दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की तैयारी? सब्सिडी का पैसा पाने के लिए इन 5 आसान कदमों को उठाना है जरूरी

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के तहत मिलने वाली सब्सिडी और टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए खरीदारों को एक तय समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, ऐसा न करने पर प्रोत्साहन राशि अटक सकती है।

दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ अब इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में भी एक बड़ा हब बनने की ओर अग्रसर है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर लगाम कसने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपनी नई दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026 (Delhi EV Policy 2026) को पूरी तरह से लागू कर दिया है। सरकार की इस नई नीति का मुख्य आकर्षण ग्राहकों को मिलने वाली भारी सब्सिडी, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में शत-प्रतिशत छूट, और पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में देने पर मिलने वाला आकर्षक स्क्रैपेज इंसेंटिव है। हालांकि, इन सभी सरकारी योजनाओं और आर्थिक लाभों का सीधा फायदा उठाना अब उतना आसान नहीं रह गया है जितना पहले हुआ करता था। नई नियमावली के तहत, वाहन खरीदने के बाद ग्राहकों को कुछ जरूरी ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करना होगा, अन्यथा आपकी जेब में आने वाली सब्सिडी की बड़ी रकम बीच में ही लटक सकती है।

दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026: क्या हैं बड़े लक्ष्य और निवेश?

दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई यह महत्वाकांक्षी नीति इस महीने से पूरी तरह प्रभावी हो चुकी है और यह मार्च 2030 तक जारी रहेगी। इस व्यापक योजना को अमलीजामा पहनाकर हकीकत में बदलने के लिए सरकार ने लगभग ₹15,000 करोड़ के विशाल बजट का प्रावधान किया है। इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के कोने-कोने में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके तहत शहर में 30,000 से अधिक नए EV चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित किए जाएंगे।

इस नई नीति का दीर्घकालिक लक्ष्य दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले वाहनों को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त बनाना है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2027 तक दिल्ली में होने वाले कुल वाहन रजिस्ट्रेशन में से 95 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की ही हो। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2028 से दिल्ली में पेट्रोल और CNG से चलने वाले नए दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह से रोक लगाने की भी तैयारी है। इस व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार ने सीधे बैंक खाते में पैसे भेजने यानी डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) का सहारा लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि नई गाड़ी खरीदने के बाद आपको किन पांच कदमों का विशेष ध्यान रखना होगा।

पहला कदम: केवल मान्यता प्राप्त मॉडल का ही करें चयन

यदि आप नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने का मन बना चुके हैं, तो शोरूम जाने से पहले और बुकिंग के समय ही सबसे पहला काम यह करें कि डीलर से पूरी जानकारी मांगें। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जो इलेक्ट्रिक मॉडल आप पसंद कर रहे हैं, उसे दिल्ली सरकार की 'मॉडल अप्रूवल कमेटी' द्वारा हरी झंडी मिली हुई है या नहीं। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीलरों के लिए यह बेहद अनिवार्य किया गया है कि वे बुकिंग के समय ही ग्राहक को इस बात की स्पष्ट जानकारी दें कि गाड़ी पर सब्सिडी मिलेगी या नहीं। एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह यह कि सरकारी नियमों के तहत केवल 'प्योर इलेक्ट्रिक' यानी पूर्णतः बैटरी से चलने वाले वाहनों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा। यदि आप हाइब्रिड तकनीक वाला वाहन खरीद रहे हैं, तो आपको इस पॉलिसी के तहत कोई वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा।

दूसरा कदम: गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC जनरेट कराना

पसंद की गाड़ी खरीदने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण परिवहन विभाग के माध्यम से उसका पंजीकरण कराने का होता है। दिल्ली में इलेक्ट्रिक कार अथवा दोपहिया वाहन खरीदते समय ग्राहकों को सबसे बड़ी राहत यहीं मिल जाती है, क्योंकि उन्हें रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क के रूप में एक भी पैसा नहीं देना होता है और उन्हें सीधे 100% की छूट मिल जाती है। जैसे ही आपके नए वाहन का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC डिजिटल माध्यम से जनरेट हो जाता है, वैसे ही आपकी उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। सरकार ने सब्सिडी के लिए आवेदन करने की एक सख्त समय-सीमा तय कर रखी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

