देहरादून में कुदरत और विज्ञान का अनोखा मेल, 60 साल पुराने आम के पेड़ पर उग रहीं 42 अलग-अलग किस्में

देहरादून के ऐतिहासिक सर्किट हाउस राजकीय उद्यान में ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए एक बूढ़े और बंजर आम के पेड़ को नया जीवन दिया गया है, जिस पर अब चौसा और लंगड़ा समेत 42 किस्मों के आम उग रहे हैं।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रकृति और आधुनिक विज्ञान का एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला संगम देखने को मिल रहा है। यहां के ऐतिहासिक सर्किट हाउस राजकीय उद्यान में मौजूद करीब 60 साल पुराना आम का एक पेड़ इन दिनों लोगों के लिए भारी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कभी पूरी तरह बंजर हो चुका यह बूढ़ा पेड़ आज आधुनिक बागवानी तकनीक के कारण नई जिंदगी जी रहा है और इस पर एक या दो नहीं, बल्कि पूरी 42 अलग-अलग किस्मों के आम लटक रहे हैं।

वैज्ञानिक सूझबूझ और ग्राफ्टिंग का कमाल

इस करिश्मे को मुमकिन कर दिखाया है कृषि वैज्ञानिकों की सूझबूझ और आधुनिक बागवानी तकनीक ने। विशेषज्ञों ने इस पुराने और बंजर हो चुके पेड़ को नया जीवन देने के लिए ग्राफ्टिंग तकनीक यानी कलम बांधने की विधि का सहारा लिया। इस वैज्ञानिक तकनीक की मदद से बूढ़े पेड़ की शाखाओं पर अलग-अलग उन्नत किस्मों की टहनियों को जोड़ा गया, जो धीरे-धीरे इस पेड़ का मुख्य हिस्सा बन गईं और अब उन पर भारी मात्रा में फल आने लगे हैं।

एक ही पेड़ पर चौसा से लेकर आम्रपाली तक का स्वाद

इस एक ही पेड़ पर देश की कई प्रसिद्ध और स्वाद से भरपूर आम की किस्में एक साथ फल दे रही हैं। इस पेड़ पर उगने वाली कुछ प्रमुख किस्मों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • चौसा
  • लंगड़ा
  • आम्रपाली
  • अरुणिका
  • अंबिका

इन मशहूर किस्मों के अलावा कई अन्य विशेष किस्में भी इस पेड़ पर सफलतापूर्वक फल-फूल रही हैं।

भविष्य का लक्ष्य: 100 किस्में उगाने की तैयारी

इस सफल प्रयोग के बाद उद्यान विभाग के हौसले काफी बुलंद हैं। सीनियर हॉर्टिकल्चर इंस्पेक्टर दीपक पुरोहित के मुताबिक, ग्राफ्टिंग का यह प्रयोग यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि इस साल इसी एक पेड़ पर कुल 100 तरह की वैरायटी उगाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया गया है, जिस पर वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं।

कम जगह में बागवानी करने वालों के लिए बड़ी मिसाल

यह अनोखा प्रयोग न केवल कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी है, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रेरणा का एक बेहतरीन जरिया है। आजकल के दौर में जब शहरों में जमीन की भारी कमी हो रही है, तब यह तकनीक उन लोगों के लिए एक बेहतरीन मिसाल साबित हो सकती है जो बहुत ही कम जगह में कई तरह के फल उगाने का शौक रखते हैं। इस तकनीक को अपनाकर बागवानी के शौकीन लोग अपने छोटे से बगीचे में लगे इकलौते पेड़ से भी विभिन्न स्वादों के फलों का आनंद उठा सकते हैं।

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