शादी का सपना हर किसी के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन जब इसी सपने की आड़ में कोई जालसाज अपनी साजिश रच दे, तो जीवन भर की जमा-पूंजी पल भर में गायब हो सकती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के पवित्र बंधन का झांसा देकर एक बुजुर्ग से 9.5 लाख रुपये की भारी-भरकम ठगी की गई है। इस पूरी वारदात में ठगों ने जिस शातिराना और अनोखे तरीके का इस्तेमाल किया, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। पीड़ित बुजुर्ग को फंसाने के लिए ठगों ने महिला की आवाज का सहारा लिया और खुद को रेलवे का रिटायर्ड अधिकारी बताया।
मैरिज ब्यूरो के जरिए जाल में फंसाया
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित मनहरण टिकरिहा, जो कि एक रिटायर्ड टेक्निशियन हैं, ने अपनी शादी के लिए दिल्ली के एक मैरिज ब्यूरो में पंजीकरण कराया था। इसी मैरिज ब्यूरो के माध्यम से उनका संपर्क 'रजनी शर्मा' नाम की एक महिला से कराया गया। बातचीत के दौरान उस कथित महिला ने पीड़ित को बताया कि वह मूल रूप से कोरबा की रहने वाली है और रेलवे विभाग से बतौर इंजीनियर सेवानिवृत्त यानी रिटायर्ड हो चुकी है। ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए बड़े ही सलीके से बात करना शुरू किया।
फोन पर बातचीत करने वाली आवाज इतनी सुरीली और वास्तविक महिला जैसी थी कि पीड़ित को जरा भी संदेह नहीं हुआ कि फोन के उस पार कोई पुरुष बैठा है। आरोपी फोन पर लड़की की आवाज निकालकर बात करते थे और मीठी-मीठी बातों से पीड़ित का पूरी तरह से विश्वास जीत लिया।
शादी और इलाज के बहाने ऐंठे लाखों रुपये
एक बार जब पीड़ित मनहरण टिकरिहा का भरोसा पूरी तरह स्थापित हो गया, तो ठगों ने अपने असली रंग दिखाने शुरू कर दिए। रजनी शर्मा बनी उस आवाज ने अलग-अलग पारिवारिक दिक्कतों और निजी समस्याओं का रोना रोना शुरू कर दिया। कभी शादी के खर्च, कभी किसी पारिवारिक कार्यक्रम के आयोजन, तो कभी अचानक हुए एक्सीडेंट और गंभीर बीमारी के इलाज के नाम पर पीड़ित से पैसों की मांग की जाने लगी।
पीड़ित ने भी बिना किसी संदेह के अपने भविष्य की जीवनसंगिनी की मदद करने के इरादे से पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए। यह सिलसिला 15 जून 2025 से शुरू होकर 9 जनवरी 2026 तक लगातार चलता रहा। इस समयावधि के दौरान पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में कुल 9,50,000 रुपये ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में जमा करवा दिए। जब भी मनहरण टिकरिहा ने उस महिला से मिलने की इच्छा जताई, तो वह कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देती थी। आखिरकार जब पैसे मिलने बंद होने के बाद संपर्क टूटने लगा, तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और वह सीधे पुलिस थाने पहुंचे।
पुलिस की मुस्तैदी और उड़ीसा गैंग का भंडाफोड़
पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद रायपुर पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। इस मामले को सुलझाने के लिए आजाद चौक थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सबसे पहले बैंक खातों और मोबाइल नंबर्स के तकनीकी डेटा की जांच शुरू की। सुराग मिलने के बाद पुलिस की टीम उड़ीसा के लिए रवाना हुई और वहां के बलांगीर इलाके से अंतर्राज्यीय गिरोह के तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- जसवंत डूण्डी - मुख्य आरोपी जिससे शुरुआती पूछताछ की गई।
- मनोज राणा - गिरोह का दूसरा सक्रिय सदस्य।
- यश नायक - ठगी की योजना में शामिल तीसरा आरोपी।
तीन मोबाइल फोन जब्त, अन्य साथियों की तलाश
रायपुर पुलिस के हत्थे चढ़े इन आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने सबसे पहले जसवंत डूण्डी को हिरासत में लिया था, जिसने कड़ाई से पूछताछ करने पर कबूल किया कि उसने मनोज राणा और यश नायक के साथ मिलकर इस पूरी ठगी की योजना को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी की वारदात में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस की टीम इन आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई अन्य ठगी की वारदातों का पता लगाया जा सके।
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