मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें: सरकारी जमीनों की आसमान से निगरानी, स्कूलों में मंत्रोच्चार पर घमासान और रेत माफिया पर बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आज प्रशासनिक फैसलों से लेकर अदालती कार्यवाहियों तक कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जानिए दोनों राज्यों की सभी प्रमुख खबरें विस्तार से।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आज प्रशासनिक और कानूनी गतिविधियों का दिन रहा। दोनों राज्यों में जहां एक तरफ प्रशासन सरकारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए हाईटेक प्रणालियों और कड़े नियमों का सहारा ले रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर जन-आंदोलन और धोखाधड़ी के मामले भी सुर्खियों में बने हुए हैं। भोपाल से लेकर बिलासपुर तक, आम जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर प्रशासन और अदालतें सक्रिय हो चुकी हैं। आइए, इन दोनों राज्यों की उन प्रमुख बड़ी खबरों पर विस्तार से नजर डालते हैं, जो सीधे तौर पर शासन, प्रशासन और आम जनता को प्रभावित कर रही हैं।

स्कूलों में ई-अटेंडेंस पर सख्ती: 90% से कम हाजिरी पर शिक्षक होंगे सस्पेंड

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। नए नियमों के अनुसार, जिन शिक्षकों की डिजिटल यानी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम दर्ज की जाएगी, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाएगा। विभाग ने इस कड़े कदम को लागू करने के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इतना ही नहीं, विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाह प्राचार्यों और उच्च अधिकारियों पर भी बड़ी गाज गिर सकती है।

वर्तमान में मध्य प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में लगभग 4.25 लाख शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने 1 जुलाई से सभी शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-अटेंडेंस लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया था। इससे पहले, जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का प्रतिशत 90 से कम था, उन्हें स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन करने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया था। अब वेतन कटौती की चेतावनी के बाद सीधे निलंबन की कार्रवाई की बात सामने आने से शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी है और वे लगातार इस डिजिटल प्रणाली का विरोध कर रहे हैं।

शिक्षक संघों का कहना है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या रहती है, जिसके कारण शिक्षक समय पर अपनी डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाते हैं। इस तकनीकी खामी के कारण शिक्षकों पर वेतन कटौती और निलंबन जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। इसके बावजूद, स्कूल शिक्षा विभाग अपने निर्णय पर अड़ा हुआ है और कड़ाई से इसे लागू कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रपाठ और मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने के विषय पर आज बिलासपुर हाईकोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर न्यायालय का फैसला जल्द ही सामने आ सकता है। दरअसल, छत्तीसगढ़ के स्कूलों में इस धार्मिक गतिविधि को अनिवार्य बनाने के फैसले को "तहफ़्फ़ुज़-ए-नमूस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट" के उपाध्यक्ष और TNRTA से जुड़े आमिर खान ने अदालत में चुनौती दी है।

आमिर खान द्वारा दायर की गई इस याचिका में भारतीय संविधान के बुनियादी अधिकारों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की धार्मिक प्रथाओं को अनिवार्य करना संविधान के नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने अपनी याचिका में निम्नलिखित संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख किया है:

  • अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
  • अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)
  • अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार)
  • अनुच्छेद 28 (शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप)

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ है। बिलासपुर उच्च न्यायालय में दायर की गई इस जनहित याचिका पर आज होने वाली सुनवाई को लेकर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

भोपाल में सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए आसमान से निगरानी, बनेगी हाईटेक व्यवस्था

राजधानी भोपाल और उसके आसपास की बेशकीमती सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं के चंगुल से बचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। जिला प्रशासन अब एक विशेष राजस्व सेल का गठन करने जा रहा है, जो पूरी तरह हाईटेक उपकरणों से लैस होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों और अतिक्रमणों को पूरी तरह से रोकना है।

इस नई प्रणाली के तहत अब सैटेलाइट के लाइव एक्सेस के जरिए सीधे अंतरिक्ष (आसमान) से जमीनों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम के लागू होने से जैसे ही कोई भू-माफिया किसी सरकारी भूखंड पर अवैध निर्माण या कब्जा करने का प्रयास करेगा, उसकी सटीक डिजिटल सूचना तुरंत प्रशासनिक कंट्रोल रूम को मिल जाएगी। इससे त्वरित कार्रवाई कर अतिक्रमण को शुरुआती चरण में ही ध्वस्त करना संभव हो सकेगा।

