देश के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में से एक, हनीमून मर्डर केस एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले की आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ अब राज्य सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मेघालय सरकार ने सोनम रघुवंशी की जमानत को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर की है। इससे पहले, मेघालय हाई कोर्ट ने शिलांग की निचली अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत को बरकरार रखा था और राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था।
कानूनी खामियों और अजीबोगरीब दलीलों का मामला
इस पूरे मामले में सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के पीछे पुलिस की एक बड़ी लापरवाही और अजीबोगरीब दलीलें सामने आई हैं। मेघालय हाई कोर्ट ने जब राज्य सरकार की जमानत रद्द करने वाली याचिका को खारिज किया, तो कोर्ट ने अपने फैसले में कई ऐसी बातों का उल्लेख किया जिनका इस पूरे मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।
पुलिस द्वारा तैयार किए गए गिरफ्तारी के आधिकारिक दस्तावेजों में कई चौंकाने वाले दावे किए गए थे। इन दस्तावेजों में लिखा गया था कि सोनम पर निम्नलिखित बातों का संदेह है:
- सेना से फरार होने का संदेह।
- विदेश में कोई गंभीर अपराध करने का संदेह।
- अपनी सजा पूरी होने के बाद पुलिस को अपना नया पता न बताना।
इन अजीबोगरीब विसंगतियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को जमानत देना ही उचित समझा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल की दलीलें
दूसरी ओर, राज्य सरकार इस जमानत को रद्द कराने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। तुषार मेहता ने देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने तर्क दिया कि मेघालय हाई कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत देकर एक बड़ी भूल की है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस के दस्तावेजों में जो विसंगतियां दिखाई दे रही हैं, वे केवल टाइपिंग की मामूली गलतियां थीं, जिन्हें गंभीर कानूनी कमी नहीं माना जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने जोर देकर कहा कि यह कोई ऐसी गंभीर कानूनी खामी नहीं है जिसके आधार पर इतने बड़े अपराध की आरोपी को जमानत दे दी जाए। उन्होंने कोर्ट में आशंका जताई कि आरोपी महिला देश छोड़कर भाग सकती है, इसलिए इस मामले पर तुरंत विचार किया जाना बेहद जरूरी है।
निचली अदालत से शुरू हुआ था यह पूरा विवाद
आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत शिलांग की निचली अदालत से हुई थी। निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर कानूनी कमियां पाई थीं। पुलिस सोनम को हिरासत में लेने के ठोस और सही कारण बताने में पूरी तरह नाकाम रही थी। इसी आधार पर निचली अदालत ने सोनम को राहत देते हुए जमानत मंजूर की थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी सही माना था। इस चर्चित मामले का संबंध मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से भी जुड़ा हुआ है, जहां आरोपी राजा रघुवंशी और उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी की तस्वीरें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। फिलहाल सभी की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होगी या उन्हें राहत जारी रहेगी।
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