बंगाल: सरकारी शिक्षकों के प्राइवेट ट्यूशन पर शिकंजा, राज्य सरकार ने बिठाई जांच

पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन देने की शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं। NHRC के नोटिस के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला स्कूल निरीक्षकों को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त तथा प्रायोजित स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों द्वारा कथित रूप से निजी ट्यूशन कराने के मामलों को गंभीरता से लिया है और इन्हें लेकर जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला स्कूल निरीक्षकों (DI) से कहा है कि वे ऐसी शिकायतों की पड़ताल करें और जरूरी कदम उठाएं। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से 4 जून को निकाले गए आदेश में बताया गया है कि इस सिलसिले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से एक नोटिस मिला है।

NHRC में दर्ज शिकायत में क्या कहा गया

NHRC के पास पहुंची शिकायत में आरोप है कि कुछ सरकारी स्कूल शिक्षक शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 28 और कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए गैरकानूनी ढंग से निजी ट्यूशन चला रहे हैं। शिकायत में यह भी बताया गया है कि कुछ शिक्षक छात्रों को परीक्षा में कम अंक देने या शैक्षणिक मूल्यांकन में नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर अपने पास ट्यूशन पढ़ने के लिए मजबूर करते हैं। इसकी वजह से एक ओर जहां छात्रों का शोषण हो रहा है, वहीं वैध तरीके से ट्यूशन देने वाले शिक्षकों की आमदनी पर भी असर पड़ रहा है।

नियम इस बारे में क्या तय करते हैं

स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में साफ किया है कि आरटीई एक्ट 2009 की धारा 35(2) के तहत राज्य सरकार ने 14 फरवरी 2011 को एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के अनुसार किसी भी स्कूल में पदस्थ शिक्षक को किसी भी रूप में निजी ट्यूशन या निजी शिक्षण कार्य में शामिल होने की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही, स्कूल शिक्षा विभाग की 8 मार्च 2018 की अधिसूचना में भी दो टूक कहा गया है कि कोई भी शिक्षक निजी फायदे के लिए किसी तरह की ट्यूशन नहीं करा सकता। हालांकि स्कूल या संस्थान की ओर से चलाए जाने वाले अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों में शिक्षक मदद कर सकते हैं।

जिला स्कूल निरीक्षकों को मिले निर्देश

विकास भवन में स्थित स्कूल शिक्षा निदेशालय के प्रशासनिक उपनिदेशक की ओर से निकाले गए आदेश में सभी जिला स्कूल निरीक्षकों (माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा) से कहा गया है कि उनके जिले में अगर इस तरह की कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच की जाए और नियमों के मुताबिक जरूरी कार्रवाई हो। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों द्वारा आरटीई कानून और अदालती निर्देशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच में आरोप सही पाए जाने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।

शिक्षा विभाग कस सकता है निगरानी का शिकंजा

इस आदेश के बाद उम्मीद है कि राज्य भर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन कराने के मामलों पर नजर और कड़ी हो जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के हितों की हिफाजत करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता कायम रखना उसकी पहली जिम्मेदारी है। अब हर किसी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिला स्तर पर होने वाली जांच में कौन से तथ्य उभरकर आते हैं और विभाग इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।

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