मध्य प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। निर्वाचन आयोग ने दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की तारीखों का आधिकारिक रूप से एलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद से ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है और विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी के खेमे में उत्साह देखा जा रहा है। दतिया विधानसभा सीट पर आगामी 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा, जबकि चुनाव के नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 28 साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी विधायकी चली गई।
चुनाव कार्यक्रम की पूरी जानकारी: कब क्या होगा?
चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए कार्यक्रम के अनुसार, दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना 6 जुलाई को जारी की जाएगी। इसके बाद प्रत्याशी अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। इसके अगले दिन, यानी 14 जुलाई को भरे गए नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। जो उम्मीदवार अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 16 जुलाई तक ऐसा कर सकते हैं। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान होगा और सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी रहेंगी, जिसके बाद दतिया के नए विधायक का फैसला हो जाएगा।
नरोत्तम मिश्रा के लिए खोया सम्मान पाने का सुनहरा मौका
वर्ष 2023 में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में दतिया सीट पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। तब कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को करारी शिकस्त दी थी। नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े नेता की हार उस समय पूरे देश की मीडिया में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई थी। अब जबकि इस सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, तो राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि भाजपा एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा को ही मैदान में उतार सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा के लिए यह अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाने और इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व पुनः स्थापित करने का एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अवसर है।
आखिर क्या था वह मामला जिसने छीन ली राजेंद्र भारती की विधायकी?
राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने के पीछे का कानूनी विवाद काफी पुराना है। यह पूरा मामला साल 1998 का है, जो दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा हुआ है। इस मामले में बैंक की एक फिक्स डिपॉजिट (एफडी) में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया था कि बैंक के दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स में अवैध रूप से बदलाव किए गए थे। इस एफडी की वास्तविक समय सीमा केवल 3 साल की थी, लेकिन कथित तौर पर धोखाधड़ी करके इस अवधि को बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया ताकि अवैध रूप से अधिक ब्याज का लाभ उठाया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम के तार राजेंद्र भारती के परिवार से जुड़े थे। उनकी माता सावित्री देवी 'श्याम सुंदर श्याम संस्थान' की अध्यक्ष थीं और उन्होंने दतिया ग्रामीण बैंक में यह एफडी कराई थी। जिस समय यह पूरा वित्तीय लेन-देन और हेरफेर हुआ, उस दौरान राजेंद्र भारती स्वयं उस बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद पर आसीन थे। इसके साथ ही, वे अपनी माता के इस संस्थान में ट्रस्टी की भूमिका भी निभा रहे थे।
कोर्ट की सजा और सदस्यता रद्द होने का कानूनी आधार
बैंक में अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोपों के चलते यह मामला लंबे समय तक अदालत में चला। आखिरकार, दिल्ली की एक विशेष MP MLA कोर्ट ने इस 28 साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया और उन्हें 3 साल के कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अदालत ने उन्हें उच्च न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 60 दिन की मोहलत भी दी थी।
भारत के चुनावी और संवैधानिक नियमों के अनुसार, यदि किसी मौजूदा सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो या उससे अधिक वर्षों की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदन की सदस्यता तुरंत और स्वतः ही समाप्त हो जाती है। राजेंद्र भारती के मामले में भी यही नियम लागू हुआ। कोर्ट का फैसला आने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय को विशेष रूप से रात में खोलकर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई थी।
विरासत में मिली राजनीति और राजेंद्र भारती का प्रभाव
दतिया विधानसभा सीट हमेशा से ही मध्य प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में से एक रही है। यहां की चुनावी जंग न केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच की लड़ाई होती है, बल्कि यह दो बड़े राजनीतिक परिवारों के वर्चस्व की लड़ाई भी बन जाती है। राजेंद्र भारती को मध्य प्रदेश कांग्रेस के अत्यंत अनुभवी और जमीन से जुड़े नेताओं में गिना जाता है। उन्हें राजनीति की समझ विरासत में मिली है। उनके पिता श्याम सुंदर श्याम भी कांग्रेस के एक बहुत बड़े और कद्दावर नेता थे, जिन्होंने पूर्व में दतिया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अपने पिता के राजनीतिक पदचिह्नों पर चलते हुए राजेंद्र भारती ने भी दतिया की जनता के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई। वे दतिया से अब तक तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं और क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में हमेशा सक्रिय रहते हैं। अब इस उपचुनाव की घोषणा के बाद देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस सीट पर राजेंद्र भारती की विरासत को बचाने के लिए किसे अपना उम्मीदवार बनाती है, और क्या भाजपा एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाकर इस सीट को अपने पाले में करने में सफल हो पाती है।
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