बिहार के भागलपुर जिले के किसान अब अपनी पारंपरिक खेती के तरीकों को धीरे-धीरे बदल रहे हैं। वे आधुनिक किसानी के नए गुर और उन्नत तौर-तरीके सीख रहे हैं। भागलपुर के किसानों की बात करें तो वे अब बाजार में अधिक मांग वाली और तुरंत नकद मुनाफा देने वाली फसलों जैसे फल, फूल और सब्जियों की खेती में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस प्रकार की बागवानी से किसानों को किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही किसी जटिल कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्हें अपनी फसल बेचकर सीधे और तुरंत पैसे मिल जाते हैं, जिससे उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण और दैनिक खर्चों को चलाने में काफी आसानी होती है। हालांकि, सब्जी की खेती करना इतना भी आसान नहीं है, क्योंकि इसमें चुनौतियों की कोई कमी नहीं है।
खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितता, जैसे तेज आंधी और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक मार से लेकर पेड़-पौधों में हानिकारक कीटों और बीमारियों का लगना एक बहुत बड़ी समस्या है। विशेष रूप से सब्जियों की फसलों में कीटों का प्रकोप सबसे तेजी से होता है। अगर सही समय पर इन कीटों पर नियंत्रण न पाया जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। आज हम लौकी की फसल में लगने वाले एक बेहद विनाशकारी कीट, उससे होने वाले नुकसान और उससे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
लौकी को सड़ाने वाला फ्रूट कीट: पहचान और नुकसान
सब्जी की खेती में कीटों का हमला सबसे अधिक होता है और यही कारण है कि कई बार सही जानकारी के अभाव में सब्जी उत्पादक किसान अच्छा मुनाफा नहीं कमा पाते हैं। यदि किसान भाई कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें, तो वे अपनी फसलों से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं। वर्तमान समय की बात करें तो इस सीजन में खेतों में लौकी की फसल लगी हुई है और उसमें फल भी आने लगे हैं। इसी चरण में लौकी में फ्रूट कीट (फल मक्खी) का हमला शुरू हो जाता है।
अक्सर जब आप बाजार से लौकी खरीदते हैं, तो आपने देखा होगा कि लौकी के ऊपर या बीच में छोटे-छोटे काले छेद नजर आते हैं। यह छेद इसी फ्रूट कीट के कारण होते हैं। यह कीट सब्जी की फसलों पर बहुत तेजी से हमला करता है। जिस भी सब्जी या लौकी में यह कीट लग जाता है, वह धीरे-धीरे अंदर से पूरी तरह सड़ने लगती है। सड़ी हुई सब्जियों को बाजार में कोई नहीं खरीदता, जिससे किसानों को घाटे का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस कीट का समय पर और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना बेहद जरूरी है।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
इस समस्या और इसके समाधान के बारे में पौध संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि सब्जी की खेती एक बेहद संवेदनशील खेती है, जिसमें फंगल और वायरल बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है। पौधों में फंगल वायरस का हमला मुख्य रूप से तब होता है जब पौधों में फल आने (फलन) की प्रक्रिया शुरू होती है।
यह फ्रूट कीट बरसात के दिनों में सबसे अधिक सक्रिय होता है और फसलों को तेजी से नष्ट करता है। सुजीत पाल ने आगे बताया कि जिन खेतों में साफ-सफाई की कमी होती है और खरपतवार यानी अनावश्यक घास-फूस अधिक उगे होते हैं, वहां इस कीट का हमला सबसे भीषण होता है। हालांकि, किसान भाई बेहद आसान तरीकों से इसका उपचार कर सकते हैं और अपनी फसल को बचा सकते हैं।
कीटों से बचाव के आसान और असरदार उपाय
लौकी की फसल को फ्रूट कीट से सुरक्षित रखने और बेहतरीन पैदावार प्राप्त करने के लिए किसान निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं:
- नीम के तेल का छिड़काव (घरेलू उपाय): यदि आप शुरुआती स्तर पर घरेलू और जैविक उपाय करना चाहते हैं, तो नीम का तेल सबसे उत्तम माध्यम है। प्रत्येक 15 दिनों में एक बार अपनी लौकी की फसल पर नीम के तेल का नियमित छिड़काव करें। इससे पौधों पर फ्रूट कीट के लगने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
- फ्रूट कीट ट्रैप का उपयोग: बेल वाली सब्जियों जैसे लौकी में फ्रूट कैप (फलों को ढकने वाला कवर) लगाना काफी कठिन और व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता है। इसलिए इसका सबसे बढ़िया विकल्प है कि आप अपने खेतों में फ्रूट कीट ट्रैप (कीट प्रपंच) लगाएं। इस ट्रैप की ओर आकर्षित होकर सभी नुकसानदायक मक्खियां इसमें फंसकर खत्म हो जाती हैं और आपकी फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
- कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग: यदि कीटों का प्रकोप नियंत्रण से बाहर होने लगे, तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नियमित अंतराल पर अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों का सावधानीपूर्वक प्रयोग करें।
- पानी और खाद का कुशल प्रबंधन: फसल की मजबूती के लिए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सही होनी चाहिए ताकि बारिश का पानी जमा न हो। इसके साथ ही, उर्वरकों का संतुलित और सही मात्रा में इस्तेमाल करें, जिससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
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