धान की रोपाई करते समय न करें ये गलतियां, कृषि विशेषज्ञ से जानिए बंपर पैदावार पाने के बेहतरीन उपाय

खरीफ सीजन में धान की रोपाई के दौरान खेत की तैयारी, पानी के प्रबंधन और सही समय पर नर्सरी से पौधे निकालने जैसे महत्वपूर्ण सुझावों को अपनाकर किसान अपनी फसल की पैदावार बढ़ा सकते हैं।

खरीफ का मौसम आते ही देश भर के किसानों के लिए धान की रोपाई का काम सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। यह एक ऐसा समय होता है जब किसानों की थोड़ी सी मेहनत और सही तकनीक उनकी पूरी साल की कमाई तय करती है। इसके विपरीत, इस दौरान की गई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरी की पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरपाल सिंह ने किसानों को धान की रोपाई से जुड़ी कुछ बेहद महत्वपूर्ण सावधानियां और व्यावहारिक उपाय बताए हैं। इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि धान की बंपर पैदावार भी हासिल कर सकते हैं।

खेत की जुताई और समतलीकरण है पहला कदम

डॉ. हरपाल सिंह के अनुसार, धान की रोपाई की सफलता की शुरुआत खेत की तैयारी से होती है। किसानों को रोपाई शुरू करने से पहले अपने खेतों की अच्छी तरह से गहरी जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद खेत का समतलीकरण करना सबसे अनिवार्य काम है। अगर खेत पूरी तरह से समतल नहीं होगा, तो पानी का वितरण असमान रहेगा। ऊंचे स्थानों पर पानी नहीं पहुंचेगा जिससे वहां के पौधे सूख सकते हैं, जबकि निचले हिस्सों में अधिक पानी जमा होने से पौधे सड़ सकते हैं। समतल खेत में पानी का स्तर हर जगह एक समान रहता है, जिससे सभी पौधों को बराबर पोषण मिलता है और उनकी बढ़वार तेजी से और एक समान होती है।

खेत में पानी का सही संतुलन रखना बेहद जरूरी

धान की खेती के लिए पानी को सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है, लेकिन इसकी मात्रा को लेकर अक्सर किसान गलती कर बैठते हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरपाल सिंह बताते हैं कि रोपाई के समय खेत में पानी की मात्रा बिल्कुल संतुलित होनी चाहिए। न तो खेत में बहुत ज्यादा पानी भरा होना चाहिए और न ही मिट्टी सूखी होनी चाहिए। अगर रोपाई के समय खेत में पानी की मात्रा आवश्यकता से अधिक होगी, तो मुख्य पौधों को ऑक्सीजन मिलने में दिक्कत होगी और वे गल सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, यदि खेत में पानी कम हुआ या सूखा रहा, तो पौधों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से नहीं पकड़ पाएंगी। इसलिए पानी का सही प्रबंधन फसल की शुरुआती मजबूती के लिए बेहद आवश्यक है.

रोपाई के समय का गणित: जितने महीने की किस्म, उतने ही सप्ताह की नर्सरी

धान की रोपाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय की होती है। नर्सरी से पौधों को निकालकर मुख्य खेत में कब लगाना है, इसके लिए डॉ. हरपाल सिंह ने एक बहुत ही सरल और सटीक वैज्ञानिक नियम साझा किया है। उनका कहना है कि धान की फसल की जो किस्म जितने महीने में पककर तैयार होती है, ठीक उतने ही सप्ताह बाद उसकी नर्सरी से पौधों की रोपाई कर देनी चाहिए।

  • यदि आपकी धान की किस्म 3 महीने में पककर तैयार होने वाली है, तो नर्सरी डालने के ठीक 3 सप्ताह बाद ही उसकी रोपाई कर दें।
  • यदि किस्म 4 महीने में पकती है, तो 4 सप्ताह पुरानी नर्सरी के पौधों का उपयोग करें।

इस नियम का पालन करने से पौधे बहुत जल्दी और आसानी से मिट्टी में अपनी जड़ें जमा लेते हैं। इससे पौधों की बढ़वार बहुत अच्छी होती है और अंततः फसल की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। यदि पौधे नर्सरी में बहुत अधिक दिनों तक रह जाते हैं, तो उनकी कल्ले फूटने की क्षमता कम हो जाती है जिससे उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।

स्वस्थ पौधों का चयन और खरपतवार नियंत्रण

डॉ. हरपाल सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि रोपाई के लिए हमेशा स्वस्थ और हरे-भरे पौधों का ही चयन करें। कमजोर या पीले पौधे लगाने से फसल की सेहत प्रभावित होती है और वे रोगों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसके अतिरिक्त, रोपाई के बाद खेत की नियमित निगरानी करना आवश्यक है। समय-समय पर पानी के स्तर की जांच के साथ-साथ खरपतवार का नियंत्रण भी बेहद जरूरी है। खरपतवार मुख्य फसल के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे धान की वृद्धि रुक जाती है। कृषि विशेषज्ञ का मानना है कि यदि किसान इन छोटी-छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें तो धान की फसल मजबूत होगी, रोगों का खतरा कम रहेगा और उत्पादन में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

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