बिहार का मान बढ़ाने वाले और बेहद कम उम्र में अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी इन दिनों खेल जगत में लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अपने बेहतरीन और आक्रामक प्रदर्शन के दम पर सुर्खियों में आए वैभव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी चमक बिखेर रहे हैं। लेकिन मैदान पर बड़े-बड़े गेंदबाजों का सामना करने वाले वैभव अपने घर के आंगन में आज भी वही छोटे बच्चे हैं, जो कभी अपनी दादी का हाथ पकड़कर घूमा करते थे। समस्तीपुर में रहने वाले उनके परिवार में इस समय भारी उत्साह का माहौल है, और सबसे ज्यादा खुश हैं उनकी दादी आशा देवी। अपने पोते की इस बड़ी सफलता पर बात करते हुए उनकी दादी भावुक हो गईं और उन्होंने वैभव के बचपन के कई प्यारे और अनसुने किस्से साझा किए।
दादी आशा देवी की नजर में आज भी बच्चे हैं वैभव सूर्यवंशी
दादी आशा देवी का कहना है कि दुनिया के लिए वैभव भले ही एक बड़ा खिलाड़ी और चमकता सितारा बन गया हो, लेकिन उनके लिए वह आज भी उनका वही मासूम पोता ही है। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि वैभव का अपनी दादी के प्रति प्यार आज भी वैसा ही है, जैसा बचपन में हुआ करता था। वैभव आज भी जब खेल के व्यस्त दौरों से समय निकालकर समस्तीपुर में अपने घर वापस आता है, तो वह सबसे पहले अपनी दादी के पास जाकर बैठ जाता है। वह बड़ा क्रिकेटर बनने के बाद भी दादी की गोद में सिर रखकर बैठना पसंद करता है। उनके बीच का यह अपनत्व भरा रिश्ता समय के साथ और अधिक गहरा हुआ है।
बचपन की शरारतें और खेल के प्रति अनोखा जुनून
वैभव के बचपन के दिनों को याद करते हुए आशा देवी के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती है। उन्होंने बताया कि बचपन में वैभव काफी चुलबुले और नटखट स्वभाव का था। वह दिनभर घर में छोटी-मोटी शरारतें करता रहता था, जिसके चलते वह पूरे परिवार का सबसे लाडला और प्यारा सदस्य बन गया था। खेल के प्रति वैभव का लगाव बचपन से ही साफ नजर आता था। दादी ने याद करते हुए बताया कि जब वह बहुत छोटा था, तो घर के पास ही क्रिकेट खेला करता था। वह अपनी छोटी उम्र में भी इतनी ताकत से गेंद फेंकता था कि गेंद बहुत दूर चली जाती थी। आसपास के लोग और पड़ोसी उसकी इस ताकत और खेलने के तरीके को देखकर हैरान रह जाते थे। दादी कहती हैं कि बच्चा था तो शरारत करना उसका हक था, और हर बच्चा अपनी दादी की गोद में खेलकर ही बड़ा होता है।
महज 15 साल की उम्र में हासिल की बड़ी उपलब्धि
वैभव सूर्यवंशी की उम्र अभी केवल 15 साल है, और इस छोटी सी उम्र में ही उन्होंने क्रिकेट जगत में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। वर्तमान में वैभव इंग्लैंड के दौरे पर गए हुए हैं, जहां वे भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जब आशा देवी को अपने पोते के इस विदेशी दौरे और भारतीय टीम में चयन के बारे में पता चला, तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उनके पोते ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे पूरे देश का नाम ऊंचा हो रहा है। जब देश के लोग उनकी सफलता पर खुश हो रहे हैं, तो एक दादी होने के नाते उनका गर्व महसूस करना बेहद स्वाभाविक है।
पढ़ाई के साथ खेल में भी आगे रहे वैभव
अक्सर माना जाता है कि खेल में आगे रहने वाले बच्चे पढ़ाई-लिखाई से दूरी बना लेते हैं, लेकिन वैभव के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं था। उनकी दादी बताती हैं कि वैभव शुरू से ही पढ़ाई में भी काफी होनहार और अच्छा छात्र था। हालांकि, खेल के प्रति उसकी गहरी रुचि को देखते हुए परिवार ने हमेशा उसका भरपूर समर्थन किया। आज जब वैभव का नाम देश-विदेश में गूंज रहा है, तो सूर्यवंशी परिवार को ऐसा महसूस होता है जैसे उनका कोई पुराना सपना सच हो गया हो। एक दादी के चेहरे पर अपने पोते की सफलता को लेकर जो संतोष और खुशी दिखाई देती है, वह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि बच्चों को सही दिशा, कड़ी मेहनत और परिवार का आशीर्वाद मिले, तो वे सफलता की हर ऊंचाई को छू सकते हैं।
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