कच्चे आम से घर पर पारंपरिक तरीके से बनाएं अमचूर, सब्जियों और चटनी का स्वाद हो जाएगा दोगुना; जानें आसान विधि

घर पर आसानी से शुद्ध अमचूर बनाने के लिए कच्चे आमों का सही चुनाव और सुखाने का पारंपरिक तरीका बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

भारतीय रसोई में खटास के लिए अमचूर का एक विशेष स्थान है। दाल हो, सूखी सब्जी हो या फिर चटपटी चटनी, अमचूर हर व्यंजन का स्वाद बढ़ाने में जादुई काम करता है। वैसे तो बाजार में पिसा हुआ अमचूर आसानी से मिल जाता है, लेकिन घर पर बने शुद्ध अमचूर की खुशबू और स्वाद की बात ही कुछ और होती है। पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक तरीके से घर पर ही अमचूर तैयार किया जाता है। कुशल गृहणी गीता रावल ने इस पारंपरिक विधि के कुछ बेहद आसान और प्रभावी टिप्स साझा किए हैं, जिससे आप घर पर ही महीनों तक चलने वाला उत्तम अमचूर तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कच्चे आम से अमचूर बनाने का सबसे सरल और बेहतरीन तरीका क्या है।

सही कच्चे आमों का चयन है सबसे पहला कदम

अमचूर बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव सही आमों का चुनाव करना है। कुशल गृहणी गीता रावल का मानना है कि अमचूर तैयार करने के लिए पूरी तरह पके या बड़े आकार के आमों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, पेड़ पर लगे लगभग 20 से 30 दिन के छोटे कच्चे आम इस काम के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इस शुरुआती अवस्था में आम का गूदा काफी सख्त होता है और उसमें एक प्राकृतिक, तीखी खटास होती है। यही खट्टापन आगे चलकर अमचूर को उसका असली और लाजवाब स्वाद देता है। यदि आप बहुत बड़े या हल्के पके आमों का उपयोग करेंगे, तो सुखाने के बाद उनका परिणाम उतना अच्छा नहीं मिलेगा और खटास भी कम हो जाएगी।

सफाई और सुखाने की शुरुआती तैयारी है बेहद जरूरी

आम का चुनाव करने के बाद अगला कदम उनकी पूरी तरह से सफाई करना है। अक्सर पेड़ से गिरे हुए कच्चे आमों में मिट्टी, धूल या पेड़ों का चिपचिपा पदार्थ लगा रहता है। इसलिए, इन्हें साफ और ठंडे पानी से कम से कम तीन से चार बार अच्छी तरह धोना आवश्यक है। धोने के बाद आमों को किसी सूती कपड़े पर फैलाकर उनका अतिरिक्त पानी पूरी तरह से सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि काटने से पहले आमों की सतह पर बिल्कुल भी पानी न बचा हो। ग्रामीण क्षेत्रों में इस चरण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यदि आमों में थोड़ी भी बाहरी नमी रह जाती है, तो सुखाते समय उनमें फफूंदी लगने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे पूरी मेहनत खराब हो सकती है।

गुठली के साथ काटने की अनोखी पारंपरिक कला

जब कच्चे आम पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें काटने की बारी आती है। अमचूर बनाने के लिए आमों को गोल काटने के बजाय लंबे टुकड़ों में काटा जाता है। इस विधि की एक खास विशेषता यह है कि आमों को उनकी गुठली समेत ही काटा जाता है। गुठली के साथ काटने से सुखाने की पूरी प्रक्रिया के दौरान आम का प्राकृतिक स्वाद, उसकी बनावट और सुवास पूरी तरह सुरक्षित रहती है। उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी अधिकांश परिवार इस काम को चाकू या पारंपरिक दराती की मदद से हाथों से करना पसंद करते हैं। इस तरह कटे हुए टुकड़ों को एक बड़े और साफ बर्तन में इकट्ठा कर लिया जाता है।

