नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों के बीच एक अजीब सा डर और तनाव बना हुआ है। अमूमन सड़कों पर अचानक बंद होने वाले वाहनों को तकनीकी खराबी मान लिया जाता है, लेकिन दिल्ली से सटे इस औद्योगिक क्षेत्र में मामला कुछ और ही है। यहां ई-रिक्शा चालकों का दावा है कि उनके वाहन बिना किसी खराबी के, सड़क के बीचों-बीच अचानक ठप हो रहे हैं। इस रहस्यमयी रुकावट के पीछे कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक बेहद अनोखा और हाईटेक खेल चल रहा है। कुछ शरारती तत्व सिर्फ एक मोबाइल फोन और ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल कर चलते हुए ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे हैं। इस नए तरह के डिजिटल कारनामे ने ई-रिक्शा चालकों की रातों की नींद उड़ा दी है।
कैसे हो रहा है चलते ई-रिक्शा को हाइजैक करने का यह खेल?
इस पूरे मामले की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि आधुनिक ई-रिक्शा में सुरक्षा और बेहतर प्रदर्शन के लिए स्मार्ट बैटरी तकनीक का उपयोग किया जाता है। इन बैटरियों की निगरानी के लिए इनमें एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) या कंट्रोलर लगा होता है। इस सिस्टम को ब्लूटूथ या किसी विशिष्ट मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जोड़ा और नियंत्रित करने की सुविधा दी जाती है। कुछ शरारती तत्व इसी सुविधा का गलत फायदा उठा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इंटरनेट पर 'BAT-BMS' नामक एक मोबाइल ऐप काफी चर्चा में है, जिसकी मदद से इन स्मार्ट बैटरियों को रिमोट तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि ई-रिक्शा की बैटरी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं या उसके ब्लूटूथ कनेक्शन पर कोई पासवर्ड नहीं लगा है, तो कोई भी बाहरी व्यक्ति इस ऐप के जरिए वाहन की रेंज में आते ही उससे कनेक्ट हो सकता है। एक बार कनेक्शन स्थापित होने के बाद, वह दूर बैठे ही ऐप के माध्यम से ई-रिक्शा की बैटरी को सीधे स्विच ऑफ यानी बंद कर देता है। इसके बाद चालक लाख कोशिशों के बाद भी वाहन को तुरंत चालू नहीं कर पाता है। तकनीक का यह दुरुपयोग चिंताजनक है क्योंकि ब्लूटूथ की रेंज के भीतर रहकर कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से अंजाम दे सकता है।
चालकों को झेलना पड़ रहा है भारी नुकसान और परेशानी
इस हाईटेक शरारत के कारण गौतमबुद्ध नगर जिले के विभिन्न इलाकों में रोजाना ई-रिक्शा चालक परेशान हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ड्राइवरों का कहना है कि उनका वाहन पूरी तरह से ठीक होने के बावजूद अचानक बीच सड़क पर खड़ा हो जाता है। शुरुआत में उन्हें लगता है कि शायद कोई तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन जब वे मैकेनिक के पास जाते हैं और बैटरी, मोटर या अन्य हिस्सों की जांच करवाते हैं, तो सब कुछ सामान्य मिलता है। इसके कारण चालकों को घंटों सड़क पर खड़े होकर मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है।
इस स्थिति के कारण चालकों को निम्नलिखित बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- आर्थिक नुकसान: बीच रास्ते में रिक्शा अचानक बंद होने से यात्रियों को आधा सफर छोड़कर ही उतरना पड़ता है। इससे चालकों को किराया नहीं मिल पाता और उनकी दैनिक कमाई पर सीधा और बुरा असर पड़ता है।
- समय की बर्बादी: बिना किसी खराबी के घंटों तक सड़क पर खड़े रहकर वाहन को ठीक करने की कोशिशों में चालकों का कीमती समय बर्बाद हो जाता है, जिससे वे पूरे दिन में बहुत कम चक्कर लगा पाते हैं।
- सड़क दुर्घटनाओं का खतरा: तेज रफ्तार यातायात के बीच अचानक ई-रिक्शा के बंद हो जाने से पीछे से आ रहे अन्य वाहनों के टकराने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
सुरक्षा पुख्ता करने की उठ रही है मांग
परेशान ई-रिक्शा चालकों ने अब इस समस्या के समाधान के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनकी मांग है कि वाहन निर्माता कंपनियों और बैटरी निर्माताओं को इस तकनीकी खामी को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए। चालकों का सुझाव है कि प्रत्येक ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में एक अनिवार्य पासवर्ड या मल्टी-लेयर सुरक्षा प्रणाली होनी चाहिए। इसके होने से कोई भी अज्ञात या अनधिकृत व्यक्ति बिना चालक की अनुमति के वाहन के ब्लूटूथ सिस्टम से नहीं जुड़ सकेगा और इस तरह की डिजिटल शरारतों पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी। चालकों का कहना है कि वे रोजाना मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते हैं, ऐसे में इस तरह की असामाजिक गतिविधियों के कारण उनका मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए।
पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर प्रशासन और स्थानीय पुलिस की भी नजर है। गौतमबुद्ध नगर के एडिशनल डीसीपी स्वतंत्र सिंह ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ या ई-रिक्शा बंद किए जाने की कोई भी आधिकारिक शिकायत अभी तक पुलिस के पास दर्ज नहीं कराई गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि यदि भविष्य में ऐसी कोई शिकायत सामने आती है, तो पुलिस विभाग इसकी पूरी गंभीरता के साथ तकनीकी जांच करवाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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