झारखंड के जमशेदपुर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में मानसून की दस्तक हो चुकी है। बारिश का मौसम जहां चिलचिलाती गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं अपने साथ कई तरह की व्यावहारिक परेशानियां भी लेकर आता है। इस मौसम में लोगों को जिस सबसे आम और सिरदर्द देने वाली समस्या का सामना करना पड़ता है, वह है धुले हुए कपड़ों का ठीक से न सूखना और उनमें से आने वाली अजीब सी सीलन भरी बदबू। कई बार तो कपड़ों से मछली जैसी इतनी तेज और असहनीय दुर्गंध आने लगती है कि उन्हें पहनना तो दूर, अलमारी में रखना भी दूभर हो जाता है। साफ-सुथरे और धुले हुए कपड़ों से इस तरह की बदबू आना किसी को भी असहज कर सकता है।
आखिर क्यों आती है कपड़ों से यह अजीब बदबू?
इस गंभीर समस्या पर रोशनी डालते हुए घरेलू मामलों के विशेषज्ञ रमेश बताते हैं कि बारिश के दिनों में धूप की भारी कमी होती है। इस वजह से लोग कपड़ों को खुले आसमान के नीचे फैलाने के बजाय कमरों के भीतर ही सुखाने पर मजबूर होते हैं। रमेश के अनुसार, मानसून के दौरान हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। जब कपड़ों में लंबे समय तक यह गीलापन या नमी बनी रहती है, और उन्हें पर्याप्त ताजी हवा नहीं मिल पाती, तो उनमें बैक्टीरिया (जीवाणु) और फंगस (कवक) बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। यही सूक्ष्मजीव कपड़ों में पैदा होने वाली उस अजीब और तीखी दुर्गंध का मुख्य कारण होते हैं।
कपड़े धोते समय अपनाएं यह सही तरीका
विशेषज्ञ रमेश का कहना है कि कपड़ों को महकता हुआ बनाए रखने की शुरुआत उनकी सही धुलाई से ही होती है। मानसून के इस मौसम में साधारण डिटर्जेंट के बजाय किसी अच्छी गुणवत्ता वाले और खुशबूदार डिटर्जेंट का ही चयन करना चाहिए। इसके साथ ही, आजकल बाजार में कई बेहतरीन आफ्टर-वॉश और फैब्रिक कंडीशनर उपलब्ध हैं। कपड़े धोने के अंतिम चरण में, जब आप उन्हें आखिरी बार साफ पानी से निकाल रहे हों, तो पानी में थोड़ा सा फैब्रिक कंडीशनर मिला लें। इस घोल में कपड़ों को कुछ मिनट के लिए भिगोकर रखने के बाद निचोड़ें। इससे कपड़ों के रेशों में एक सुरक्षात्मक परत बन जाती है और उनमें लंबे समय तक ताजगी व बेहतरीन खुशबू बनी रहती है।
पानी को पूरी तरह से निचोड़ना है जरूरी
कपड़े धोने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम उन्हें सुखाने की तैयारी करना है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धुलाई पूरी होने के बाद कपड़ों में पानी की मात्रा न्यूनतम होनी चाहिए। कपड़ों को जितना हो सके, अच्छी तरह से निचोड़ लें। अगर आप कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं, तो मशीन के स्पिनर मोड यानी ड्रायर का उपयोग अवश्य करें और उसे पूरी क्षमता पर चलाएं। यदि आप हाथ से कपड़े धो रहे हैं, तो उन्हें पूरी ताकत से निचोड़कर अतिरिक्त पानी बाहर निकाल दें। कपड़ों में पानी जितना कम रहेगा, वे उतनी ही तेजी से सूखेंगे और बैक्टीरिया को पनपने का समय नहीं मिलेगा, जिससे बदबू की आशंका बेहद कम हो जाएगी।
कमरे के अंदर हवा का सही प्रवाह सुनिश्चित करें
बारिश के लगातार होने के कारण अधिकांश घरों में कपड़ों को कमरों के भीतर ही रस्सियों या स्टैंड पर सुखाया जाता है। ऐसे में लोग अक्सर ठंडक या बारिश की बौछार से बचने के लिए कमरे के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद कर देते हैं। रमेश बताते हैं कि यह एक बहुत बड़ी गलती है। बंद कमरे में हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे वहां की नमी (ह्यूमिडिटी) और बढ़ जाती है। इसका सीधा असर कपड़ों पर पड़ता है और वे सड़ने जैसी बदबू देने लगते हैं। इसलिए, जब भी कमरे के अंदर कपड़े सुखाएं, तो कमरे की खिड़कियां और दरवाजे खुले रखें ताकि हवा का आना-जाना बना रहे। इसके साथ ही कमरे का पंखा लगातार तेज गति पर चलाकर रखें, जिससे कपड़ों की नमी हवा के बहाव के साथ तेजी से उड़ सके।
थोड़ी सी धूप का भी उठाएं पूरा फायदा
मानसून में भले ही धूप लगातार नहीं निकलती, लेकिन दिन में कई बार कुछ समय के लिए बादल छंटते हैं और हल्की धूप बाहर आती है। विशेषज्ञ रमेश का सुझाव है कि जैसे ही आसमान साफ हो और थोड़ी भी धूप दिखाई दे, बिना देर किए अपने कपड़ों को बाहर धूप में डाल दें। भले ही यह धूप कुछ ही मिनटों या घंटों के लिए हो, लेकिन इसकी गर्मी कपड़ों के भीतर छिपी सीलन को सोखने में बेहद असरदार होती है। धूप में मौजूद पराबैंगनी (यूवी) किरणें कपड़ों में बदबू पैदा करने वाले जीवाणुओं और फंगस को जड़ से खत्म करने का काम करती हैं। धूप दिखाने के बाद आप कपड़ों को वापस कमरे के अंदर लाकर पंखे की हवा में पूरी तरह सुखा सकते हैं।
प्रेस करने का जादुई नुस्खा
कपड़ों को पूरी तरह से सुखाने के बाद भी कभी-कभी उनमें थोड़ी बहुत सीलन बची रह जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ एक बहुत ही कारगर तरीका बताते हैं, और वह है कपड़ों को आयरन (प्रेस) करना। जब कपड़े लगभग सूख जाएं या हल्के से नम हों, तो उन पर गर्म इस्त्री फेरें। आयरन से निकलने वाली तेज गर्मी कपड़ों के धागों के भीतर तक समाई हुई बची-कुची नमी को पूरी तरह से सुखाकर भाप बना देती है। इससे न केवल कपड़ों की सिलवटें दूर होती हैं, बल्कि बची हुई सूक्ष्म दुर्गंध भी पूरी तरह गायब हो जाती है और कपड़े एकदम कड़क और ताजे हो जाते हैं।
सुरक्षित और महकता हुआ मानसून
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के इस चुनौतीपूर्ण मौसम में थोड़ी सी अतिरिक्त सावधानी और सही आदतों को अपनाकर आप अपने कीमती कपड़ों को खराब होने और बदबूदार बनने से आसानी से बचा सकते हैं। ऊपर बताए गए आसान उपायों, जैसे सही डिटर्जेंट का चुनाव, पानी को अच्छे से निचोड़ना, कमरे में हवा का पर्याप्त वेंटिलेशन रखना, हल्की धूप का इस्तेमाल करना और अंत में गर्म प्रेस करना, के जरिए आपके कपड़े हमेशा नए जैसे चमकीले और खुशबूदार बने रहेंगे। इस तरह आप बिना किसी हिचकिचाहट और कोफ्त के पूरे मानसून सीजन का आनंद उठा सकते हैं।
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