हल्दी और नमक का लेप तथा तेज धूप में सुखाने की विधि

कटे हुए आम के टुकड़ों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उनका स्वाद बढ़ाने के लिए उन पर हल्दी और नमक का लेप लगाया जाता है। हालांकि, कुछ लोग बिना हल्दी और नमक के सीधे साधारण तरीके से भी आम के टुकड़ों को सुखाते हैं, लेकिन हल्दी और नमक लगाने से अमचूर की शेल्फ लाइफ काफी बढ़ जाती है और उसमें कीड़े या फफूंदी लगने का खतरा न के बराबर हो जाता है। लेप लगाने के बाद इन टुकड़ों को किसी साफ सूती कपड़े या फिर बांस की बनी पारंपरिक टोकरी पर फैला दिया जाता है। इसके बाद इन्हें बेहद तेज धूप में सूखने के लिए रख दिया जाता है। धूप में सुखाने के दौरान टुकड़ों को दिन में दो से तीन बार ऊपर नीचे पलटना जरूरी होता है ताकि धूप सभी हिस्सों पर समान रूप से लग सके।

धूप में सुखाने की अवधि और कड़कपन की पहचान

अमचूर को पूरी तरह से तैयार होने में मौसम और धूप की तीव्रता के हिसाब से लगभग एक सप्ताह यानी सात दिनों का समय लग जाता है। यदि आसमान बिल्कुल साफ हो और धूप तेज खिली हो, तो आम के टुकड़े तेजी से सूखते हैं। अच्छी तरह सूखने के बाद ये टुकड़े एकदम कड़क हो जाते हैं और हाथ से दबाने पर आसानी से टूट जाते हैं। यही कड़कपन इस बात का प्रमाण है कि आपका अमचूर अब पूरी तरह तैयार है। यदि इन टुकड़ों के भीतर जरा सी भी नमी या गीलापन रह जाएगा, तो भंडारण के दौरान ये काले पड़ सकते हैं या इनमें फफूंदी लग सकती है। इसलिए ग्रामीण पूरी तसल्ली होने तक इन्हें कड़ी धूप दिखाते हैं।

भंडारण के पारंपरिक और सुरक्षित तरीके

जब आम के टुकड़े पूरी तरह सूखकर तैयार हो जाएं, तो उन्हें स्टोर करने का तरीका भी बहुत मायने रखता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी सूती थैलियों या बारीक जालीदार कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। सूखे अमचूर को जालीदार कपड़े में बांधकर रखने से हवा का आवागमन बना रहता है, जिससे किसी भी प्रकार की नमी जमा नहीं हो पाती। इसके अलावा, कई घरों में इसे हवा बंद कांच के जार या स्टील के साफ डिब्बों में भी रखा जाता है। यदि भंडारण का तरीका सही हो, तो यह अमचूर कई महीनों तक, यहाँ तक कि सालभर से अधिक समय तक बिल्कुल ताजा बना रहता है और इसकी खुशबू व खटास में कोई कमी नहीं आती।

अमचूर का लाजवाब उपयोग: चटनी और खट्टा अचार

तैयार अमचूर का उपयोग करने का तरीका भी बेहद सरल और स्वादिष्ट है। जब भी आपको अमचूर का इस्तेमाल करना हो, तो इसकी चार से पांच फांकों यानी टुकड़ों को लेकर लगभग एक घंटे पहले साफ पानी में भीगोकर रख दें। पानी में रहने से ये टुकड़े दोबारा से नरम और फूले हुए हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें पारंपरिक सिलबट्टे पर या मिक्सर ग्राइंडर में पीसा जाता है। इसमें स्वादानुसार नमक, हरी मिर्च, लहसुन की कलियां, हरा धनिया और पुदीना मिलाकर बेहद स्वादिष्ट और खट्टी चटनी तैयार की जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में इस चटनी को मुख्य भोजन के साथ बड़े चाव से परोसा जाता है। इसके अलावा, इन्हीं भीगे हुए टुकड़ों में विभिन्न मसाले मिलाकर स्वादिष्ट खट्टा अचार भी तैयार किया जाता है।

पहाड़ी खाद्य संस्कृति और पोषण का आधार

अमचूर केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला एक मसाला मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे देश, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों की समृद्ध खाद्य संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। कच्चे आम में प्राकृतिक रूप से भरपूर मात्रा में विटामिन सी और कई तरह के महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि, धूप में सुखाने की लंबी प्रक्रिया के कारण इन पोषक तत्वों की मात्रा में थोड़ी कमी जरूर आती है, लेकिन फिर भी इसका औषधीय और पाचक महत्व बना रहता है। दालों, सब्जियों, चटनियों और रसेदार व्यंजनों में खट्टापन लाने के लिए अमचूर का इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट विकल्प के रूप में किया जाता रहा है।

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