अमरूद की बागवानी का सबसे उत्तम समय शुरू, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बंपर पैदावार के अचूक तरीके

बरसात के मौसम में अमरूद के पौधों की रोपाई करने से सर्दियों में फलों की भारी पैदावार मिलती है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसके लिए सही समय, तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी साझा की है।

भारत में अमरूद एक बेहद लोकप्रिय और पौष्टिक फल है, जिसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। यदि आप भी अपने खेतों या बगीचों में अमरूद के पौधे लगाने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह सबसे सही और उपयुक्त समय है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून यानी बरसात का मौसम अमरूद की रोपाई के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस समय पौधों को लगाने से न केवल उनकी जड़ें मजबूत होती हैं, बल्कि आने वाले सर्दियों के मौसम तक पेड़ मीठे और रसीले फलों से पूरी तरह लद जाते हैं।

बरसात का मौसम क्यों है अमरूद के लिए खास?

पश्चिम चम्पारण के माधोपुर में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह के अनुसार, बरसात के मौसम में मिट्टी में नमी की मात्रा प्राकृतिक रूप से बहुत अच्छी होती है। जुलाई की शुरुआत से लेकर अगस्त के मध्य तक का समय अमरूद के नए पौधों की रोपाई के लिए सबसे उत्तम माना गया है। यदि किसान इस समय सीमा के भीतर अपने खेतों में पौधे लगाने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हैं, तो भविष्य में उन्हें पैदावार को लेकर किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। शुरुआती दौर में थोड़ी सी देखभाल और सही वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान भाइयों को सर्दियों में अमरूद की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार मिल सकती है।

पौधों की रोपाई के लिए गड्ढे और मिट्टी की तैयारी

सफल बागवानी के लिए मिट्टी की सही तैयारी और पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। वैज्ञानिक विधि के अनुसार किसानों को निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिए:

  • पौधों की रोपाई के लिए बनाए जाने वाले गड्ढों की गहराई और चौड़ाई 7 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
  • एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 6 मीटर × 6 मीटर के अनुपात में रखी जानी चाहिए ताकि भविष्य में पेड़ों के फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
  • मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के लिए गड्ढे में 30 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए।
  • इसके साथ ही मिट्टी में 02 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट मिलाना बेहद फायदेमंद रहता है।
  • पौधे की बेहतर वृद्धि के लिए 01 किलोग्राम पोटाश और कीड़ों से बचाव के लिए 1 ग्राम थाईमेट की मात्रा को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर गड्ढों को बराबर कर लेना चाहिए।

इन सभी पोषक तत्वों को सही मात्रा में मिलाकर जब पौधा लगाया जाता है, तो जड़ों का विकास बहुत तेजी से होता है और पौधों के जीवित रहने की दर भी काफी बढ़ जाती है

अमरूद की इन उन्नत किस्मों का ही करें चयन

अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने के लिए सही किस्म का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि किसानों को केवल मान्यता प्राप्त और विश्वसनीय नर्सरी से ही उन्नत किस्म के पौधे खरीदने चाहिए। किसानों को ऐसी किस्मों का चयन करना चाहिए जो रोगमुक्त हों और जिनमें संक्रमण का कोई खतरा न हो। खेती के लिए लोकप्रिय और अधिक उपज देने वाली प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं:

  • श्वेता और इलाहाबादी
  • सफेदा और ललित
  • आर्का और मृदुला

ये सभी किस्में देश के विभिन्न हिस्सों की जलवायु के अनुकूल हैं और इनमें लगने वाले फलों का स्वाद और आकार भी काफी बढ़िया होता है। यदि पौधों में शुरुआत से ही किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होगा, तो उनकी बढ़वार बहुत तेजी से होगी और फल भी उच्च श्रेणी के मिलेंगे।

सघन बागवानी तकनीक से पाएं बंपर मुनाफा

आजकल कम जगह में अधिक मुनाफा कमाने के लिए सघन बागवानी का चलन काफी बढ़ गया है। अमरूद की खेती में भी इस तकनीक का इस्तेमाल करके किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। सघन बागवानी के तहत पौधों की रोपाई 3×2 मीटर की दूरी पर की जाती है। इस दूरी के अनुसार खेती करने पर एक हेक्टेयर के दायरे में लगभग 1666 पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं। इस आधुनिक विधि से बागवानी करने पर कम क्षेत्र में भी अधिक संख्या में पेड़ों का प्रबंधन किया जा सकता है, जिससे अंततः फल का उत्पादन और किसानों का मुनाफा काफी बढ़ जाता है।

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