भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह खेती-बाड़ी पर निर्भर है। बदलते वक्त के साथ कृषि के तौर-तरीकों में भी काफी आधुनिक बदलाव आए हैं। अब किसान पारंपरिक फसलों के अलावा सब्जियों, फलों और औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार कर व्यावसायिक रूप से बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। बिहार के ग्रामीण इलाकों में भी अब यह आधुनिक खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
सब्जियों की नर्सरी तैयार करना एक बेहद फायदेमंद व्यवसाय है। अगर किसान भाई सही तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करें, तो बेहद कम समय में स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को बारीक से समझने के लिए हमारी टीम ने बिहार के जहानाबाद जिला अंतर्गत घोसी प्रखंड में स्थित सरकारी नर्सरी का दौरा किया। वहां पिछले एक साल से विभिन्न प्रकार के पौधों की नर्सरी तैयार कर रहे अनुभवी किसान सुरेंद्र शर्मा ने नर्सरी का बेड तैयार करने की पूरी तकनीक साझा की है।
नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे पहले समझें मौसम का गणित
किसान सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि सब्जियों की नर्सरी तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मौसम की होती है। किसानों को हमेशा सीजन यानी मौसम के अनुकूल ही सब्जियों का चयन करना चाहिए। समय के अनुसार लगाई गई फसलों की बाजार में मांग अधिक होती है, जिससे किसानों को उनके उत्पादों की बहुत अच्छी कीमत मिल जाती है।
ऐसे करें नर्सरी के लिए भूमि की तैयारी
नर्सरी बेड बनाने के लिए सबसे पहले उस स्थान का चयन करें जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो। इसके बाद निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- चयनित स्थान की मिट्टी की अच्छी तरह से कोड़ाई या गोड़ाई कर लें।
- गोड़ाई करने के बाद उस स्थान से मिट्टी को हटाकर कुछ दिनों के लिए अलग रख दें।
- इससे उस खाली स्थान पर सूर्य का प्रकाश सीधे और बराबर मात्रा में पड़ेगा।
- तेज धूप लगने से मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीड़े-मकोड़े, फंगस और बैक्टीरिया पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे, जिससे आने वाले पौधों में बीमारियों का खतरा न के बराबर रहेगा।
खाद का सही अनुपात और बीजों की बुआई
धूप दिखाने के बाद हटाई गई मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए मिट्टी में उपयुक्त पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। सुरेंद्र शर्मा के अनुसार, मिट्टी को तैयार करते समय रासायनिक खाद के तौर पर DAP और पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है।
खाद मिलाने का सही गणित इस प्रकार है:
- एक कट्ठा जमीन के हिसाब से लगभग 2 से 2.5 किलोग्राम तक इस मिश्रित खाद की आवश्यकता होती है।
- इस खाद को अलग रखी गई मिट्टी में अच्छी तरह से मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें।
- मिट्टी तैयार होने के बाद बीजों को उसमें डालें और प्लास्टिक ट्यूब या क्यारियों में भरकर व्यवस्थित कर दें।
सिंचाई और पौधों की धूप से सुरक्षा
बीजारोपण के बाद सबसे जरूरी काम पौधों की सही देखभाल और सिंचाई का होता है। शुरुआत में जब तक बीजों में अंकुरण न हो जाए, तब तक सीधे पानी डालने के बजाय स्प्रिंकलर (फव्वारा विधि) के जरिए ही हल्की सिंचाई करें। सीधी धार से पानी देने पर बीजों के बहने या मिट्टी में दबने का खतरा रहता है।
एक बार जब पौधा मिट्टी से बाहर निकल आए, तो नियमित रूप से पानी का पटवन किया जा सकता है। इसके साथ ही एक बात का विशेष ध्यान रखें कि छोटे पौधों पर सूर्य की सीधी और तेज किरणें न पड़ें। इन्हें तेज धूप से बचाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए आप क्यारियों के ऊपर हरे रंग की नेट (ग्रीन नेट) का इस्तेमाल जरूर करें।
मात्र 15 से 20 दिनों में बिकने के लिए तैयार होंगे पौधे
अनुभवी किसान सुरेंद्र शर्मा का दावा है कि अगर इन सभी वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों को सही ढंग से अपनाया जाए, तो बुआई के महज 8 दिनों के भीतर ही बीजों में शानदार अंकुरण दिखने लगता है। इसके बाद अगले 15 से 20 दिनों में आपके सब्जी के पौधे पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे, जिन्हें आप मुख्य खेत में रोप सकते हैं या फिर बाजार में बेचने के लिए भेज सकते हैं।
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