मध्य प्रदेश के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी गई है। मेघालय सरकार ने सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर की है। देश की सबसे बड़ी अदालत इस संवेदनशील याचिका पर कल यानी शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है।
इस कानूनी मामले में तेजी तब आई जब मेघालय सरकार की ओर से पैरवी कर रहे देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस याचिका पर जल्द सुनवाई करने की मांग रखी। उन्होंने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए अदालत से इसे जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। सॉलिसिटर जनरल की इस त्वरित मांग को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। मेघालय सरकार ने अपनी इस याचिका में मेघालय हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसके तहत आरोपी को राहत मिली थी।
पीड़ित परिवार ने भी न्याय के लिए उठाया कदम
राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के बाद पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश है। जमानत के विरोध में अब केवल सरकार ही नहीं, बल्कि मृतक राजा रघुवंशी का परिवार भी सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने इस संबंध में स्पष्ट घोषणा की है कि वे सोनम की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्वतंत्र याचिका दायर करेंगे। विपिन रघुवंशी का कहना है कि उनका परिवार अब न्याय की इस लड़ाई को अपने दम पर लड़ेगा और इसके लिए उन्होंने एक निजी वकील की सेवाएं भी ली हैं ताकि अदालत में उनका पक्ष मजबूती से रखा जा सके।
पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली और अभियोजन पक्ष की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने अभियोजन पक्ष के काम करने के तरीके को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यह बात समझ से परे है कि मेघालय पुलिस ने सोनम रघुवंशी को गिरफ्तार करते समय कानूनी प्रक्रिया का सही पालन क्यों नहीं किया। विपिन रघुवंशी के अनुसार, गिरफ्तारी के समय सोनम को उसकी गिरफ्तारी के ठोस और स्पष्ट कारणों यानी 'ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट' के बारे में ठीक से सूचित क्यों नहीं किया गया, जिसके चलते आरोपी को कानूनी लाभ मिल गया।
मेघालय हाईकोर्ट की पुलिस कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी
कुछ समय पहले मेघालय हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की पूरी कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर और तल्ख टिप्पणियां की थीं। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि जिस तरीके से सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी के आधार पेश किए गए, उससे साफ तौर पर झलकता है कि गिरफ्तारी करने वाली जांच एजेंसी ने अपनी न्यायिक सोच और सूझबूझ का उचित उपयोग नहीं किया। अदालत ने प्रथमदृष्टया यह माना कि गिरफ्तारी के वक्त सोनम को प्रभावी तरीके से गिरफ्तारी के असली आधार और कारण नहीं बताए गए थे।
निचली अदालत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में होगी कानूनी जंग
गिरफ्तारी की इसी तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामी को आधार बनाते हुए मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। ज्ञात हो कि निचली अदालत ने 27 अप्रैल को मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट से सरकार की याचिका खारिज होने के बाद अब मेघालय सरकार और राजा रघुवंशी का परिवार दोनों ही सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं। अब सबकी निगाहें कल यानी शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस जमानत को रद्द करता है या हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है।
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