तीसरा कदम: 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक

पहले की नीतियों में जहां डीलर ही ग्राहकों की ओर से सब्सिडी का सारा फॉर्म भर दिया करते थे, वहीं इस बार नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह पूरी जिम्मेदारी खुद गाड़ी के मालिक की होगी। वाहन का RC जनरेट होने के ठीक 30 दिनों के भीतर आपको दिल्ली सरकार के विशेष रूप से तैयार किए गए नए ईवी इंसेंटिव पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। यदि आप इन 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर पोर्टल पर खुद को पंजीकृत करने से चूक जाते हैं, तो आपकी सब्सिडी की अर्जी खारिज हो सकती है और आपको मिलने वाला पैसा हमेशा के लिए अटक सकता है।

चौथा कदम: दस्तावेज और स्क्रैपेज सर्टिफिकेट को सही ढंग से अपलोड करना

पोर्टल पर सफलतापूर्वक लॉग-इन करने के बाद, आपको अपनी गाड़ी से जुड़ी तमाम आवश्यक जानकारियों को दर्ज करना होगा, जिसमें आपकी गाड़ी का RC नंबर और चेसिस नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। इसके बाद आपको निम्नलिखित आवश्यक दस्तावेज बेहद सावधानी से अपलोड करने होंगे:

  • गाड़ी के मालिक का वैध आधार कार्ड
  • बैंक खाते का विवरण (इसके लिए आप कैंसिल्ड चेक या पासबुक के पहले पन्ने की स्पष्ट फोटो अपलोड कर सकते हैं)
  • यदि आपके पास कोई पुरानी BS-IV या उससे भी अधिक पुरानी गाड़ी थी और आपने नई ईवी खरीदने से पहले उसे स्क्रैप करवाया है, तो आपको मिलने वाले ₹1 लाख तक के स्क्रैपेज इंसेंटिव को पाने के लिए एक वैध 'स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट' भी यहां अपलोड करना होगा।

पांचवां कदम: सत्यापन और सीधे बैंक खाते में भुगतान

आपके द्वारा पोर्टल पर आवेदन जमा करने के बाद सरकार की ओर से सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होती है। दिल्ली का परिवहन विभाग और पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) मिलकर आपके द्वारा दी गई जानकारियों और बैंक विवरण की गहनता से जांच करेंगे। चूंकि यह पूरी प्रणाली पूरी तरह से ऑनलाइन और अत्यधिक पारदर्शी बनाई गई है, इसलिए इसमें किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं के बराबर है। यदि आपके द्वारा अपलोड किए गए सभी कागजात और विवरण बिल्कुल सही और वैध पाए जाते हैं, तो आपके आवेदन जमा करने की तारीख से ठीक 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की पूरी राशि सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए भेज दी जाएगी।

लॉक-इन पीरियड: अगले 3 साल तक नहीं ले सकेंगे एनओसी

अगर आप इस योजना का लाभ उठाकर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने जा रहे हैं, तो दिल्ली सरकार की इस विशेष शर्त को भी अच्छी तरह समझ लें। दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026 के अंतर्गत किसी भी तरह का वित्तीय प्रोत्साहन या सब्सिडी का लाभ उठाने के बाद, आप गाड़ी की खरीद की तारीख से लेकर अगले 3 साल तक उस वाहन को दिल्ली से बाहर ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। न ही आप इस वाहन को किसी अन्य राज्य में दोबारा पंजीकृत कराने के लिए परिवहन विभाग से 'नो ऑब्जेक्टशन सर्टिफिकेट' (NOC) हासिल कर सकेंगे। सरकार ने इस नीति का दुरुपयोग रोकने के लिए इसमें 3 साल का कड़ा लॉक-इन पीरियड लागू किया है ताकि दिल्ली के करदाताओं के पैसे से दी जा रही सब्सिडी का लाभ वास्तव में दिल्ली की ही आबोहवा को सुधारने में काम आ सके।

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