एक साथ छह डॉक्टरों के तबादले से बढ़ा तनाव
उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित प्रसिद्ध बीडी पांडे जिला अस्पताल से एक साथ 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादले ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार के इस फैसले से स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं। लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के जाने से अस्पताल की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ठप हो सकती है।
इन महत्वपूर्ण विभागों के डॉक्टर शामिल
अस्पताल से जिन विशेषज्ञों का स्थानांतरण किया गया है, उनमें कई महत्वपूर्ण विभागों के डॉक्टर शामिल हैं। इन तबादलों से मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। स्थानांतरित किए गए डॉक्टरों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- फिजिशियन
- सर्जन
- हड्डी रोग विशेषज्ञ
- ईएनटी विशेषज्ञ (नाक, कान और गला रोग)
- अन्य सहयोगी विशेषज्ञ डॉक्टर
ग्रामीण और पर्वतीय मरीजों का एकमात्र सहारा
बीडी पांडे जिला अस्पताल केवल नैनीताल शहर के निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के दर्जनों ग्रामीण और दूरदराज के पर्वतीय इलाकों के मरीजों के लिए इलाज का एकमात्र मुख्य जरिया है। ऐसे में एक साथ कई डॉक्टरों के हटाए जाने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों या निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ेगा, जो उनके बजट से बाहर है।
अस्पताल की श्रेणी बदलने पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय जनता ने सरकार के इस स्थानांतरण आदेश पर तत्काल पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, लोगों ने अस्पताल को दुर्गम श्रेणी से हटाकर सुगम श्रेणी में डालने के सरकारी फैसले पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना इस तरह के फैसले लेने से पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ जाएंगी।
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