गुजरात में 18 साल तक के बच्चों के लिए बनेगा 'हेल्थ पासपोर्ट', एक ही जगह पर सुरक्षित रहेगा सेहत का पूरा इतिहास

गुजरात सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी के लिए 'हेल्थ पासपोर्ट' योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा।

गुजरात की सरकार ने सूबे के बच्चों के सुरक्षित और तंदुरुस्त भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद अनोखा और प्रभावी कदम उठाया है। अब राज्य के नवजात शिशुओं से लेकर 18 वर्ष तक की आयु के हर एक बच्चे के लिए विशेष 'हेल्थ पासपोर्ट' तैयार किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत बच्चों की स्वास्थ्य से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी, उनकी बीमारियों का इतिहास, पोषण का स्तर और नियमित जांचों का पूरा ब्यौरा एक ही दस्तावेज में समेटा जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, डिजिटल रूप से सुदृढ़ और आम परिवारों के लिए बेहद सरल बनाना है।

अमित शाह और भूपेंद्र पटेल ने किया था इस महत्वपूर्ण योजना का शुभारंभ

इस बड़े अभियान की नींव स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SH-RBSK) के तहत रखी गई है। राज्यव्यापी स्तर पर इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत 27 जून 2026 को की गई थी। इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया था, जबकि इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस योजना को लेकर राज्य प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि यह दूरगामी कदम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ बचपन, स्वस्थ भारत' के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

हर साल 1.89 करोड़ बच्चों की होगी विस्तृत सेहत जांच

इस योजना का दायरा बेहद व्यापक रखा गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा खाका तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • गुजरात भर में हर साल जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु वाले लगभग 1.89 करोड़ बच्चों का समग्र स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
  • इस विशाल जांच अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 992 मोबाइल हेल्थ टीमों को काम पर लगाया गया है।
  • ये चिकित्सा दल राज्य के हर कोने में सक्रिय रहेंगे और आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी व निजी स्कूलों, मदरसों, गुरुकुलों के साथ-साथ विशेष बच्चों के स्कूलों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले बच्चों की सेहत से जुड़े तमाम आंकड़े केवल डिजिटल पोर्टल पर ही दर्ज किए जाते थे। इस वजह से माता-पिता के पास अपने बच्चों की सेहत का कोई ऐसा दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाता था जिसे वे जरूरत के समय तुरंत देख सकें। नया हेल्थ पासपोर्ट इसी समस्या का स्थायी समाधान बनकर सामने आया है, जिससे अब माता-पिता के हाथों में उनके बच्चों की सेहत की पूरी जानकारी हमेशा मौजूद रहेगी।

हर साल रिन्यू होगा पासपोर्ट, जानिए कैसे काम करेगी यह प्रक्रिया

अभिभावकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हेल्थ पासपोर्ट को बनवाने और उसे अपडेट रखने की प्रक्रिया को बेहद आसान और झंझट मुक्त रखा है। इसके लिए माता-पिता को किसी भी तरह के अतिरिक्त कागजी काम या सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी। मोबाइल हेल्थ टीम जब संबंधित स्थान पर जाकर बच्चे की जांच करेगी और डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेगी, तो इसके तुरंत बाद मौके पर ही बच्चों को उनका फिजिकल हेल्थ पासपोर्ट सौंप दिया जाएगा।

इस हेल्थ पासपोर्ट को हर साल अपडेट यानी नवीनीकृत किया जाएगा, जिसके लिए अलग-अलग वर्ग तय किए गए हैं:

  • 5 साल तक के बच्चों और स्कूल न जाने वाले बच्चों के लिए: इनके हेल्थ पासपोर्ट का नवीनीकरण स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के मेडिकल ऑफिसर द्वारा किया जाएगा।
  • स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए: इनके हेल्थ पासपोर्ट को अपडेट करने की जिम्मेदारी उनके संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) की होगी।

एक ही पासपोर्ट में दर्ज होगी पूरी मेडिकल हिस्ट्री

यह हेल्थ पासपोर्ट केवल एक सामान्य दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बच्चे के जन्म से लेकर 18 साल तक की उम्र के सफर की पूरी मेडिकल कुंडली होगा। इसमें बच्चे के सामान्य परिचय जैसे नाम, पता और उम्र के अलावा उम्र के विभिन्न पड़ावों पर होने वाली हर एक स्वास्थ्य जांच की विस्तृत रिपोर्ट दर्ज होगी।

विशेष रूप से, इस पासपोर्ट में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SH-RBSK) के अंतर्गत आने वाले 4 प्रमुख क्षेत्रों यानी 4D का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इन चार श्रेणियों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • जन्मजात कमियां या विकार: जन्म के समय दिखने वाले शारीरिक दोष या समस्याएं।
  • विभिन्न बीमारियां: बचपन में होने वाले विभिन्न रोग।
  • पोषण की कमी: शरीर में पोषक तत्वों की कमी से होने वाली कमजोरी।
  • विकास में देरी और दिव्यांगता: बच्चे के शारीरिक या मानसिक विकास की धीमी गति और किसी भी प्रकार की अक्षमता।

इसके साथ ही बच्चे की मानसिक और शारीरिक प्रगति, रेफरल सेवाओं का पूरा इतिहास, डॉक्टरों द्वारा दिए गए पोषण व स्वास्थ्य संबंधी सुझाव, दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली अच्छी आदतें और आपातकालीन स्थिति के लिए आवश्यक हेल्पलाइन नंबर भी इस पासपोर्ट में अंकित रहेंगे।

डिजिटल पोर्टल से सीधे जुड़ा रहेगा हेल्थ पासपोर्ट

इस पूरी योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका तकनीकी ढांचा है। भले ही माता-पिता को यह पासपोर्ट एक भौतिक डायरी या कॉपी के रूप में सौंपा जाएगा, लेकिन इसका पूरा बैकअप डेटा SH-RBSK के केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल पर सुरक्षित रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि यदि किसी परिस्थिति में बच्चे का मूल हेल्थ पासपोर्ट खो जाता है, फट जाता है या खराब हो जाता है, तो अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं होगी। वे अपनी मोबाइल हेल्थ टीम के जरिए डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से नया हेल्थ पासपोर्ट बेहद आसानी से दोबारा हासिल कर सकेंगे।

इस अभूतपूर्व पहल के जरिए गुजरात सरकार का प्रयास केवल कागजी रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है, बल्कि माता-पिता को जागरूक बनाकर उन्हें बच्चों की सेहत की निगरानी में सीधे और सक्रिय तौर पर भागीदार बनाना है ताकि राज्य का हर बच्चा स्वस्थ रहकर बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सके।

https://www.indiatv.in/gujarat/gujarat-introduce-health-passport-for-every-child-up-to-18-creating-lifetime-medical-records-2026-07-02-1228709