अपने तेल अवीव वाले चहेतों को लगाम लगाओ, ईरान ने अमेरिका को दी सीधी चुनौती

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह इजरायल पर नियंत्रण रखे, जबकि दूसरी ओर इजरायल के भीतर ही नेतन्याहू के बयानों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ईरान का अमेरिका को कड़ा संदेश

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल के बीच के संबंधों पर तल्ख टिप्पणी की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ के उस हालिया बयान पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को जान से मारने की धमकी दी थी। अराघची ने सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह तेल अवीव में बैठे अपने चहेतों को काबू में रखे, वरना इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अराघची के अनुसार, अमेरिका ने पूर्व में वादा किया था कि वह इजरायल को शांत रखेगा, लेकिन अगर वे अपने आका के निर्देशों की अनदेखी करते हैं, तो ईरान उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाएगा।

इजरायल के दावों पर अराघची की प्रतिक्रिया

हाल ही में इजरायली मीडिया में इजरायल काट्ज़ के बयान सामने आए, जिसमें उन्होंने ईरानियों को महज एक चतुर व्यापारी करार दिया जो बातचीत की मेज पर रियायतें पाने की कोशिश कर रहे हैं। काट्ज़ ने जोर देकर कहा कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। इस पर पलटवार करते हुए अराघची ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान अपने नेतृत्व और अपने नागरिकों के खिलाफ की गई किसी भी प्रकार की धमकी का तत्काल और करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इजरायल के भीतर नेतन्याहू की आलोचना

इजरायल की घरेलू राजनीति में भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर घमासान मचा है। इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इजराइली समाचार पत्र येदियोथ अहरोनोथ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आइज़ेनकोट ने कहा कि नेतन्याहू ने ईरान की परमाणु शक्ति को लेकर जनता के बीच जानबूझकर डर का माहौल बनाया है। आइज़ेनकोट ने स्पष्ट किया कि नेतन्याहू के ये दावे पूरी तरह से झूठ और वास्तविकता से दूर हैं। विपक्षी पार्टी यशार के प्रमुख ने कहा कि ईरान के पास कोई परमाणु बम नहीं था और प्रधानमंत्री केवल जनता को भयभीत करने के लिए झूठ बोल रहे हैं।

परमाणु कार्यक्रम और नेतन्याहू का रुख

गादी आइज़ेनकोट की यह आलोचना नेतन्याहू के हालिया साक्षात्कार के बाद आई है, जिसमें उन्होंने इजरायल के चैनल 14 से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ईरान जाकर उन परमाणु बमों से बचाव किया है जो ईरान के पास पहले से मौजूद थे। हालांकि, ईरान लगातार इन दावों को खारिज करता आया है। ईरान का आधिकारिक पक्ष यही है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है।

शांति वार्ता की वर्तमान स्थिति

मौजूदा तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की कतर के प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, ईरानी अधिकारी भी दोहा पहुंच चुके हैं ताकि कतरी मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत की जा सके। अमेरिका का दावा है कि तेहरान के साथ तकनीकी स्तर की चर्चा जारी है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी वार्ता से साफ इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि उनकी प्राथमिकता अंतरिम समझौते को लागू करना और रोके गए फंड को जारी करवाना है। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एलेक्स वटांका ने अल जज़ीरा को बताया कि ईरान के भीतर इस समझौते को लेकर काफी संशय है कि क्या कागज पर हुए ये वादे वास्तव में जमीन पर कभी लागू हो पाएंगे या नहीं।

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