हिमाचल के लाहौल-स्पीति में उफनते नाले ने बढ़ाई आफत, जेसीबी की बकेट में बैठाकर पार करानी पड़ी महिला मरीज, बारात भी पैदल निकलने को मजबूर

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में जाहलमा पुल टूटने के बाद उफनते जाहलमा नाले को पार करने में मरीजों, बारातियों और किसानों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।

लाहौल-स्पीति में मानसून की दस्तक के साथ बढ़ीं मुश्किलें

हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन की शुरुआत होते ही लाहौल-स्पीति जिले के उदयपुर मंडल पर बड़ी आफत आ गई है। इस क्षेत्र में जिला मुख्यालय केलांग को उदयपुर से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण जाहलमा पुल पूरी तरह टूट चुका है, जिससे उदयपुर-केलांग मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया है। पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण जाहलमा नाले को पार करने के लिए प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा एक अस्थाई व्यवस्था तो की गई है, लेकिन यह वैकल्पिक व्यवस्था भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है। पहाड़ों पर बर्फ पिघलने और लगातार हो रही बारिश की वजह से नाले में किसी भी समय अचानक बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे पानी का बहाव अनियंत्रित हो जाता है और लोगों के लिए आर-पार आना-जाना बेहद खतरनाक हो जाता है। वर्तमान में मौके पर बीआरओ और पुलिस की टीमें तैनात हैं और लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

जेसीबी की बकेट बनी सहारा, गंभीर मरीज को सुरक्षित निकाला

इस विकट स्थिति के बीच सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना गंभीर रूप से बीमार मरीजों, स्थानीय किसानों और बागवानों को करना पड़ रहा है। बुधवार को एक बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति सामने आया जब उदयपुर के शैनूर गांव की रहने वाली एक महिला मरीज शांति को जान जोखिम में डालकर नाला पार करवाना पड़ा। महिला मरीज शांति का उपचार नागरिक अस्पताल (सिविल अस्पताल) उदयपुर में चल रहा था, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने और हालत ज्यादा खराब होने की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें कुल्लू अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था।

बुधवार को जब परिजन एम्बुलेंस और अन्य साधनों के जरिए मरीज को कुल्लू ले जा रहे थे, तभी अचानक जाहलमा नाले में पानी का बहाव बेहद तेज हो गया। खतरे को देखते हुए बीआरओ की टीम ने सुरक्षा के लिहाज से अस्थाई सड़क के रूप में डाले गए आरसीसी पाइपों को हटा दिया और पैदल आवाजाही के लिए लगाए गए लोहे के गार्डर भी वहां से निकाल लिए। इसके बाद मरीज को कंधे पर और स्ट्रैचर की मदद से नाला पार करवाने का प्रयास शुरू हुआ। इस संवेदनशील मौके पर बीआरओ के जवान, स्थानीय पुलिस कर्मी और स्थानीय ग्रामीण देवदूत बनकर सामने आए। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए मरीज की मदद की। पानी का बहाव खतरनाक होने के कारण अंततः एक जेसीबी मशीन बुलाई गई और मरीज शांति को सुरक्षित रूप से जेसीबी की बकेट (टोकरी) में बैठाकर उफनते नाले के पार पहुंचाया गया, जहां से उन्हें अस्पताल रवाना किया गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय युवक शेखर ने बताया कि जाहलमा नाले में पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा था कि बिना लोगों की त्वरित मदद और जेसीबी के सहयोग के महिला मरीज को पार कराना नामुमकिन था। इस साहसिक कार्य को लेकर लाहौल-स्पीति जिला पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी गर्व व्यक्त किया है। पुलिस विभाग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जाहलमा नाला में बाढ़ जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण हालात के बीच भी लाहौल एवं स्पीति जिला पुलिस ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए एक गंभीर मरीज को सुरक्षित बाहर निकाला और अन्य लोगों की सहायता कर अपने शासकीय एवं मानवीय कर्तव्य को बखूबी अंजाम दिया।

शादी की खुशियों में भी आई अड़चन, पैदल ही नाला पार करने को मजबूर हुआ दूल्हा-दुल्हन

जाहलमा नाले के इस उग्र रूप की वजह से न केवल मरीज बल्कि शादी-ब्याह वाले परिवार भी परेशान हो रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को भी इस मार्ग पर एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला वाकया देखने को मिला था, जब कुल्लू से आई एक बारात इस नाले के पास आकर फंस गई। आगे जाने का कोई रास्ता न होने के कारण बारात को पैदल ही उफनते नाले को पार करना पड़ा। हालत यह थी कि दूल्हा अपनी नई-नवेली दुल्हन का हाथ पकड़कर उसे पैदल ही इस खतरनाक रास्ते से पार कराकर ले गया।

मटर और गोभी की फसलें खराब होने की कगार पर, किसान बेहद परेशान

ज्ञात हो कि उदयपुर और मनाली को आपस में जोड़ने वाले इस मुख्य तांदी-संसारी मार्ग पर 27 मई 2026 को भारी भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ था, जिसके चलते जाहलमा पुल पूरी तरह टूट गया था। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र के लोग लगातार भारी असुविधाओं का सामना कर रहे हैं। अब क्षेत्र में मटर और गोभी की खेती का मुख्य सीजन शुरू हो चुका है, जो यहां के किसानों और बागवानों की आजीविका का एकमात्र जरिया है। मार्ग बंद होने और नाले में लगातार पानी बढ़ने के कारण उनकी तैयार फसलें मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है कि उनकी मेहनत की फसल समय पर न बिकने के कारण पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक संकट झेलना पड़ सकता है।

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