सुरक्षा में भारी चूक का मामला
बिहार के पूर्णिया स्थित सेंट्रल जेल से सुरक्षा में सेंध लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां ससीमन केंद्र में बंद एक बांग्लादेशी नागरिक जेल की खिड़की की रॉड तोड़कर भाग निकला। घटना के सामने आने के बाद जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। फरार कैदी की पहचान बांग्लादेश के नारायणपुर जिला निवासी जमशेद जलक सिकंदर शाह के पुत्र मन्ना के रूप में की गई है। मन्ना पिछले 3 साल से इस जेल में बंद था।
कैसे हुआ फरार?
जेल अधिकारियों को कैदी के फरार होने की जानकारी तब मिली जब नियमित रूप से कैदियों की गिनती की जा रही थी। गणना के दौरान जब एक बंदी कम पाया गया, तो जेल में अफरा-तफरी मच गई। जांच में यह सामने आया कि मन्ना ने जेल के ससीमन केंद्र की खिड़की की रॉड को तोड़ दिया और वहां से बाहर निकलने में सफल रहा। पूर्णिया सेंट्रल जेल को राज्य की सुरक्षित जेलों में गिना जाता है, ऐसे में इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पूर्णिया के एसएसपी डॉक्टर शौर्य सुमन ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि खजांची हाट थाना में मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस की टीमें फरार कैदी की तलाश में जुट गई हैं और उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही, जिला पदाधिकारी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी खिड़की तोड़ने में कैसे कामयाब रहा और इसके पीछे किसकी लापरवाही रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है ताकि कैदी के भागने के सटीक समय और रास्ते का पता चल सके।
2023 में हुई थी गिरफ्तारी
फरार हुआ बांग्लादेशी नागरिक मन्ना अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में पकड़ा गया था। उसे 2023 में एसएसबी द्वारा सुपौल के बिहपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास न तो कोई पासपोर्ट था और न ही वीजा या भारत में रहने के लिए कोई वैध दस्तावेज मिला था। कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे 2023 में ही सुपौल से पूर्णिया सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
जेल की क्षमता और चुनौतियां
पूर्णिया सेंट्रल जेल की क्षमता 1,900 कैदियों की है। यह जेल राज्य के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी केंद्रों में मानी जाती है, जहां कई अन्य राज्यों के कुख्यात अपराधी भी बंद हैं। ऐसे में एक विदेशी नागरिक का सुरक्षित घेरे से निकल जाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस अब अन्य विदेशी कैदियों की सुरक्षा की भी समीक्षा कर रहे हैं जो वर्तमान में ससीमन केंद्र में बंद हैं।
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