हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में आंतरिक विवाद गहराया
हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के भीतर चल रही अधिकारियों की आपसी खींचतान अब पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई है। शिमला में तैनात DSP मुख्यालय विजय कुमार रघुवंशी की सरकारी गाड़ी और PSO की सुरक्षा वापस लिए जाने के मामले ने अब एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। इस गंभीर प्रशासनिक और व्यक्तिगत टकराव के बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने हिमाचल प्रदेश के कार्यवाहक DGP अशोक तिवारी को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है और इस पूरे मामले पर अगले 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
अनुसूचित जाति आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान, मांगी 15 दिन में रिपोर्ट
यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब शिमला के DSP (मुख्यालय) विजय कुमार रघुवंशी ने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का रुख किया। उन्होंने विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत आधार पर प्रताड़ना और मानसिक रूप से परेशान करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग को दी गई शिकायत में रघुवंशी ने कहा है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण थी और जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया गया।
इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने 30 जून 2026 को एक नोटिस जारी किया। नोटिस के अनुसार, विजय कुमार रघुवंशी ने 3 जून को आयोग को अपनी लिखित शिकायत सौंपी थी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत उसे इस तरह के मामलों की जांच करने का पूरा अधिकार है और वह इस मामले की गहराई से जांच करेगा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के वरिष्ठ अन्वेषक प्रवीण चंद्र दियुंडी द्वारा जारी किए गए इस आदेश में पुलिस महानिदेशक को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायत पर हुई अब तक की कार्रवाई, उपलब्ध तथ्यों और सभी आवश्यक दस्तावेज 15 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर जवाब नहीं मिला, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।
आखिर क्या था यह गाड़ी और लिफ्ट से जुड़ा विवाद?
इस पूरे घमासान की नींव इस साल 10 मार्च 2026 को पड़ी थी। उस दिन DSP हेडक्वार्टर विजय कुमार रघुवंशी ने शिमला के पूर्व एसपी और वर्तमान में पुलिस विभाग में ही कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी को अपनी सरकारी गाड़ी में लिफ्ट दी थी। आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी को गाड़ी में बैठाना विभाग के कुछ उच्च अधिकारियों को पसंद नहीं आया। इसके तुरंत बाद एक दंडात्मक कार्रवाई के रूप में DSP रघुवंशी से उनकी सरकारी गाड़ी और सुरक्षा में तैनात PSO की सुविधा को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को पुलिस की जनरल डायरी (जीडी) में भी दर्ज किया गया था, जिससे यह विभागीय विवाद सार्वजनिक हो गया और मीडिया की सुर्खियों में भी बना रहा। डीएसपी का आरोप है कि सामान्य शिष्टाचार के तहत दी गई इस लिफ्ट को मुद्दा बनाकर उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया गया है, जिसके खिलाफ उन्होंने अब आयोग के जरिए अपनी आवाज उठाई है।
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