मालदा SIR हिंसा: NIA की कार्रवाई तेज, मौलाना इमरान अली और रिंकू एसके गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR अभियान के दौरान हुई हिंसा के मामलों में NIA ने दो और आरोपियों मौलाना इमरान अली और रिंकू एसके को गिरफ्तार किया है। दोनों पर न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और पुलिसकर्मियों पर हमले समेत कई गंभीर आरोप हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR अभियान के दौरान भड़की हिंसा के मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। एजेंसी ने इस सिलसिले में अब दो और लोगों को हिरासत में लिया है। इन पर न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, नेशनल हाईवे जाम करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। NIA के मुताबिक दोनों आरोपी उस हिंसक भीड़ का सक्रिय हिस्सा थे, जिसने इलाके में उपद्रव मचाया था।

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी कौन हैं

NIA ने मालदा में Special Intensive Revision से जुड़ी हिंसा और विरोध प्रदर्शन के दो अलग-अलग मामलों में दो आरोपियों को दबोचा है। इनकी पहचान मौलाना इमरान अली और रिंकू एसके के रूप में हुई है। दोनों पर न्यायिक अधिकारियों को अवैध तरीके से बंधक बनाने, नेशनल हाईवे जाम करने, कानून-व्यवस्था में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप हैं।

मालदा हिंसा से जुड़े कुल 12 मामले दर्ज

ये सभी घटनाएं मालदा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान के दौरान सामने आई थीं। इस हिंसा को लेकर NIA ने अब तक कुल 12 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 4 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

हिंसक भीड़ का सक्रिय हिस्सा थे इमरान और रिंकू

फिलहाल मालदा हिंसा से संबंधित मामलों में 35 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इमरान और रिंकू हिंसक भीड़ का सक्रिय हिस्सा थे और दोनों ने प्रदर्शनों के बीच हिंसा फैलाने, डराने-धमकाने तथा सरकारी कामकाज में अड़चन पैदा करने में भूमिका निभाई।

पुलिस बस का चालक पत्थर लगने से घायल हुआ था

आरोप है कि दोनों कानून-व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में भी शामिल रहे। एक हमले के दौरान पत्थर लगने से पुलिस बस का ड्राइवर गंभीर रूप से जख्मी हो गया था और बस पर से उसका नियंत्रण छूट गया था। NIA ने तलाशी अभियान के दौरान इन दोनों को गिरफ्तार किया।

आखिर SIR क्या है

निर्वाचन आयोग की ओर से चलाया जा रहा Special Intensive Revision एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज फर्जी वोटर, डुप्लिकेट वोटर और मृत हो चुके लोगों के नाम हटाए जाते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं।

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