उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। दिल्ली से सटे नोएडा और गाजियाबाद में सुबह-सुबह आसमान में घने काले बादलों का डेरा जम गया और तेज बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते सुबह के समय ही अंधेरा छा गया, जिससे वाहन चालकों को अपनी गाड़ियां हेडलाइट जलाकर चलानी पड़ीं। मॉनसून की इस दस्तक से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग ने नोएडा और गाजियाबाद के अलावा राज्य के कई अन्य जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी (अलर्ट) जारी की है।
इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के जिन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, उनमें नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, मऊ, गाजीपुर, बलिया, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और सहारनपुर शामिल हैं। मंगलवार को उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद मॉनसून अब तेजी से राज्य के दूसरे हिस्सों की तरफ बढ़ रहा है। बुधवार को यह राज्य के कई नए इलाकों में फैल गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय मिर्ज़ापुर, आज़मगढ़, अयोध्या, बदायूं और मेरठ से होकर गुजर रही है। आने वाले दो दिनों में लखनऊ समेत यूपी के बचे हुए हिस्सों में भी मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने के लिए परिस्थितियां बिल्कुल अनुकूल बनी हुई हैं।
कुछ इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश ने राज्य के तापमान को नियंत्रित किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा बारिश बहराइच में दर्ज की गई, जहां 113 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके अलावा अन्य प्रमुख शहरों का हाल कुछ इस प्रकार रहा:
- बिजनौर में 95 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
- ललितपुर में 93 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
- बुलंदशहर में 72.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
- सोनभद्र में 58 मिलीमीटर पानी बरसा।
मौसम विभाग के अनुसार, इन इलाकों में बारिश के बाद लोगों को लंबे समय से चल रही लू और भीषण उमस से बड़ी राहत मिली है। आसमान में लगातार बादलों की आवाजाही बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का क्या है पूर्वानुमान?
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने मौसम के मिजाज की जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश की इस गतिविधि के कारण दिन के अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी और यह नियंत्रण में रहेगा, हालांकि राज्य के कई हिस्सों में हवा में नमी अधिक होने की वजह से उमस भरा माहौल बना रह सकता है।
राजधानी लखनऊ की बात करें तो वहां दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहे और शहर के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। लखनऊ में अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। वहीं न्यूनतम तापमान 28.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य तापमान से दो डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। शहर की हवा में नमी का स्तर काफी अधिक पाया गया।
जून के महीने में सूखे जैसे हालात: आंकड़ों से समझें कमी
भले ही अब राज्य में बारिश का दौर शुरू हो गया है, लेकिन आंकड़ों की नजर से देखें तो इस साल उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून करीब 12 दिन की देरी से पहुंचा है। इस देरी के कारण जून का पूरा महीना बेहद सूखा और गर्म रहा। जून के दौरान हुई कम बारिश की भारी कमी को पाटने के लिए आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश की सख्त जरूरत होगी। आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 30 जून के बीच राज्य के लगभग 85 फीसदी हिस्से में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट बताती है कि जून के महीने में उत्तर प्रदेश में प्रति जिला औसत बारिश केवल 43.9 मिलीमीटर दर्ज की गई, जो कि सामान्य औसत बारिश 95.9 मिलीमीटर की तुलना में 54 फीसदी कम है। इस भारी गिरावट का मुख्य कारण इस साल प्री-मॉनसून गतिविधियों का न होना और मॉनसून का सामान्य समय से काफी देरी से आना रहा।
पूर्वी और पश्चिमी यूपी में बारिश का गणित
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों ही क्षेत्रों में इस बार बारिश की भारी कमी देखी गई है:
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: इस क्षेत्र में प्रति जिला औसत बारिश मात्र 45.6 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर यहां 108.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह पूर्वी यूपी में सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: इस हिस्से में प्रति जिला औसत बारिश 41.6 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि सामान्य स्तर 78.6 मिलीमीटर का था। इस प्रकार पश्चिमी यूपी में बारिश में 47 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी गई।
जिलेवार विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में से केवल 11 जिलों में ही जून के महीने में सामान्य बारिश हो सकी। इसके विपरीत, 28 जिले ऐसे रहे जहां सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि 35 जिलों में बारिश का आंकड़ा बेहद निराशाजनक रहा और वहां पानी की भारी कमी दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश का कहना है कि जैसे-जैसे मॉनसून पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करेगा, आने वाले हफ्तों में लगातार बारिश होना बहुत आवश्यक होगा। विभाग को पूरी उम्मीद है कि जुलाई महीने में होने वाली अच्छी बारिश जून की इस बड़ी कमी को काफी हद तक पूरा कर देगी।
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