देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी अब मेटल सेक्टर में एक बहुत बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदाणी समूह अबू धाबी की प्रसिद्ध निवेश कंपनी इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) के साथ मिलकर भारत में एक विशाल एल्युमीनियम प्रोजेक्ट लगाने पर विचार कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जा सकता है। इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने से भारतीय एल्युमीनियम बाजार में अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता और आदित्य बिड़ला समूह की हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के वर्चस्व को सीधे तौर पर बड़ी चुनौती मिलेगी।
ओडिशा में स्थापित होगा एकीकृत प्लांट
इस प्रस्तावित परियोजना को ओडिशा में स्थापित करने की योजना है। इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 20 लाख टन (2 मिलियन टन) से अधिक होने का अनुमान है। यह एक पूरी तरह से एकीकृत (इंटीग्रेटेड) इकाई होगी, जिसमें एल्युमीनियम रिफाइनिंग और स्मेल्टिंग दोनों तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगी। इसके अतिरिक्त, इस बड़े प्रोजेक्ट की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए एक कैप्टिव पावर प्लांट भी बनाया जाएगा, ताकि बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए और उत्पादन निर्बाध रूप से जारी रह सके।
वेदांता और हिंडाल्को के लिए खड़ी होगी बड़ी चुनौती
वर्तमान समय में भारत के एल्युमीनियम बाजार पर मुख्य रूप से वेदांता एल्युमीनियम और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों का नियंत्रण है। अदाणी समूह की इस क्षेत्र में जोरदार एंट्री से बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी रोमांचक और कड़ी हो जाएगी। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए प्लांट के शुरू होने से भारत की कुल एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है。
प्रोजेक्ट के लिए ओडिशा को चुनने की मुख्य वजह
इस विशाल परियोजना के लिए ओडिशा राज्य को चुनने के पीछे कई महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत के कुल बॉक्साइट भंडार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले ओडिशा में ही मौजूद है। बॉक्साइट एल्युमीनियम बनाने के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल होता है। इसके अलावा, ओडिशा में ही अदाणी समूह का अपना धामरा पोर्ट भी स्थित है। इस बंदरगाह की नजदीकी के कारण कच्चे माल को लाने और तैयार एल्युमीनियम को विदेशों में निर्यात करने में काफी आसानी होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स यानी परिवहन पर आने वाला खर्च बहुत कम हो जाएगा।
भारत में एल्युमीनियम की मांग में तेज उछाल
भारत फिलहाल वैश्विक स्तर पर चीन के बाद एल्युमीनियम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कुल 4.2 मिलियन टन एल्युमीनियम का उत्पादन हुआ था, जबकि घरेलू स्तर पर इसकी मांग और खपत 5.5 मिलियन टन दर्ज की गई थी। बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रेलवे और निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेजी आने से आने वाले समय में एल्युमीनियम की मांग बहुत तेजी से बढ़ने वाली है। अनुमानों के मुताबिक:
- वर्ष 2030 तक भारत में एल्युमीनियम की मांग बढ़कर 8.5 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।
- वर्ष 2040 तक यह खपत बढ़कर 18 मिलियन टन होने का अनुमान है।
- वर्ष 2047 तक देश की एल्युमीनियम की आवश्यकता 28 मिलियन टन के विशाल स्तर को छू सकती है।
मेटल सेक्टर में अदाणी समूह का बढ़ता दबदबा
मेटल सेक्टर में अपनी धाक जमाने की दिशा में अदाणी समूह का यह दूसरा सबसे बड़ा कदम होगा। इससे पहले समूह ने गुजरात के मुंद्रा में एक विशाल कॉपर (तांबा) स्मेल्टर प्लांट की शुरुआत की थी। माना जा रहा है कि अदाणी समूह अपने विविध ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग व्यवसायों के लिए कच्चे माल की एक सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति श्रृंखला बनाना चाहता है। यदि इस नए मेगा प्रोजेक्ट को सभी आवश्यक मंजूरी मिल जाती है, तो देश के एल्युमीनियम उद्योग में विकास और प्रतिस्पर्धा का एक नया अध्याय शुरू होना तय है।
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