पटना का 300 साल पुराना 'बावली कुआं': जमीन के नीचे छिपी है सात मंजिला रहस्यमयी दुनिया, वास्तुकला देखकर रह जाएंगे दंग

बिहार की राजधानी पटना में स्थित करीब 300 साल पुराना बावली कुआं अपनी अनूठी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। जमीन के नीचे सात मंजिलों में फैला यह कुआं आज पर्यटकों और फोटोग्राफर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती अपने दामन में न जाने कितने रहस्य और खूबसूरत विरासतें समेटे हुए है। जब भी हम बिहार की राजधानी पटना की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में गोलघर, गंगा घाट या पटना साहिब गुरुद्वारा की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इसी पटना शहर के एक कोने में एक ऐसी छिपी हुई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है, जो किसी जादुई दुनिया से कम नहीं लगती। हम बात कर रहे हैं पटना सिटी के सबलपुर इलाके में स्थित 300 साल पुराने बावली कुआं की। जमीन के नीचे बसी यह अनोखी दुनिया न केवल वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है, बल्कि इतिहास प्रेमियों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। पहली नजर में देखने पर कोई भी इस बात पर भरोसा नहीं कर पाएगा कि जमीन के अंदर इतनी भव्य इमारत हो सकती है।

मेहराबों और खंभों के बीच बसी सात मंजिला रहस्यमयी दुनिया

इस ऐतिहासिक बावली की सबसे बड़ी खूबी इसका जमीन के नीचे निर्मित होना है। यह केवल एक साधारण कुआं नहीं है, बल्कि इसे एक शानदार भूमिगत महल की तरह डिजाइन किया गया है। स्थानीय मान्यताओं और संरचना को देखकर यह स्पष्ट होता है कि यह कुआं सात मंजिला है। इसके अंदर जाने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं, जो सीधे पानी के स्तर तक ले जाती हैं।

जब आप इस बावली के भीतर कदम रखते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे समय सदियों पीछे चला गया हो। चारों तरफ विशाल और मजबूत पत्थर के खंभे खड़े हैं, जिन पर खूबसूरत नक्काशी की गई है। इन खंभों को सहारा देने के लिए बनाई गई भव्य मेहराबें इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। कुएं के चारों तरफ गलियारे बने हुए हैं, जहां बैठकर पुराने समय में लोग आराम करते होंगे। इस बावली की वास्तुकला इस तरह की है कि भयंकर गर्मी के मौसम में भी इसके अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी कम और ठंडा बना रहता है।

मुगल काल का इतिहास और पानी की जरूरत

इतिहासकारों के मुताबिक, इस अनूठे बावली कुआं का निर्माण करीब 300 साल पहले, मुगल साम्राज्य के ढलान यानी अंतिम दौर में किया गया था। उस दौर में जल संरक्षण और पेयजल की आपूर्ति के लिए इस तरह की बावलियों का निर्माण कराया जाता था। पटना सिटी का यह इलाका उस समय व्यापारिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण था।

यह बावली केवल स्थानीय लोगों की प्यास बुझाने का साधन नहीं थी, बल्कि यह दूर-दराज से आने वाले व्यापारियों, यात्रियों और मुसाफिरों के लिए एक विश्राम गृह की तरह भी काम करती थी। यहां आकर थके-हारे यात्री न केवल ठंडा पानी पीते थे, बल्कि इसकी सीढ़ियों और गलियारों में बैठकर आराम भी करते थे। समय के चक्र के साथ भले ही इस कुएं की दीवारें अब थोड़ी जर्जर हो गई हैं, लेकिन आज भी इसकी बनावट में उस समय के कारीगरों की बेमिसाल हुनर की झलक साफ देखी जा सकती है।

फोटोग्राफी और सोशल मीडिया का नया पसंदीदा ठिकाना

भले ही आज इस बावली कुआं के पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं किया जाता, लेकिन इसकी खूबसूरती आज के युवाओं के सिर चढ़कर बोल रही है। पिछले कुछ समय में यह जगह स्थानीय फोटोग्राफर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक पसंदीदा हॉटस्पॉट बन चुकी है। सोशल मीडिया पर इस बावली के वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं।

इस जगह की सबसे खास बात यह है कि यहां रोशनी और परछाई का एक अद्भुत खेल देखने को मिलता है। मेहराबों के बीच से छनकर आती सूरज की किरणें और नीचे जमा पानी में बनता उनका प्रतिबिंब, कैमरामैन को बेहतरीन शॉट्स लेने का मौका देता है। पत्थरों पर पड़ती रोशनी और अंधेरे का यह तालमेल तस्वीरों को एक रहस्यमयी और प्राचीन लुक देता है, जिसे लोग सोशल मीडिया पर काफी पसंद कर रहे हैं। हालांकि, बारिश के मौसम में इसके निचले हिस्सों में पानी काफी भर जाता है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है।

कहां स्थित है यह बावली कुआं और कैसे पहुंचें यहां?

यदि आप इतिहास को करीब से महसूस करना चाहते हैं और इस ऐतिहासिक धरोहर को देखना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है। यह बावली कुआं पटना की प्रसिद्ध धार्मिक जगह पटना साहिब गुरुद्वारा के काफी करीब स्थित है। गुरुद्वारे के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु आसानी से यहां का रुख कर सकते हैं।

भौगोलिक स्थिति की बात करें तो यह अनोखा कुआं राजधानी पटना के दीदारगंज थाना क्षेत्र से लगभग डेढ़ किलोमीटर पूर्व दिशा में सबलपुर मोहल्ले के भीतर स्थित है। स्थानीय लोगों से पूछकर या गूगल मैप की मदद से आप आसानी से इस छिपे हुए खजाने तक पहुंच सकते हैं। अगर आप पटना की यात्रा पर हैं, तो इस 300 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को अपनी सूची में शामिल करना न भूलें, क्योंकि इसकी जमीन के नीचे बसी दुनिया सचमुच आपका मन मोह लेगी।

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