भोपाल की बेशकीमती जमीनों पर अक्सर भू-माफियाओं की नजर रहती है, जो मौका पाकर रातों-रात अवैध निर्माण खड़ा कर देते हैं। इस समस्या से स्थाई रूप से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने जो राजस्व सेल बनाया है, वह सीधे उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण करेगा। इस प्रणाली में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो जमीन के मूल स्वरूप में जरा सा भी बदलाव होने पर तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेजेगी।

सब्जी व्यापारी से लाखों की धोखाधड़ी: टमाटर मंगाने के नाम पर लगा 14 लाख का चूना

टीकमगढ़ जिले में एक सब्जी व्यापारी के साथ लाखों रुपये की ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पीड़ित व्यापारी अजीम रइन ने बेंगलुरु से टमाटर की खेप मंगाने के लिए एक अन्य कारोबारी को एडवांस के तौर पर भारी भरकम राशि का भुगतान किया था, लेकिन बाद में उन्हें धोखा दे दिया गया।

पीड़ित अजीम ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के मदनपल्ली निवासी व्यापारी महबूब खान को टमाटर भेजने के सौदे के तहत 14 लाख रुपये की अग्रिम राशि (अग्रिम भुगतान) भेजी थी। यह भुगतान मिलने के बाद आरोपी महबूब खान ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया और उससे संपर्क करने के सभी प्रयास विफल रहे। ठगे जाने का अहसास होने पर अजीम ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी की जांच शुरू कर दी है।

टीकमगढ़ जिले में सब्जी और कृषि उपज से जुड़े व्यापार में धोखाधड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बाहरी राज्यों के व्यापारियों द्वारा स्थानीय आढ़तियों और किसानों से अग्रिम राशि लेकर माल न भेजने या भुगतान न करने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने बताया कि मदनपल्ली के आरोपी महबूब खान के खिलाफ मामला दर्ज कर एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है, जो आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास करेगी।

नरसिंहपुर में रेत माफिया पर बड़ा एक्शन, लाखों रुपये की अवैध रेत जब्त

नरसिंहपुर जिले में अवैध खनन और रेत के काले कारोबार में संलिप्त माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों पर राजस्व विभाग, पुलिस और खनिज विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था, जिसने करेली तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरमानकलां में छापेमारी की।

इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान सरकारी जमीन पर अवैध रूप से छुपाकर रखी गई भारी मात्रा में रेत बरामद की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मौके पर लावारिस हालत में लगभग 60 ट्रॉली यानी करीब 180 घनमीटर रेत का अवैध स्टॉक मिला। जब्त की गई इस रेत की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। टीम ने पूरी रेत को अपनी कस्टडी में लेकर उसे स्थानीय ग्राम सचिव और कोटवार की सुपुर्दगी में दे दिया है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अवैध भंडारण का मामला दर्ज किया है और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

बरमानकलां में हुई इस बड़ी छापेमारी से अवैध रेत का कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। नर्मदा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में फैले इस अवैध नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन लगातार मुस्तैद है। जब्त की गई रेत को ग्राम पंचायत की देखरेख में सुरक्षित रखवाया गया है, ताकि उसे बाद में सरकारी नियमों के अनुसार उपयोग में लिया जा सके।

सिंगरौली में दर्दनाक हादसा: पावर ग्रिड टावर का विरोध कर रहे किसान की मौत से तनाव

सिंगरौली जिले के वैढ़न थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम परसदेही में एक बेहद दुखद और तनावपूर्ण घटना सामने आई है, जहां अपने ही खेत में पावर ग्रिड टावर लगाए जाने का विरोध कर रहे एक किसान की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।

मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक किसान अपने खेत में लगाए जा रहे भारी-भरकम लोहे के एंगल को खुद ही हटाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान एक अनियंत्रित लोहे का एंगल उनके शरीर में फंस गया, जिससे वे हवा में उछलकर पास ही खोदे गए गहरे गड्ढे में जा गिरे। सिर और शरीर में गंभीर चोटें आने के कारण किसान की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पावर ग्रिड कंपनी के प्रबंधन पर घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लग रहे हैं।

परिजनों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद कंपनी के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस या ग्रामीणों को सूचित करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की। वे गंभीर रूप से घायल किसान को सीधे एक निजी अस्पताल ले गए ताकि अपनी जवाबदेही से बच सकें। जैसे ही परिजनों को इस बात की भनक लगी, वे भड़क उठे। उनका सीधा आरोप है कि कंपनी प्रबंधन अपनी गलती छिपाने के लिए तथ्यों से छेड़छाड़ कर रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है।

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