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका के साथ-साथ सुरक्षा और निगरानी में बरती गई भारी लापरवाही भी उजागर हुई है।

चंपत राय की सिफारिश और अनिल मिश्रा द्वारा की गई भर्ती

इस पूरे मामले से जुड़े विवरण के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय के कहने पर ही अनिल मिश्रा ने इन सभी कर्मचारियों को काम पर रखा था। चंपत राय ने इन सभी उम्मीदवारों को अनिल मिश्रा के पास भेजा था, जिसके बाद अनिल मिश्रा ने उनका साक्षात्कार लेकर उन्हें काम पर रखने की मंजूरी दी थी। बताया जा रहा है कि 2 मार्च को चंपत राय ने इन लोगों को कैश काउंटिंग (नकदी की गिनती) के काम के लिए बुलाया था और अनिल मिश्रा से मिलने को कहा था। इसके बाद ये लोग 4 मार्च को अनिल मिश्रा से मिलने पहुंचे।

अंततः 6 मार्च 2025 को इन 10 लोगों की औपचारिक रूप से नियुक्ति की गई और वे तुरंत काम पर लग गए। चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआत में इन कर्मचारियों के लिए कोई पहचान पत्र (आई-कार्ड) भी जारी नहीं किया गया था। उन्हें केवल एक ड्यूटी शीट दी गई थी, जिसे दिखाकर ही वे मंदिर परिसर में प्रवेश पा जाते थे।

वेतन, ड्यूटी का समय और दो अलग-अलग काउंटिंग सेंटर

मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन सभी नए लड़कों को प्रति माह 18,000 रुपये वेतन के तौर पर दिए जाते थे। इनकी ड्यूटी का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया था, जबकि दोपहर में 1:30 बजे इनका लंच होता था। कुंभ मेले के बाद से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही थी, जिसके कारण चढ़ावे की राशि में कई गुना बढ़ोतरी हो गई थी। इस भारी चढ़ावे को संभालने के लिए मंदिर परिसर में एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग जगहों पर काउंटिंग सेंटर बनाए गए थे। इनमें से पहला मुख्य काउंटिंग रूम मंदिर परिसर के अंदर ही PFC बिल्डिंग में स्थित था, जबकि दूसरा काउंटिंग सेंटर परिसर के भीतर ही बनी पुलिस चौकी में बनाया गया था।

किस कर्मचारी की कहां लगाई गई थी ड्यूटी?

इन नए 10 लड़कों को पुलिस चौकी वाले काउंटिंग रूम में तैनात किया गया था। इनका मुख्य काम नोटों को अलग-अलग छांटना, उनकी गड्डियां बनाना और फिर मशीनों की सहायता से उनकी गिनती करना था। इस पुलिस चौकी वाले काउंटिंग रूम में मुख्य रूप से इन लोगों की ड्यूटी लगाई गई थी:

  • अनुकल्प, अविनाश, करुणेश और लव कुश इस पुलिस चौकी वाले सेंटर पर नकदी की गिनती का काम संभालते थे।
  • शुरुआत में तैनात स्वतंत्र पांडे, रविंद्र नाथ, तरुण मालवीय और हिमांशु त्रिपाठी के नौकरी छोड़ने के बाद, उनकी जगह पर मनीष यादव और रमा शंकर की नई एंट्री इस कैश काउंटिंग रूम में कराई गई थी।

दूसरी ओर, PFC बिल्डिंग के बेसमेंट में मुख्य काउंटिंग सेंटर बनाया गया था। इस बेसमेंट में ही मॉनिटरिंग रूम, स्टाफ के लिए भोजनालय और SBI का काउंटर मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो इसकी पहरेदारी की मुख्य जिम्मेदारी SIS सिक्योरिटी के जवानों के पास थी, और समय-समय पर CRPF के जवान भी सुरक्षा के लिए वहां मौजूद रहते थे।

निगरानी में भारी लापरवाही और चोरी का आसान रास्ता

दावों के अनुसार, नकदी की गिनती के दौरान निगरानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई थी। हालांकि मॉनिटरिंग रूम में रोजाना 2 से 3 लोगों की ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन वे लोग अक्सर अपनी जगह पर रहने के बजाय बाहर ही घूमते रहते थे। काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया पर कोई भी व्यक्ति गंभीरता से नजर नहीं रख रहा था। इस भारी लापरवाही के कारण वहां चढ़ावे की चोरी होने की पूरी गुंजाइश बनी हुई थी।

जिन 10 लोगों को ट्रस्ट की तरफ से पैसे गिनने के काम में लगाया गया था, वे पुलिस चौकी में बैठकर गिनती करते थे। खास बात यह है कि वहां का सीसीटीवी कैमरा और उसका मॉनिटर भी उसी कमरे में लगे हुए थे, जिससे वहां कोई वास्तविक बाहरी निगरानी नहीं हो पाती थी। इस पूरे सिस्टम में टिन्नू यादव नाम का व्यक्ति मंदिर के सर्वराकार के तौर पर काम कर रहा था और उसकी मर्जी के बिना वहां कुछ नहीं होता था।

वहीं, बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी और मामले के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव इस पूरी व्यवस्था के प्रभारी (इंचार्ज) थे। संदूक से पैसे निकलवाने से लेकर, उन्हें काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और फिर गिने गए पैसों को SBI को सौंपने तक की पूरी जिम्मेदारी सुभाष श्रीवास्तव की ही थी। इसके साथ ही, चढ़ावे में आने वाली सोने-चांदी की ज्वेलरी का कभी कोई पुख्ता हिसाब-किताब नहीं रखा जाता था, जिससे वहां चोरी की वारदात को अंजाम देना बेहद आसान हो गया था।

चोरी पकड़े जाने पर इंचार्ज का हैरान करने वाला जवाब

इस अव्यवस्था के बीच पहली बार फरवरी के महीने में चोरी होने का खुलासा हुआ था। जब काउंटिंग टीम के ही एक सदस्य को इस बात की भनक लगी, तो उसने तुरंत प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के पास जाकर शिकायत की और बताया कि चढ़ावे के पैसे चोरी हो रहे हैं। इस गंभीर शिकायत पर इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने जो जवाब दिया, वह बेहद हैरान करने वाला था। उन्होंने अत्यंत लापरवाही से कहा:

"प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे आपके घर से जा रहा है।"

इस प्रकार, आस्था के इस बड़े केंद्र में चढ़ावे के रूप में आने वाली करोड़ों की धनराशि की सुरक्षा और गिनती को लेकर लंबे समय तक घोर लापरवाही बरती जाती रही, जिसका फायदा उठाकर वहां पैसों की हेराफेरी आसानी से होती रही।

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